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SC: 'क्या संसद, राज्यों द्वारा लगाए टैक्स की सीमा तय कर सकती है?' खनिज रॉयल्टी मामले पर राज्यों से सवाल

Wed, 28 Feb 2024 10:09 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Wed, 28 Feb 2024 10:09 PM IST
सार

कोर्ट ने माना कि संविधान के तहत राज्य सरकारें खनिज भूमि पर टैक्स लगा सकती हैं, लेकिन संविधान पीठ ने पूछा कि क्या राज्यों को मिला ये अधिकार, केंद्र सरकार द्वारा टैक्स को निर्धारित करने से रोकता है और क्या इससे खनिज विकास प्रभावित हो सकता है। 

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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय संविधान पीठ खनिज और खनन पर रॉयल्टी, टैक्स है या नहीं, के मुद्दे पर सुनवाई कर रही है। बुधवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने खनिज प्रधान राज्यों जैसे झारखंड और ओडिशा से पूछा कि क्या खनिज पर लगे टैक्स को निर्धारित करने का अधिकार देश की संसद के पास है या नहीं। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्ष वाली नौ सदस्यीय पीठ ने कहा कि साल 1989 में सात जजों की संविधान पीठ ने कहा था कि खनिज और खनन पर ली जाने वाली रॉयल्टी, टैक्स होता है।
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कोर्ट ने राज्य सरकारों से पूछे ये सवाल
कोर्ट ने माना कि संविधान के तहत राज्य सरकारें खनिज भूमि पर टैक्स लगा सकती हैं, लेकिन संविधान पीठ ने पूछा कि क्या राज्यों को मिला ये अधिकार, केंद्र सरकार द्वारा टैक्स को निर्धारित करने से रोकता है और क्या इससे खनिज विकास प्रभावित हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 'अगर आप (राज्य सरकारें) संविधान में मिले अधिकार के तहत खनिज भूमि पर टैक्स लगाते हैं तो क्या इससे संसद को भी संविधान की लिस्ट 1 के तहत अधिकार नहीं मिल जाएगा कि वे भी अपने अधिकार का इस्तेमाल करें और टैक्स को निर्धारित करें।' खनिज पर टैक्स मामले पर सुनवाई कर रही पीठ में मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ के अलावा जस्टिस ऋषिकेश रॉय, जस्टिस अभय एस ओका, जस्टिस बीवी नागरत्ना, जस्टिस जेबी पारदीवाला, जस्टिस मनोज मिश्रा, जस्टिस उज्जल भुयन, जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह शामिल हैं। 
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86 याचिकाओं पर सुनवाई कर रही संविधान पीठ
वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी, झारखंड और ओडिशा सरकार की तरफ से पेश हुए और सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा कि संविधान की 49 एंट्री में निर्धारण वाली बात नहीं है, लेकिन कुछ पाबंदियां लगाई जा सकती हैं। राकेश द्विवेदी ने कहा कि राज्य सरकार के पास सभी तरह की जमीन पर टैक्स लगाने का अधिकार है। झारखंड के मामले में उन्होंने कहा कि टैक्स 1.50 रुपये प्रति एकड़ से ज्यादा नहीं होगा और ये सभी तरह की जमीन पर लगेगा। खनिज भूमि पर मिलने वाली रॉयल्टी, टैक्स है या नहीं, इसे लेकर स्पष्टता नहीं है। ऐसे में राज्य सरकारों का तर्क है कि उन्हें टैक्स का भारी नुकसान हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ 86 याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है, जो विभिन्न खनन कंपनियों, सरकारी कंपनियों और राज्य सरकारों ने दायर की हैं। इन याचिकाओं में विभिन्न हाईकोर्ट्स के फैसलों पर सवाल उठाए गए हैं।
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