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छोटे धार्मिक जमावड़े को इजाजत देने के केंद्र के सुझाव को महाराष्ट्र ने नकारा

Tue, 20 Oct 2020 01:55 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Tue, 20 Oct 2020 01:55 AM IST
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Supreme Court asks Maharashtra govt to consider new proposal to take out procession of Nanded Gurdwara management
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : पीटीआई

महाराष्ट्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में केंद्र के उस सुझाव का विरोध किया कि धीरे-धीरे सभी सुरक्षा मानदंडों के साथ धार्मिक समारोहों और जुलूसों को अनुमति दी जानी चाहिए।

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महाराष्ट्र सरकार ने इस बात पर जोर दिया कि कोविड-19 की स्थिति के मद्देनजर अभी ऐसा वक्त नहीं आया है कि पूजा स्थलों के दरवाजे खोल दिए जाएं और यह भी गौर किया जाना चाहिए कि महाराष्ट्र देश का सबसे प्रभावित राज्य है।
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राज्य सरकार ने अपना यह पक्ष जस्टिस एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष नांदेड़ गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की उस याचिका पर सुनवाई के दौरान रखा जिसमें दशहरा, तख्त इसनन, दीपमाला और गुरता गद्दी के मौकों पर छोटा जुलूस निकालने की मांग की गई थी। याचिका में कहा गया था कि यह तीन शताब्दी पुरानी परंपरा है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि प्रबंधन यह सुनिश्चित करेगा कि 50 से अधिक लोग इस जुलूस में शामिल न हो और ट्रक पर सवार होकर सभी सुरक्षा उपायों का पालन करें।
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केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने गृह मंत्रालय के नवीनतम अनलॉक दिशानिर्देशों का उल्लेख करते हुए कहा कि गृह मंत्रालय ने अब 100 व्यक्तियों को धार्मिक सभा की अनुमति दी है। उन्होंने कहा कि नांदेड़ की सिख समुदाय में एक विशिष्ट प्रासंगिकता है क्योंकि यह उनके पांच तख्तों में से एक है। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि जब याचिकाकर्ता जुलूस में शामिल लोगों की संख्या को प्रतिबंधित करने के लिए तैयार हैं तो ऐसी स्थिति में मध्य मार्ग अपनाया जाना चाहिए।

वहीं, महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत ने इसका कड़ा विरोध किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि धार्मिक सभा में लोगों की संख्या को नियंत्रित करना हमेशा असंभव हो जाता है और राज्य के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा को प्राथमिकता देगा आवश्यक है। उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय के दिशानिर्देश राज्य सरकारों के लिए सलाह हैं। महाराष्ट्र ने कोविड-19 के मामलों का खामियाजा उठाया है। अब जब कोरोना मरीजों की संख्या कम हो रही है, तो हम इस तरह के जुलूसों की अनुमति देने का जोखिम नहीं उठा सकते।


सभी की दलीलों को सुनने के बाद पीठ ने महाराष्ट्र सरकार के इस तर्क को स्वीकार कर लिया कि राज्य प्रशासन जमीनी स्थितियों का आकलन करने और महामारी को देखते हुए निर्णय लेने के लिए सबसे उपयुक्त है। शीर्ष अदालत ने गुरुद्वारा प्रबंधन समिति से अपने नए प्रस्ताव के साथ राज्य सरकार को प्रतिनिधित्व देने के लिए कहा है। राज्य ऑथारिटी नए सिरे से प्रस्ताव पर विचार करेगी। राज्य प्रशासन के निर्णय से असंतुष्ट होने पर प्रबंधन, बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख करने के लिए स्वतंत्र है।

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