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SC: धनशोधन मामले में महिला पर कड़ी शर्तें लागू करने के ईडी के दावे पर 'सुप्रीम' फटकार, कहा- अगर केंद्र...

Thu, 16 Jan 2025 02:05 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: काव्या मिश्रा Updated Thu, 16 Jan 2025 02:05 PM IST
सार

ईडी का तर्क था कि धन-शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (पीएमएलए) के तहत महिलाओं को भी कड़ी जमानत शर्तों का पालन करना चाहिए। इस पर अदालत ने कहा कि यह दावा कानून के खिलाफ है।

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Supreme Court criticises ED over bail conditions for women in money laundering cases
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : पीटीआई

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने धनशोधन घोटाले मामलों में महिलाओं पर कड़ी जमानत शर्तें लागू करने के ईडी के दावे पर कड़ी आलोचना की, जबकि कानून में इस मामले में विशेष छूट दी गई है।

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क्या था ईडी का तर्क?
ईडी का तर्क था कि धन-शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (पीएमएलए) के तहत महिलाओं को भी कड़ी जमानत शर्तों का पालन करना चाहिए। हालांकि, पीएमएलए की धारा 45 (1) के तहत कुछ व्यक्तियों के लिए विशेष छूट दी गई है, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं। इस धारा के अनुसार, 16 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति, महिलाएं, बीमार या कमजोर लोग अगर विशेष अदालत निर्देश दे, तो उन्हें जमानत मिल सकती है। 
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पिछले फैसलों के अनुसार, यह छूट सभी महिलाओं पर लागू होती है, चाहे उनकी सामाजिक स्थिति, शिक्षा या पेशा कुछ भी हो, बशर्ते वे भागने का खतरा न पैदा करें या साक्ष्यों से छेड़छाड़ न करें।
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शीर्ष अदालत ने लगाई फटकार
न्यायाधीश अभय एस ओका और ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की पीठ शाइन सिटी समूह की कंपनियों से जुड़े धनशोधन घोटाले में आरोपी सरकारी स्कूल की शिक्षिका शशि बाला की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने कहा कि ईडी का यह दावा कानून के खिलाफ है और कहा कि ऐसी दलीलें स्वीकार नहीं की जाएंगी।

अदालत ने शशि बाला को जमानत देते हुए कहा कि वह नवंबर 2023 से हिरासत में हैं और उनके मामले की सुनवाई जल्द समाप्त होने की संभावना नहीं है। ईडी की दलीलें कानून के खिलाफ हैं। हम यह कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। पीठ ने बुधवार को सवाल करते हुए कहा कि अगर केंद्रीय सरकार की तरफ से मौजूद लोग कानून की बुनियादी बातों को नहीं जानते, तो उन्हें मामले में क्यों पेश होना चाहिए? 

यह है मामला
लखनऊ स्थित शाइन सिटी समूह पर उच्च रिटर्न का वादा करने वाली धोखाधड़ी वाली निवेश योजनाओं के माध्यम से जनता को 800-1000 करोड़ रुपये का धोखा देने का आरोप है। ईडी की जांच में पता चला है कि समूह और इसके प्रमोटर रशीद नसीम के खिलाफ 554 से अधिक प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। बाला को आरोपी बनाया गया था क्योंकि वह कथित तौर पर नसीम की प्रमुख सहयोगी थी।


ईडी के अनुसार, उसने अपराध की आय को वैध बनाने में भूमिका निभाई और धोखाधड़ी योजना के हिस्से के रूप में 36 लाख रुपये से अधिक प्राप्त किए। उसे नवंबर 2023 में गिरफ्तार किया गया था और बाद में सितंबर 2024 में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा जमानत से इनकार कर दिया गया था। बाद में बाला ने जमानत के लिए शीर्ष अदालत का रुख किया।

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