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Supreme Court: दुर्लभ बीमारी की दवा चीन-पाकिस्तान को सस्ती तो भारत को क्यों नहीं? दवा कंपनी से 'सुप्रीम' सवाल
Sat, 05 Apr 2025 10:19 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Sat, 05 Apr 2025 10:19 PM IST
सार
देश की सर्वोच्च अदालत ने एक दुर्लभ बीमारी की दवा भारत में महंगी मिलने पर दवा कंपनी से इस मामले में सवाल पूछा है। बता दें कि, स्पाइनल मस्कुलर अट्रोफी (एसएमए) नाम की दुर्लभ बीमारी के उपचार में इस्तेमाल दोने वाली दवा चीन और पाकिस्तान के मुकाबले अधिक दामों पर बेची जाती है।
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Supreme Court
- फोटो : ANI
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने भारत में स्पाइनल मस्कुलर अट्रोफी (एसएमए) नाम की दुर्लभ बीमारी के उपचार में इस्तेमाल दोने वाली दवा रिसडिप्लाम की अधिक कीमत पर कंपनी से सवाल किए हैं। शीर्ष अदालत ने दवा बनाने वाली कंपनी से पूछा कि क्या यह दवा भारत में कम कीमत पर उपलब्ध कराई जा सकती है, जबकि पड़ोसी देशों पाकिस्तान और चीन को यह दवा सस्ती दर पर आपूर्ति की जाती है।
सीजेआई समेत तीन जजों की पीठ ने की सुनवाई
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ को इस दुर्लभ बीमारी से पीड़ित केरल की 24 वर्षीय महिला सबा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील आनंद ग्रोवर ने बताया कि दवा निर्माता मेसर्स एफ हॉफमैन-ला रोश लि. भारत के मुकाबले अन्य देशों को सस्ती दर पर यह दवा बेच रही है। इस पर पीठ ने दवा निर्माता कंपनी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।
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सुप्रीम कोर्ट ने दवा कंपनी से पूछा ये सवाल
पीठ ने अपने आदेश में कहा कि विवाद को ध्यान में रखते हुए, मेसर्स एफ हॉफमैन-ला रोश सुनवाई की अगली तिथि पर इस न्यायालय को बताए कि वह पड़ोसी देशों में उक्त औषधि किस दर पर बेचती है। पीठ ने कहा, यदि इस दवा का मूल्य भारत की तुलना में (अन्य देशों में) कम है, तो न्यायालय को यह भी सूचित किया जाएगा कि क्या भारत में भी दवा की उसी कम मूल्य पर आपूर्ति की जा सकती है।
मामले में अब 8 अप्रैल को होगी अगली सुनवाई
वरिष्ठ वकील आनंद ग्रोवर ने पीठ को यह भी बताया कि एसएमए रोगियों के लिए दवा की कीमत पाकिस्तान और चीन में अपेक्षाकृत सस्ती है, क्योंकि वहां की सरकारों ने इसमें हस्तक्षेप किया है। उन्होंने दलील दी कि भारत सरकार वैश्विक दवा निर्माता कंपनी के साथ इस दुर्लभ बीमारी की दवा सस्ती दर पर उपलब्ध कराने के लिए बातचीत क्यों नहीं कर सकती। शीर्ष अदालत ने इस तथ्य पर गौर करते हुए मामले को 8 अप्रैल के लिए सूचीबद्ध किया कि भारत में कई मरीज इस विकार से पीड़ित हैं।
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केरल हाईकोर्ट के आदेश पर रोक बरकरार
पीठ ने कहा कि 24 फरवरी का उसका अंतरिम आदेश अगली सुनवाई तक जारी रहेगा। 24 फरवरी को शीर्ष अदालत ने केरल हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसमें केंद्र सरकार से कहा गया था कि वह सबा को 18 लाख रुपये की दवाइयां मुहैया कराए, जो केंद्र सरकार की योजना के तहत ऐसे मरीजों को मिलने वाली 50 लाख रुपये की राशि से अलग है। केंद्र ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
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सीजेआई समेत तीन जजों की पीठ ने की सुनवाई
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ को इस दुर्लभ बीमारी से पीड़ित केरल की 24 वर्षीय महिला सबा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील आनंद ग्रोवर ने बताया कि दवा निर्माता मेसर्स एफ हॉफमैन-ला रोश लि. भारत के मुकाबले अन्य देशों को सस्ती दर पर यह दवा बेच रही है। इस पर पीठ ने दवा निर्माता कंपनी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।
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सुप्रीम कोर्ट ने दवा कंपनी से पूछा ये सवाल
पीठ ने अपने आदेश में कहा कि विवाद को ध्यान में रखते हुए, मेसर्स एफ हॉफमैन-ला रोश सुनवाई की अगली तिथि पर इस न्यायालय को बताए कि वह पड़ोसी देशों में उक्त औषधि किस दर पर बेचती है। पीठ ने कहा, यदि इस दवा का मूल्य भारत की तुलना में (अन्य देशों में) कम है, तो न्यायालय को यह भी सूचित किया जाएगा कि क्या भारत में भी दवा की उसी कम मूल्य पर आपूर्ति की जा सकती है।
मामले में अब 8 अप्रैल को होगी अगली सुनवाई
वरिष्ठ वकील आनंद ग्रोवर ने पीठ को यह भी बताया कि एसएमए रोगियों के लिए दवा की कीमत पाकिस्तान और चीन में अपेक्षाकृत सस्ती है, क्योंकि वहां की सरकारों ने इसमें हस्तक्षेप किया है। उन्होंने दलील दी कि भारत सरकार वैश्विक दवा निर्माता कंपनी के साथ इस दुर्लभ बीमारी की दवा सस्ती दर पर उपलब्ध कराने के लिए बातचीत क्यों नहीं कर सकती। शीर्ष अदालत ने इस तथ्य पर गौर करते हुए मामले को 8 अप्रैल के लिए सूचीबद्ध किया कि भारत में कई मरीज इस विकार से पीड़ित हैं।
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केरल हाईकोर्ट के आदेश पर रोक बरकरार
पीठ ने कहा कि 24 फरवरी का उसका अंतरिम आदेश अगली सुनवाई तक जारी रहेगा। 24 फरवरी को शीर्ष अदालत ने केरल हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसमें केंद्र सरकार से कहा गया था कि वह सबा को 18 लाख रुपये की दवाइयां मुहैया कराए, जो केंद्र सरकार की योजना के तहत ऐसे मरीजों को मिलने वाली 50 लाख रुपये की राशि से अलग है। केंद्र ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
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