फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court declines to stay Maharashtra law on dance bars, questions alcohol ban

डांस बार में शराब पर पाबंदी सदियों पुरानी सोच : सुप्रीम कोर्ट

Thu, 22 Sep 2016 04:52 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 22 Sep 2016 04:52 AM IST
विज्ञापन
Supreme Court declines to stay Maharashtra law on dance bars, questions alcohol ban

डांस बार में शराब परोसने पर पाबंदी संबंधी महाराष्ट्र के नए कानून को सुप्रीम कोर्ट ने असंगत और पूरी तरह से मनमाना करार दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस तरह की पाबंदी यह बताती है कि राज्य सरकार की सोच सदियों पुरानी है। वहीं महाराष्ट्र सरकार का कहना था कि सरकार को अपने क्षेत्र में किसी भी जगह शराब पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार है।

विज्ञापन


हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फिलहाल कोई आदेश पारित नहीं किया है। महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील शेखर नाफडे ने न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष कहा कि शराब परोसना और पीना मूल अधिकार नहीं है।
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि जब तक सुप्रीम कोर्ट हमारे अधिकार को छीन न ले तब तक सरकार को यह कहने का पूरा अधिकार है कि शराब नहीं परोसी जा सकती। जवाब में पीठ ने कहा कि अगर शराब न परोसी जाए तो बार लाइसेंस देने का क्या मतलब था। वहीं डांस बार एसोसिएशन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील जयंत भूषण ने कहा कि राज्य सरकार डांस बार की जगह ‘जूस डांस बार’ चाहती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

डांस बार में सीसीटीवी कैमरे लगाने की अनिवार्यता पर भी सवाल

Supreme Court declines to stay Maharashtra law on dance bars, questions alcohol ban

पीठ ने सरकार से कहा कि डांस बार में डांसरों को परफार्म करने की इजाजत है। लेकिन शराब परोसने से आपके अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। जवाब में सरकार की ओर पेश वरष्ठि वकील ने कहा कि सरकार को शराब पर पाबंदी लगाने का अधिकार है।

पीठ ने डांस बार में सीसीटीवी कैमरे लगाने की अनिवार्यता पर भी सवाल उठाए। जवाब में वरिष्ठ वकील ने कहा कि अगर डांस बार में कुछ गलत होता है तो सीसीटीवी फुटेज से पुलिस को जांच में मदद मिलेगी।

अगर कोर्ट हमारे अधिकार को नजरअंदाज करती है तो इसका मतलब है कि राज्य की पुलिस के अधिकारों को नकारा जा रहा है। अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed