अनिल घनवट का सीजेआई को पत्र: सार्वजनिक की जाए कृषि कानूनों पर रिपोर्ट, सिफारिशों से होगा किसानों को लाभ
केंद्र सरकार की ओर से लाए गए तीन कृषि कानूनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त पैनल के सदस्यों में से एक ने पैनल की रिपोर्ट के जल्द से जल्द सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका कहना है कि कानून वापस लेने के फैसले से रिपोर्ट का भले ही कोई महत्व न रह गया हो लेकिन इसकी सिफारिशें काफी अहम हैं।
विस्तार
कृषि कानूनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त किए गए पैनल के सदस्यों में से एक अनिल घनवट ने मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश एनवी रमण को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में घनवट ने अनुरोध किया है कि तीन कृषि कानूनों पर रिपोर्ट को जल्द से जल्द जारी करने पर विचार करें या फिर अधिकृत समिति को ऐसा करने का निर्देश दें।
अपने इस पत्र में उन्होंने लिखा कि केंद्र सरकार की ओर से संसद के आगामी शीत सत्र में इन तीनों कानूनों को वापस लेने का फैसला किया गया है तो अब इस रिपोर्ट का कोई मतलब नहीं है। लेकिन, इस रिपोर्ट में जो सिफारिशें दी गई हैं वह बड़े सार्वजनिक हित की हैं। यह रिपोर्ट उन किसानों को सही राह दिखा सकती है जिन्हें कुछ नेताओं ने गुमराह किया है।
घनवट ने कहा कि हम कृषि सुधारों की मांग के साथ अगले कुछ महीनों में एक लाख किसानों को लेकर दिल्ली पहुंचेंगे। घनवट शेतकारी संगठन के वरिष्ठ नेता भी हैं। उल्लेखनीय है कि कृषि कानूनों पर तीन सदस्यीय पैनल ने अपनी रिपोर्ट 19 मार्च को सुप्रीम कोर्ट के पास जमा कर दी थी। लेकिन अब तक इस रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है।
कृषि कानूनों को वापस लेने का फैसला दुर्भाग्यपूर्ण: घनवट
एक दिन पहले ही घनवट ने केंद्र सरकार की ओर से तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया था। उन्होंने सोमवार को कहा था कि किसान 40 सालों से कृषि सुधारों की मांग कर रहे थे। कानून वापस लेना अच्छा कदम नहीं है। घनवट ने कहा था कि मौजूदा कृषि प्रणाली उचित और पर्याप्त नहीं है।
उन्होंने कहा था कि मैं सोचता हूं कि इस सरकार में कृषि सुधारों को लेकर इच्छाशक्ति है। इससे पहले की सरकारों में इस लेकर राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं थी। मैं उम्मीद करता हूं कि तीनों कृषि कानूनों पर विचार के लिए सभी राज्यों के विपक्षी और किसान नेताओं को शामिल करते हुए एक और समिति का गठन किया जाएगा।
समिति ने तीनों कानूनों का अध्ययन करने व उससे संबंधित पक्षकारों से परामर्श के बाद 19 मार्च को अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी थी। घनवट ने एक सितंबर को भी मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर आग्रह किया था कि वे इसे जनता के बीच जारी करें, इसकी सिफारिशों से किसान आंदोलन खत्म कराने में मदद मिलेगी।