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सुप्रीम कोर्ट: केंद्र ने लगाई मध्यप्रदेश निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण पर फैसला वापस लेने की गुहार, यह मांग भी की

Mon, 27 Dec 2021 10:31 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Mon, 27 Dec 2021 10:31 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने 17 दिसंबर को अपने आदेश में मध्य प्रदेश स्थानीय निकाय चुनाव में ओबीसी के लिए आरक्षित सीटों के चुनाव पर रोक लगा दी थी। राज्य निर्वाचन आयोग को इन सीटों को सामान्य वर्ग के लिए घोषित करने का आदेश दिया था।

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Supreme Court: Center urged to withdraw the decision on OBC reservation in Madhya Pradesh civic elections
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : Social Media

विस्तार

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट याचिका देकर मध्य प्रदेश स्थानीय निकाय चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) सीटों में चुनाव पर लगी रोक हटाने की गुहार लगाई है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से साथ ही निकाय चुनाव को चार महीने स्थगित करने की भी मांग की है। ताकि राज्य सरकार, आयोग की रिपोर्ट पेश कर सके। साह ही राज्य चुनाव आयोग को उस आधार पर चुनाव कराने का आदेश देने की भी अपील की गई है।

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सुप्रीम कोर्ट ने 17 दिसंबर को अपने आदेश में मध्य प्रदेश स्थानीय निकाय चुनाव में ओबीसी के लिए आरक्षित सीटों के चुनाव पर रोक लगा दी थी। राज्य निर्वाचन आयोग को इन सीटों को सामान्य वर्ग के लिए घोषित करने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि ओबीसी आरक्षण अधिसूचना शीर्ष न्यायालय द्वारा पूर्व में दिए फैसलों के विपरीत है। केंद्र ने अपने आवेदन में कहा, एससी, एसटी और ओबीसी के उत्थान के लिए काम करना सरकार की प्राथमिकता है। ऐसे में अगर ओबीसी वर्ग को स्थानीय निकायों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिलता है तो सत्ता के विकेंद्रीकरण और निचले पायदान तक व्यवस्था की पहुंच की परिकल्पना पूरी नहीं हो पाएगी।
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केंद्र ने साथ ही कोर्ट से अंतरिम आदेश के तौर पर निकाय चुनाव स्थगित करने की मांग की है। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से उस मामले में पक्षकार बनाने का आग्रह किया है जिस मामले में 17 दिसंबर को आदेश पारित किया गया था। केंद्र ने यह भी कहा कि यह मुद्दा आम लोगों के हित से जुड़ा है। साथ ही पूरे देश में होने वाले चुनावों में ओबीसी आरक्षण के निर्धारण से भी संबंधित है।
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केंद्र की दलील, ओबीसी को होगा दोहरा नुकसान
ओबीसी को अपर्याप्त आरक्षण या आरक्षण न होने से दोहरा नुकसान पहुंचेगा। पहला, ओबीसी श्रेणी से संबंधित व्यक्ति लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से निर्वाचित पदों पर चुने जाने के अवसर से वंचित हो जाएंगे। दूसरा, इस तरह का अपर्याप्त आरक्षण ओबीसी समुदाय के मतदाताओं को अपने बीच के किसी व्यक्ति का चुनाव करने से वंचित कर देगा। यह सांविधानिक योजनाओं के पूरी तरह से विपरीत होगा।

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