फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court asks Jharkhand High Court to decide on maintainability of PIL for probe against CM Hemant Soren

Supreme Court: झारखंड हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट ने कहा, सीएम सोरेन के खिलाफ याचिका की विचारणीयता तय करें

Tue, 24 May 2022 08:04 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Tue, 24 May 2022 08:04 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि झारखंड हाईकोर्ट ने खुद अपने एक आदेश में कहा है कि पहले यह तय किया जाएगा कि याचिका विचार करने योग्य है या नहीं और इसके बाद याचिका में लगाए गए आरोपों पर कानून के अनुसार कार्यवाही की जाएगी।

विज्ञापन
Supreme Court asks Jharkhand High Court to decide on maintainability of PIL for probe against CM Hemant Soren
Supreme Court - फोटो : PTI (File)

विस्तार

खनन पट्टे आवंटित करने के काम में कथित अनियमितताओं को लेकर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ जांच की मांग करने वाली एक जनहित याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हो रही है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को हाईकोर्ट से कहा कि  पहले याचिका की विचारणीयता पर शुरुआती आपत्तियों की सुनवाई करें। याचिका में कुछ शेल कंपनियों के लेन-देन को लेकर भी जांच की मांग की गई है जिनका संचालन कथित तौर पर सोरेन के परिजन और सहयोगी करते थे।

विज्ञापन


न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और बेला एम त्रिवेदी की अवकाशकालीन पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट ने खुद अपने 13 मई के आदेश में कहा है कि वह पहले यह तय करेगी कि याचिका विचार करने योग्य है या नहीं और इसके बाद याचिका में लगाए गए आरोपों पर बात की जाएगी। यह जनहित याचिका शिव कुमार शर्मा ने दायर की है। पीठ ने कहा कि हमारा मानना यह है कि हाईकोर्ट को पहले याचिका की विचारणीयता पर शुरुआती आपत्तियों पर विचार करना चाहिए।
विज्ञापन


सिब्बल ने उठाए याचिकाकर्ता के इतिहास पर सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि हमारी टिप्पणी मामले की योग्यता को लेकर नहीं है और याचिका में लगाए गए आरोपों का निपटारा नहीं किया गया है। झारखंड सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि याचिकाकर्ता शर्मा ने भौतिक तथ्यों को छुपाया है कि वह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ कई जनहित याचिकाएं दायर करते रहे हैं। उन्होंने जनहित याचिकाओं पर साल 2010 में झारखंड हाईकोर्ट के फैसलों का उल्लेख भी किया।
विज्ञापन
विज्ञापन


सिब्बल ने कहा कि 17 मई को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शर्मा की एक याचिका में बंद लिफाफे में एक हलफनामा पेश किया था। ईडी ने कहा था कि उन्हें कुछ ऐसी सामग्री मिली है जो जनहित याचिका की विषय वस्तु है। सिब्बल ने पीठ से कहा कि सवाल यह है कि क्या जनहित याचिका से संबंधित किसी अन्य मामले के सीलबंद लिफाफे में लाई गई किसी बाहरी सामग्री को अदालत के समक्ष लाया जा सकता है। क्या हाईकोर्ट इस पर गौर कर सकता है?

ईडी की छापेमारी में मिली थी याचिका से जुड़ी सामग्री
इस पर पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट जनहित याचिका में जो कुछ भी करने का प्रस्ताव करता है, भले ही वह मानता हो कि याचिकाकर्ता वास्तविक नहीं है, वह मामले का स्वत: संज्ञान ले सकता है। वहीं, ईडी और कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कुछ अवलोकन किए गए हैं लेकिन ईडी द्वारा एक हलफनामा दायर किया गया है, क्योंकि 2012 में दर्ज कुछ अन्य प्राथमिकी में छापे के दौरा कुछ सामग्री मिली थी जो जनहित याचिका का विषय है।


उन्होंने कहा कि ईडी और सीबीआई को नोटिस जारी हुए थे और इसलिए वह हाईकोर्ट के सामने पेश हुए थे। मेहता ने आईएएस अधिकारी पूजा सिंहल के खिलाफ छापेमारी में हुई बरामदगी के बारे में जानकारी दी, जो उस समय राज्य खनन सचिव के पद पर थीं। ये छापेमारी ईडी ने 2012 में दर्ज 15 एफआईआर के संबंध में की थी जो खूंटी जिले में मनरेगा योजना में पैसे की हेराफेरी से संबंधित थीं। छापेमापी के दौरान खनन पट्टों के आवंटन और शेल कंपनियों को पैसा भेजने से जुड़ी सामग्री मिली थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed