फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court criminal case Involvement no ground for property demolition Kathlal civic Body Kheda Gujarat

Supreme Court: अपराध में शामिल होना संपत्ति ध्वस्त करने का आधार नहीं, ऐसी कार्रवाई कानून पर बुलडोजर चलाने जैसी

Thu, 12 Sep 2024 09:21 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति भास्कर Updated Thu, 12 Sep 2024 09:21 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी भी अपराध में कथित संलिप्तता के आधार पर आरोपी की संपत्ति को ध्वस्त नहीं किया जा सकता। अदालत ने गुजरात से जुड़े एक मुकदमे में यह टिप्पणी की।

विज्ञापन
Supreme Court criminal case Involvement no ground for property demolition Kathlal civic Body Kheda Gujarat
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी अपराध में शामिल होने का आरोप, किसी आरोपी की संपत्ति ध्वस्त करने का आधार नहीं हो सकता। सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के एक स्थानीय निकाय को एक आरोपी की संपत्ति के मामले में यथास्थिति बरकरार रखने और उसका घर बुलडोजर से ध्वस्त करने की धमकी न देने का आदेश दिया। शीर्ष कोर्ट ने कहा, कानून से शासित होने वाले एक देश में इस तरह की धमकी समझ से परे है। इसे देश के कानून पर बुलडोजर चलाने के जैसा समझा जा सकता है।

विज्ञापन


जस्टिस हृषिकेष राय, जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस एसवीएन भट्टी ने कहा कि परिवार के किसी सदस्य द्वारा किया गया अपराध परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की वजह नहीं बन सकता। कोर्ट ने कहा, अपराध में कथित संलिप्तता किसी संपत्ति के विध्वंस का आधार नहीं है।
विज्ञापन


इसके अलावा, कथित अपराध को अदालत में उचित कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से साबित किया जाना चाहिए। जिस देश में कानून सर्वोच्च है, वहां ऐसी विध्वंस की धमकियों को अदालत नजरअंदाज नहीं कर सकती। अन्यथा, इस तरह की कार्रवाइयों को कानून पर बुलडोजर चलाने के रूप में देखा जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन




 चार हफ्ते में जवाब देने का निर्देश
पीठ ने विध्वंस से सुरक्षा की मांग करने वाली जावेद अली एम सैयद की याचिका पर गुजरात सरकार और खेड़ा जिले में कठलाल नगर निकाय को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब मांगा। इस बीच, याचिकाकर्ता की संपत्ति पर यथास्थिति बनाए रखनी होगी। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 2 सितंबर को एक मामले की सुनवाई के दौरान किसी अपराध के आरोपी के घरों या संपत्तियों को ध्वस्त करने की प्रवृत्ति की आलोचना की थी और कहा था, वह बुलडोजर न्याय से निपटने के लिए दिशा-निर्देश जारी करेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed