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SC: सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीदवारों के अपराधिक रिकॉर्ड से जुड़ी याचिका खारिज की, कहा- ये चुनाव आयोग का मामला

Fri, 05 Aug 2022 02:58 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव Updated Fri, 05 Aug 2022 02:58 PM IST
सार

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में राजनीति के अपराधीकरण को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सभी राजनीतिक दलों को निर्देश दिया था कि वे अपने प्रत्याशियों के आपराधिक रिकॉर्ड का ब्यौरा मीडिया में प्रकाशित करवाएं।

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Supreme Court dismissed petition related to criminal record of candidates
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social media

विस्तार

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में प्रत्याशियों के आपराधिक रिकॉर्ड का ब्यौरा प्रकाशित न करने वाली पार्टियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है। न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा की पीठ ने कहा कि चुनाव आयोग इस मामले में सक्षम प्राधिकारी है और यह चुनाव आयोग का विषय है। 

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दरअसल, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में राजनीति के अपराधीकरण को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सभी राजनीतिक दलों को निर्देश दिया था कि वे अपने प्रत्याशियों के आपराधिक रिकॉर्ड का ब्यौरा मीडिया में प्रकाशित करवाएं। इसको लेकर कोर्ट में याचिका दायर कर आदेश की अवमानना करने वाले दलों के खिलाफ कार्यवाही शुरू करने की मांग की गई थी। 

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याचिकाकर्ता ने बताया कि सभी प्रमुख पार्टियों ने 2018 में आए SC के आदेश का पालन नहीं किया। शीर्ष अदालत एक वकील ब्रजेश सिंह द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, इसमें सोनिया गांधी, अरविंद केजरीवाल और अखिलेश यादव सहित कई पार्टी नेताओं के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू करने की मांग की गई थी।

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शीर्ष अदालत ने अगस्त, 2021 में राजनीतिक दलों को अपनी वेबसाइटों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपने उम्मीदवारों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों का विवरण और उन्हें चुनने के कारणों के साथ-साथ बिना आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को टिकट नहीं देने का निर्देश दिया था। कहा गया था कि ये विवरण उम्मीदवार के चयन के 48 घंटे के भीतर या नामांकन दाखिल करने की पहली तारीख से कम से कम दो सप्ताह पहले, जो भी पहले हो, प्रकाशित किया जाना चाहिए।


शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया था कि विवरण फेसबुक और ट्विटर सहित राजनीतिक दलों के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और एक स्थानीय स्थानीय भाषा और एक राष्ट्रीय समाचार पत्र में भी प्रकाशित किया जाना चाहिए।

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