नीलगाय को हिंसक पशु न मानने वाली अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने नहीं की सुनवाई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सुप्रीम कोर्ट ने नीलगाय, बंदर और जंगली सुअर को ‘हिंसक पशु’ की श्रेणी में डालने वाली केंद्र सरकार की अधिसूचना को निरस्त करने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। हालांकि शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट जाने की अनुमति दे दी। इसके बाद याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस ले ली।
केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और बिहार में एक वर्ष के लिए नीलगाय, बंदर और जंगली सुअर को हिंसक पशु की श्रेणी में डालने के लिए तीन अधिसूचना जारी की है। प्रधान न्यायाधीश टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने गौरी मुलेखी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि अगर वह चाहें तो हाईकोर्ट जा सकते हैं।
याचिका में कहा गया था कि केंद्र सरकार को इस तरह की अधिसूचना जारी करने का अधिकार नहीं है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि इन जानवरों को मारने के लिए लोग भाड़े पर रखे जा रहे हैं।
याचिका में क्या है?
गत वर्ष एक दिसंबर को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर बिहार के कुछ जिलों में एक साल के लिए नीलगाय और जंगली सुअर को हिंसक पशु की श्रेणी में डाल दिया गया था।
वहीं तीन फरवरी, 2016 को मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर एक साल के लिए उत्तराखंड के कुछ जिलों में जंगली सुअर को हिंसक पशुओं की श्रेणी में डाल दिया था। जबकि गत 24 मई को जारी तीसरी अधिसूचना में एक वर्ष के लिए हिमाचल प्रदेश के कुछ जिलों में बंदर को हिंसक पशु की श्रेणी में डाल दिया था।
याचिका में कहा गया था कि बिना किसी पुख्ता वैज्ञानिक आधार के इस तरह की अधिसूचना जारी नहीं की जानी चाहिए। एक बार अगर किसी जानवर को हिंसक पशु की श्रेणी में डाल दिया गया तो जंगली जानवर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मिलने वाले संरक्षण से वह वंचित हो जाता है।