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SC: ‘दिव्यांग बच्चों के लिए माताओं को अवकाश से इनकार सांविधानिक कर्तव्य का उल्लंघन’ सुप्रीम कोर्ट ने की टिप्पण

Tue, 23 Apr 2024 06:03 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Tue, 23 Apr 2024 06:03 AM IST
सार

पीठ ने कहा कि महिलाओं को बाल देखभाल अवकाश (सीसीएल) का प्रावधान एक महत्वपूर्ण सांविधानिक उद्देश्य को पूरा करता है और दिव्यांग बच्चों की माताओं को इससे वंचित करना कार्यबल में महिलाओं की समान भागीदारी सुनिश्चित करने के सांविधानिक कर्तव्य का उल्लंघन होगा।

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Supreme Court Denying leave to mothers disabled children is violation of constitutional duty himachal Pradesh
Supreme Court - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिव्यांग बच्चे की देखभाल करने वाली कामकाजी मां को बाल देखभाल अवकाश देने से इन्कार करना कार्यबल में महिलाओं की समान भागीदारी सुनिश्चित करने के सांविधानिक कर्तव्य का उल्लंघन है। सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि यह सिर्फ विशेषाधिकार का मामला नहीं है बल्कि सांविधानिक कर्तव्य का मामला है।

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पीठ ने कहा कि महिलाओं को बाल देखभाल अवकाश (सीसीएल) का प्रावधान एक महत्वपूर्ण सांविधानिक उद्देश्य को पूरा करता है और दिव्यांग बच्चों की माताओं को इससे वंचित करना कार्यबल में महिलाओं की समान भागीदारी सुनिश्चित करने के सांविधानिक कर्तव्य का उल्लंघन होगा। हिमाचल प्रदेश के नालागढ़ में एक कॉलेज में कार्यरत एक सहायक प्रोफेसर शालिनी धर्माणी ने हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जिसमें केंद्रीय सिविल सेवा (अवकाश) नियम के तहत बाल देखभाल अवकाश की मांग वाली याचिका खारिज कर दी गई थी। बच्चा जन्म से ही आनुवांशिक विकारों से पीड़ित है।

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मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति गठन के भी निर्देश
पीठ ने हिमाचल सरकार को विशेष दिव्यांग बच्चों का पालन-पोषण करने वाली माताओं के लिए छुट्टियों के नियमों पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया। साथ ही मामले के सभी पहलुओं को देखने के लिए राज्य के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति के गठन का भी निर्देश दिया। अदालत ने इस मामले में केंद्र सरकार को भी पक्षकार बनाया और उससे जवाब मांगा। साथ ही कोर्ट ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से मामले में मदद करने को कहा है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि समिति की रिपोर्ट जुलाई तक तैयार की जानी चाहिए और मामले को अगस्त के लिए रख दिया। इतना ही नहीं पीठ ने हिमाचल प्रदेश सरकार के वकील से पूछा कि क्या वे बच्चे की देखभाल के लिए कोई छुट्टी देते हैं या बच्चे के बीमार पड़ने की स्थिति में महिला कर्मचारी को इस्तीफा देना पड़ता है। वकील ने मामले में निर्देश लेने के लिए समय मांगा। महिला को दिव्यांग बेटे की देखभाल के लिए छुट्टी देने से इसलिए इन्कार कर दिया गया था क्योंकि उन्होंने अपनी सभी स्वीकृत छुट्टियां खत्म कर ली थीं।

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दिव्यांगों के अधिकार कानून के निराशाजनक कार्यान्वयन पर शीर्ष अदालत नाराज
सुप्रीम कोर्ट ने अपेक्षित नियम बनाने में कुछ राज्यों की नाकामी पर नाराजगी जताते हुए सोमवार को कहा कि दिव्यांगों के अधिकार अधिनियम 2016 का कार्यान्वयन अभी भी ‘निराशाजनक स्तर’ पर है। सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ अधिनियम को लागू करने के लिए जिला स्तरीय समितियों के गठन की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रही है। पीठ ने कहा कि चूक के बावजूद, अधिनियम का कार्यान्वयन अभी भी निराशाजनक स्थिति में है। कई राज्यों ने इस अधिनियम के तहत नियम तक नहीं बनाए हैं। पीठ ने कहा कि कई राज्यों ने अधिनियम के तहत अनिवार्य आयुक्तों की नियुक्ति भी नहीं की है। हमारा मानना है कि अधिनियम के कार्यान्वयन की स्थिति अभी तय करने की जरूरत है। इसी के साथ पीठ ने मामले की सुनवाई जुलाई के दूसरे हफ्ते के लिए स्थगित कर दी।

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