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सुप्रीम कोर्ट: आम्रपाली घर खरीदारों ने शीर्ष अदलत में आवास परियोजनाओं के गुणवत्ता के मुद्दों को उठाया, जानें पूरा मामला
Mon, 21 Feb 2022 09:58 PM IST
अभिषेक दीक्षित
राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Mon, 21 Feb 2022 09:58 PM IST
सार
आम्रपाली हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के घर खरीदारों की ओर से पेश वकील एमएल लाहौटी ने जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की पीठ के समक्ष आम्रपाली परियोजनाओं में रिपोर्ट की गई गुणवत्ता के मुद्दों का हवाला देते हुए एनबीसीसी की ग्रीन व्यू सोसाइटी में प्रमुख संरचनात्मक खामियां हैं।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
आम्रपाली घर खरीदारों ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में उस आवास परियोजनाओं के गुणवत्ता के मुद्दों को उठाया, जहां राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम (एनबीसीसी) परियोजना प्रबंधन सलाहकार है। सुनवाई के दौरान खरीदारों के वकील ने शीर्ष अदालत से एनबीसीसी द्वारा गुरुग्राम के सेक्टर 37-डी स्थित ग्रीन व्यू सोसाइटी के निर्माण के मसले पर गौर करने का आग्रह किया। इस सोसाइटी के पूरा होने के सिर्फ चार साल बाद इसे निवासियों के लिए असुरक्षित घोषित किया गया है।
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आम्रपाली हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के घर खरीदारों की ओर से पेश वकील एमएल लाहौटी ने जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की पीठ के समक्ष आम्रपाली परियोजनाओं में रिपोर्ट की गई गुणवत्ता के मुद्दों का हवाला देते हुए एनबीसीसी की ग्रीन व्यू सोसाइटी में प्रमुख संरचनात्मक खामियां हैं। इसमें 650 से अधिक आवास इकाइयां हैं। लाहौटी ने इस मामले पर शीर्ष अदालत से संज्ञान लेने का आग्रह किया है।
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मालूम हो कि एनबीसीसी, आम्रपाली परियोजनाओं के लिए परियोजना प्रबंधन सलाहकार है और काम की गुणवत्ता और समय पर पूरा करने की जिम्मेदारी उस पर है। पीठ ने कहा कि कई निवासियों को ठेकेदारों द्वारा किए गए काम की गुणवत्ता के साथ-साथ एनबीसीसी की देखरेख में पूरी की गई परियोजनाओं के साथ भी समस्याएं हैं। पीठ ने कोर्ट रिसीवर वरिष्ठ वकील आर वेंकटरमनी को विवरण देखने के लिए कहा है। साथ ही कहा कि एनबीसीसी को भी मामले की जांच करनी चाहिए।
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एनबीसीसी का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने शीर्ष अदालत को सूचित किया कि उनके मुवक्किल ने गुणवत्ता के मुद्दों की जांच के लिए दो बाहरी एजेंसियों- एनआईटी नागपुर और आईएमटी जालंधर को नियुक्त किया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि आम्रपाली आवास परियोजनाओं में एनबीसीसी द्वारा किया गया निर्माण अच्छी गुणवत्ता का है।
कुछ आम्रपाली घर खरीदारों के वकील कुमार मिहिर ने कहा कि घर खरीदारों के लिए संरचनात्मक सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा है और एनबीसीसी ग्रीन व्यू के बारे में ताजा खबर ने उनके बीच गंभीर चिंता पैदा कर दी है। उन्होंने कहा, 'शुक्र है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस पर ध्यान दिया और एनबीसीसी द्वारा नियुक्त बाहरी एजेंसियां सभी भवनों की संरचनात्मक ताकत पर अपनी रिपोर्ट देंगी तो एनबीसीसी द्वारा शीर्ष अदालत के मार्गदर्शन में उपयुक्त उपाय किए जाएंगे।
इस महीने की शुरुआत में गुरुग्राम के चिंतेल्स पारादीसो में एक इमारत आंशिक रूप से गिर गई थी, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी। और इस घटना के कुछ दिनों बाद सेक्टर-37-डी में स्थित एनबीसीसी ग्रीन व्यू सोसाइटी को निवासियों के लिए असुरक्षित घोषित कर दिया गया था। 17 फरवरी को उपायुक्त ने एनबीसीसी ग्रीन व्यू के निवासियों को निर्देश दिया कि वे एक मार्च तक घर खाली कर दें। अधिकारियों ने एनबीसीसी को मरम्म्त कार्य पूरा होने तक निवासियों को वैकल्पिक आवास प्रदान करने का निर्देश दिया है।
आम्रपाली प्रोजेक्ट के लिए बैंकों की फंडिंग 15 मार्च से
- सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बैंकों से आम्रपाली की अधूरी पड़ी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए 15 मार्च तक फंडिंग शुरू करने के लिए कहा है। वहीं फ्लैट खरीदारों की ओर से पेश के वकील ने कहा कि परियोजनाओं का काम न रुके, इसके लिए 300 करोड़ रुपए जल्द से जल्द रिलीज करने की जरूरत है।
- सुनवाई के दौरान कोर्ट रिसीवर ने जस्टिस यूयू ललित की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि बैंक सैद्धांतित तौर पर फंडिंग के लिए तैयार हो गया है लेकिन अभी तक फंडिंग शुरू नहीं हुआ है। इस कारण प्रोजेक्ट में परेशानी हो रही है। बैंकों के कंसोर्टियम के साथ कई दौर की बातचीत हो चुकी है। एक हफ्ते में बैंकों के प्रस्तावों को अंतिम रूप दिया जाए और उसके अगले हफ्ते यानी 15 मार्च तक फंड रिलीज होना चाहिए।