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सुप्रीम कोर्ट: आम्रपाली समूह के पूर्व सीएफओ की जमानत याचिका खारिज हुई, निचली अदालत को आरोप तय करने का निर्देश
Wed, 30 Mar 2022 08:30 PM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Wed, 30 Mar 2022 08:30 PM IST
सार
मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में गिरफ्तार किए गए आम्रपाली समूह के पूर्व सीएफओ चंद्र प्रकाश वाधवा को पिछले साल दिसंबर में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत देने से मना कर दिया था, जिसे उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : पीटीआई (फाइल)
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को आम्रपाली समूह के पूर्व मुख्य वित्त अधिकारी (सीएफओ) चंद्र प्रकाश वाधवा को जमानत देने से इनकार कर दिया। वाधवा ने चिकित्सकीय आधार पर जमानत दिए जाने का अनुरोध किया था। अदालत ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि अगर वाधवा के खिलाफ कोई आरोप हों तो उन्हें तय किया जाए।
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न्यायाधीश यूयू ललित, एस रविंद्र भट और पीएस नरसिंहा की पीठ ने पूर्व में वाधवा की जांच के लिए एक मेडिकल बोर्ड के गठन का निर्देश दिया था। पीठ ने कहा कि विचाराधीन रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर रखा गया है। रिपोर्ट के अनुसार इस बोर्ड के सदस्यों में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक और न्यूरोलॉजी, हड्डी रोग सर्जरी, कार्डियोलॉजी और दवाओं के विभाग के प्रमुख शामिल थे।
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याचिकाकर्ता की जांच करने के बाद बोर्ड ने एक रिपोर्ट तैयार की थी। यह रिपोर्ट बताती है कि वाधवा की चिकित्सकीय स्थिति ठीक है। वाधवा की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता ने योग्यता के आधार पर जमानत याचिका पर जिरह की।
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पीठ ने इस बात का संज्ञान लेते हुए कि तीन मामलों में आरोपपत्र दाखिल किए गए हैं, कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि ईडी की ओर दर्ज की गई तीनों शिकायतों में याचिकाकर्ता एकमात्र प्राकृतिक व्यक्ति है जिसे तीसरी शिकायत में कॉरपोरेट संस्थाओं के अलावा आरोपी के रूप में रखा गया है। इसके साथ ही पीठ ने जमानत को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ वाधवा की याचिका खारिज कर दी।
इसके साथ ही पीठ ने कई निर्देश भी जारी किए। पीठ ने कहा कि ईडी की सभी तीन शिकायतों पर अगर कोई आरोप होगा तो वह तुरंत किया जाएगा। आरोप तय करने की कवायद को सुविधाजनक बनाने के लिए आरोपी को पांच अप्रैल 2022 को संबंधित अदालत में पेश किया जाएगा। आरोप तय होने की स्थिति में याचिकाकर्ता जमानत याचिका दायर करने के लिए स्वतंत्र होगा।
पीठ ने कहा कि रिकॉर्ड बताते हैं कि वाधवा पहले ही एक साल और चार महीने की वास्तविक हिरासत पूरी कर चुके हैं। पिछले साल दिसंबर में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाधवा को जमानत देने से मना कर दिया था, जिसे उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। उन्हें दिसंबर 2020 में मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था।