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यूपीआई पर नए नियम से सियासी घमासान: जयराम रमेश का केंद्र पर हमला; बोले- सरकार ने भरोसा और पारदर्शिता तोड़ी
Tue, 15 Sep 2026 10:48 PM IST
शिवम गर्ग
एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली
Published by: शिवम गर्ग
Updated Tue, 15 Sep 2026 10:48 PM IST
सार
यूपीआई के नए एमडीआर ढांचे को लेकर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पहले फैसले का ऐलान करती है और बाद में नियम तय करती है। नई व्यवस्था में 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा व्यापारी यूपीआई लेनदेन पर 0.4% एमडीआर लगेगा, जबकि उपभोक्ताओं के लिए यूपीआई भुगतान मुफ्त रहेगा।
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जयराम रमेश, कांग्रेस नेता
- फोटो : Amar Ujala Graphics
विस्तार
यूपीआई लेनदेन पर नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) ढांचे को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस महासचिव और सांसद जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार पहले फैसलों का ऐलान करती है और बाद में उसके नियम और ढांचा तैयार करती है। उन्होंने इस प्रक्रिया को 'फास्ट यानी पहले घोषणा, बाद में सोच' करार दिया।
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'पहले ऐलान, फिर सोच' का लगाया आरोप
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि 6 अगस्त को वित्त मंत्री ने कहा था कि एमडीआर पर कोई फैसला नहीं हुआ है। इसके बाद 10 अगस्त को संसद में भी कहा गया कि एमडीआर का कोई ढांचा अंतिम रूप से तय नहीं हुआ है। रमेश के मुताबिक, 14 सितंबर को इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई और 24 घंटे के भीतर एमडीआर शुल्क की व्यवस्था सामने आ गई। उन्होंने इसे मोदी सरकार के 'फास्ट मूव्स' का एक और उदाहरण बताया।
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2,000 रुपये से ऊपर के UPI भुगतान पर MDR
यह विवाद एनपीसीआई की ओर से जारी संशोधित एमडीआर ढांचे के बाद सामने आया है। नई व्यवस्था के तहत 2,000 रुपये से अधिक के व्यक्ति-से-व्यापारी (P2M) यूपीआई लेनदेन पर 0.4 फीसदी एमडीआर लागू होगा। हालांकि, प्रति लेनदेन इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है। उदाहरण के तौर पर 2,000 रुपये के लेनदेन पर 0.4 फीसदी एमडीआर करीब 8 रुपये होगा। यह शुल्क व्यापारी स्तर पर लागू होने वाले एमडीआर ढांचे का हिस्सा है। उपभोक्ताओं के लिए यूपीआई भुगतान अभी भी मुफ्त रहेगा। नई व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगी और चुनिंदा व्यापारी लेनदेन पर प्रभावी होगी।
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P2P और 2,000 रुपये तक के भुगतान पर शुल्क नहीं
संशोधित ढांचे में व्यक्ति-से-व्यापारी लेनदेन और 2,000 रुपये तक के पी2एम यूपीआई पेमेंट को एमडीआर के दायरे से बाहर रखा गया है। जयराम रमेश ने हालांकि आशंका जताई कि भविष्य में 2,000 रुपये की सीमा में बदलाव किया जा सकता है और दूसरे यूपीआई लेनदेन पर भी शुल्क लगाने का रास्ता खुल सकता है।
'सरकार UPI पर शुल्क लगाने की तैयारी कर रही'
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि नए कानूनी प्रावधानों के जरिए सरकार यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि फिलहाल 2,000 रुपये से कम के यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने से बैंकों और सेवा प्रदाताओं को रोका गया है, लेकिन इससे अधिक राशि के लेनदेन के लिए ऐसी स्पष्ट सुरक्षा नहीं है। रमेश ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि भविष्य में दैनिक व्यक्ति-से-व्यक्ति यूपीआई भुगतान पर भी शुल्क लगाया जा सकता है। उन्होंने इसे पारदर्शिता और यूपीआई उपयोगकर्ताओं के भरोसे से जोड़ते हुए केंद्र पर निशाना साधा।
उपभोक्ताओं के लिए UPI अभी भी मुफ्त
संशोधित एमडीआर व्यवस्था के बावजूद आम उपभोक्ताओं के लिए यूपीआई भुगतान मुफ्त रहने की बात कही गई है। एमडीआर मुख्य रूप से व्यापारी पक्ष से जुड़े लेनदेन पर लागू होगा। हालांकि, कांग्रेस ने इस व्यवस्था को लेकर भविष्य में यूपीआई पर शुल्क लगाए जाने की आशंका जताई है।