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नीलगाय को हिंसक पशु न मानने वाली अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने नहीं की सुनवाई

Sat, 16 Jul 2016 12:11 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 16 Jul 2016 12:11 AM IST
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Supreme Court denied to hear plea asking Nilgai as a non wild animal
नीलगाय - फोटो : Getty

सुप्रीम कोर्ट ने नीलगाय, बंदर और जंगली सुअर को ‘हिंसक पशु’ की श्रेणी में डालने वाली केंद्र सरकार की अधिसूचना को निरस्त करने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। हालांकि शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट जाने की अनुमति दे दी। इसके बाद याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस ले ली।

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केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और बिहार में एक वर्ष के लिए नीलगाय, बंदर और जंगली सुअर को हिंसक पशु की श्रेणी में डालने के लिए तीन अधिसूचना जारी की है। प्रधान न्यायाधीश टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने गौरी मुलेखी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि अगर वह चाहें तो हाईकोर्ट जा सकते हैं।
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याचिका में कहा गया था कि केंद्र सरकार को इस तरह की अधिसूचना जारी करने का अधिकार नहीं है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि इन जानवरों को मारने के लिए लोग भाड़े पर रखे जा रहे हैं।

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याचिका में क्या है?

Supreme Court denied to hear plea asking Nilgai as a non wild animal
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : getty

गत वर्ष एक दिसंबर को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर बिहार के कुछ जिलों में एक साल के लिए नीलगाय और जंगली सुअर को हिंसक पशु की श्रेणी में डाल दिया गया था।

वहीं तीन फरवरी, 2016 को मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर एक साल के लिए उत्तराखंड के कुछ जिलों में जंगली सुअर को हिंसक पशुओं की श्रेणी में डाल दिया था। जबकि गत 24 मई को जारी तीसरी अधिसूचना में एक वर्ष के लिए हिमाचल प्रदेश के कुछ जिलों में बंदर को हिंसक पशु की श्रेणी में डाल दिया था।

याचिका में कहा गया था कि बिना किसी पुख्ता वैज्ञानिक आधार के इस तरह की अधिसूचना जारी नहीं की जानी चाहिए। एक बार अगर किसी जानवर को हिंसक पशु की श्रेणी में डाल दिया गया तो जंगली जानवर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मिलने वाले संरक्षण से वह वंचित हो जाता है।

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