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मथुरा रिफाइनरी: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- अधिग्रहित की गई भूमि के मुआवजे की दर बढ़ाएं, हाईकोर्ट का फैसला पलटा

Mon, 02 Dec 2024 06:57 AM IST
दीपक कुमार शर्मा राजीव सिन्हा, अमर उजाला
राजीव सिन्हा, अमर उजाला Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Mon, 02 Dec 2024 06:57 AM IST
सार

अपीलकर्ता के वकील की ओर से कहा गया कि ऐसी भूमि जो रिफाइनरी के नजदीक नहीं है, उसके लिए 15 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से मुआवजा दिया गया है। वहीं, अपीलकर्ताओं की जमीन रिफाइनरी के ठीक सामने है। इसके बाद भी मुआवजा मात्र 1.93 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से दिया गया।

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Supreme Court directs Uttar Pradesh govt to increase compensation rate for Mathura Refinery land acquired
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : पीटीआई

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को मथुरा में रिफाइनरी के लिए 47 साल पहले अधिग्रहित की गई 263.05 एकड़ भूमि के लिए मुआवजे की दर बढ़ाने का निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने यूपी सरकार के अपीलकर्ताओं की भूमि को कृषि भूमि मानकर मिट्टी के प्रकार के आधार पर मुआवजा देने के फैसले को खारिज कर भूमि मालिकों को 1.93 रुपये की बजाय 15 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से मुआवजा देने का आदेश दिया।

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बता दें कि 5 फरवरी, 1977 की अधिसूचना द्वारा ग्राम अन्नानपुरा, तहसील एवं जिला मथुरा की 263.05 एकड़ भूमि नियोजित औद्योगिक विकास के लिए उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकासनिगम के लिए अधिग्रहित की गई थी। 13 मई, 1977 को भूमि का कब्जा लिया गया। विशेष भूमि अधिग्रहण अधिकारी ने 30 अगस्त, 1980 को मिट्टी की गुणवत्ता के आधार पर मुआवजा निर्धारित किया।  इस मामले में अनेक सिंह आदि द्वारा दायर अपीलों को स्वीकार करते हुए जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने 22 जनवरी, 1977 को कलेक्टर मथुरा द्वारा जारी आदेश की ओर ध्यान दिलाया, जिसमें बताया गया था कि मथुरा रिफाइनरी के आसपास के एक किमी के दायरे में आने वाले क्षेत्रों की भूमि का मूल्यांकन 15 रुपये प्रति वर्ग मीटर निर्धारित किया गया है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला पलटा
अपीलकर्ता के वकील की ओर से कहा गया कि ऐसी भूमि जो रिफाइनरी के नजदीक नहीं है, उसके लिए 15 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से मुआवजा दिया गया है। वहीं, अपीलकर्ताओं की जमीन रिफाइनरी के ठीक सामने है। इसके बाद भी मुआवजा मात्र 1.93 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से दिया गया। अपीलकर्ताओं ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी याचिका दाखिल की थी। लेकिन, हाईकोर्ट ने 30 अप्रैल 2019 को सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को खारिज कर कहा कि अपीलकर्ता सभी वैधानिक लाभों के साथ-साथ दी गई राशि पर ब्याज के भी हकदार होंगे। कोर्ट ने कहा है कि भुगतान आठ सप्ताह की अवधि के भीतर किया जाना चाहिए।
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