फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court disillusion with judicial process delays in legal proceedings

Supreme Court: 'न्यायिक प्रक्रिया से मोहभंग का खतरा', मुकदमों का फैसला आने में देरी पर अदालत की बड़ी टिप्पणी

Mon, 23 Oct 2023 04:51 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति भास्कर Updated Mon, 23 Oct 2023 04:51 PM IST
सार

अदालती कार्यवाही में देरी के कारण मुकदमा दायर करने वाले लोगों का न्यायिक प्रक्रिया से मोहभंग हो सकता है। ये टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट ने की है। अदालत ने लंबित मामलों का तेजी से निपटारा व न्यायिक प्रणाली में तत्काल सुधार पर जोर देते हुए कई अहम सुझाव दिए।

विज्ञापन
Supreme Court disillusion with judicial process delays in legal proceedings
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी कार्यवाही के तार्किक अंत तक नहीं पहुंचने और देशभर की अदालतों में लंबित मामलों पर चिंता जाहिर की है। अदालत ने मुकदमों के कछुए की गति से चलने के कारण जनता का "न्यायिक प्रक्रियाओं से मोहभंग" होने के खतरे से आगाह किया है। शीर्ष अदालत ने मुकदमे के दौरान पक्षकारों की तरफ से अपनाई जाने वाली टालमटोल की रणनीति पर भी चिंता जाहिर की।
विज्ञापन


41 साल से अदालत में लंबित है मामला
कोर्ट ने लंबित मामलों में एक का जिक्र करते हुए कहा, 41 साल पहले संपत्ति विवाद का मुकदमा करने वाले याचिकाकर्ता अभी भी अंधेरे में हैं। अदालत ने लंबित मामलों को निपटाने के लिए देश की न्यायिक प्रणाली में तत्काल सुधार का आह्वान किया है।
विज्ञापन


कौन सी पीठ ने पारित किया आदेश
न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट (अब सेवानिवृत्त) और जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ ने निचली अदालतों के लिए कई अहम निर्देश जारी किए। अदालत ने कहा, 41 वर्षों के बाद भी मुकदमेबाजी हो रही है। जिरह किया जा रहा है कि एकमात्र वादी के कानूनी प्रतिनिधि के रूप में किसे रिकॉर्ड पर लाया जाना चाहिए। यह एक क्लासिक मामला है। पीठ ने शुक्रवार को जारी फैसले में कहा, देश का लोकतंत्र न्यायपालिका पर निर्भर है।
विज्ञापन
विज्ञापन


नौकरशाही की अक्षमता को दूर करने की जरूरत
अदालत ने कहा कि भारत की न्यायपालिका सर्वोपरि मिशन के रूप में न्याय देती है। दो जजों की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा, "हमें अनुकूलन और सुधार करना चाहिए। हमें सुनिश्चित करना चाहिए कि न्याय एक मृगतृष्णा नहीं बल्कि सभी के लिए एक वास्तविकता हो।" मुकदमे के निपटारे में विलंब और नौकरशाही की अक्षमता को दूर करने की जरूरत पर बल देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, अब समय आ चुका है जब अदालतों में देरी और लंबित मामलों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए।

नागरिकों का विश्वास बहाल करने का आह्वान
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, अदालतों में टालमटोल का समय बहुत पहले चला गया है। न्याय, नौकरशाही की अक्षमता का शिकार नहीं हो सकता। हमें अब कार्रवाई करनी चाहिए, क्योंकि बहुत देर हो चुकी है। अदालत ने कानून के संरक्षक के रूप में, एक न्यायसंगत समाज के वादे में नागरिकों का विश्वास बहाल करने का आह्वान किया। तत्परता के साथ कानूनी सुधार की यात्रा शुरू करने की अपील करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हम जो विरासत छोड़ेंगे वह राष्ट्र की नियति को आकार देगी। 

मुकदमे की तारीख के लिए वकीलों से बात करें
अदालत ने कहा कि मुकदमे की तारीख, पार्टियों की ओर से पेश होने वाले अधिवक्ताओं के परामर्श से तय की जाएगी ताकि वे अपने कैलेंडर को समायोजित कर सकें। इसमें कहा गया है कि एक बार मुकदमे की तारीख तय हो जाने के बाद, मुकदमा यथासंभव दिन-प्रतिदिन के आधार पर आगे बढ़ना चाहिए।


मामलों को लंबित रखने से बचने का बेहतर तरीका
जिला और तालुका अदालतों के ट्रायल जज जहां तक संभव हो सके एक डायरी रखेंगे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी भी दिन सुनवाई के लिए केवल इतनी ही संख्या में मामले सूचीबद्ध किए जाएं, जिन्हें निपटाया जा सके। साक्ष्यों की रिकॉर्डिंग पूरी करने पर भी जोर दिया गया ताकि मामलों के बैकलॉग यानी लंबे समय तक लंबित रखने से बचा जा सके।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed