डांस बार में शराब पर पाबंदी सदियों पुरानी सोच : सुप्रीम कोर्ट
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डांस बार में शराब परोसने पर पाबंदी संबंधी महाराष्ट्र के नए कानून को सुप्रीम कोर्ट ने असंगत और पूरी तरह से मनमाना करार दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस तरह की पाबंदी यह बताती है कि राज्य सरकार की सोच सदियों पुरानी है। वहीं महाराष्ट्र सरकार का कहना था कि सरकार को अपने क्षेत्र में किसी भी जगह शराब पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार है।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फिलहाल कोई आदेश पारित नहीं किया है। महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील शेखर नाफडे ने न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष कहा कि शराब परोसना और पीना मूल अधिकार नहीं है।
उन्होंने कहा कि जब तक सुप्रीम कोर्ट हमारे अधिकार को छीन न ले तब तक सरकार को यह कहने का पूरा अधिकार है कि शराब नहीं परोसी जा सकती। जवाब में पीठ ने कहा कि अगर शराब न परोसी जाए तो बार लाइसेंस देने का क्या मतलब था। वहीं डांस बार एसोसिएशन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील जयंत भूषण ने कहा कि राज्य सरकार डांस बार की जगह ‘जूस डांस बार’ चाहती है।
डांस बार में सीसीटीवी कैमरे लगाने की अनिवार्यता पर भी सवाल
पीठ ने सरकार से कहा कि डांस बार में डांसरों को परफार्म करने की इजाजत है। लेकिन शराब परोसने से आपके अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। जवाब में सरकार की ओर पेश वरष्ठि वकील ने कहा कि सरकार को शराब पर पाबंदी लगाने का अधिकार है।
पीठ ने डांस बार में सीसीटीवी कैमरे लगाने की अनिवार्यता पर भी सवाल उठाए। जवाब में वरिष्ठ वकील ने कहा कि अगर डांस बार में कुछ गलत होता है तो सीसीटीवी फुटेज से पुलिस को जांच में मदद मिलेगी।
अगर कोर्ट हमारे अधिकार को नजरअंदाज करती है तो इसका मतलब है कि राज्य की पुलिस के अधिकारों को नकारा जा रहा है। अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी।