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अनुच्छेद 370 को चुनौती देने वाली जनहित याचिका की सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- जल्द देखेंगे

Wed, 10 Jul 2019 11:43 AM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Priyesh Mishra Updated Wed, 10 Jul 2019 11:43 AM IST
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Supreme Court agrees for listing of PIL challenging validity of Article 370 of Constitution.
अनुच्छेद 370 - फोटो : अमर उजाला
संविधान के अनुच्छेद 370 को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले को हम जल्द देखेंगे। हालांकि इस मामले की सुनवाई के लिए कोई तिथि निश्चित नहीं हुई है। संविधान का यह अनुच्छेद जम्मू और कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा प्रदान करता है।
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अनुच्छेद 370 छब्बीस नवंबर, 1949 को अस्तित्व में आया था, जिसे संविधान सभा ने संविधान का हिस्सा बनाया था। अनुच्छेद 35 ए भी इससे जुड़ा हुआ है और यह जम्मू-कश्मीर राज्य में इसके नियत सांविधानिक रूप के तहत जनसांख्यिकी को संरक्षित करता है। 
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ऐसे लागू हुआ था अनुच्छेद 370


1947 में अंग्रेजों से आजादी के बाद छोटी-छोटी रियासतों को भारतीय संघ में शामिल किया गया। जम्मू-कश्मीर को भारत के संघ में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू करने के पहले ही पाकिस्तान समर्थित कबिलाइयों ने उस पर आक्रमण कर दिया। उस समय कश्मीर के राजा हरि सिंह थे, जिन्होंने कश्मीर के भारत में विलय का प्रस्ताव रखा। 

तब इतना समय नहीं था कि कश्मीर का भारत में विलय करने की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी की जा सके। हालात को देखते हुए भारतीय संविधान सभा के अध्यक्ष रहे एन गोपाल स्वामी आयंगर ने संघीय संविधान सभा में 306-ए प्रस्तुत किया, जो बाद में 370 बना। इस तरह से जम्मू-कश्मीर को भारत के अन्य राज्यों से अलग अधिकार मिल गए। 

जम्मू-कश्मीर का अलग झंडा है। भारत के अन्य राज्यों के लोग जम्मू कश्मीर में जमीन नहीं खरीद सकते हैं। वित्तीय आपातकाल लगाने वाली अनुच्छेद 360 भी जम्मू कश्मीर पर लागू नहीं होती। 

भारत की संसद जम्मू-कश्मीर में रक्षा, विदेश मामले और संचार के अलावा कोई अन्य कानून नहीं बना सकती। यहां धारा 356 लागू नहीं होती, राष्ट्रपति के पास राज्य के संविधान को बर्खास्त करने का अधिकार नहीं है।

भारत के संघ सूची के सभी कानून यहां लागू नहीं होते

भारतीय संविधान के भाग 21 के तहत जम्मू और कश्मीर को यह अस्थाई, परिवर्ती और विशेष प्रबंध वाले राज्य का दर्जा हासिल होता है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 370 एक 'अस्थायी प्रबंध' के जरिए जम्मू और कश्मीर को एक विशेष स्वायत्तता वाला राज्य का दर्जा देता है। 

भारत के सभी राज्यों में लागू होने वाले कानून भी इस राज्य में लागू नहीं होते हैं। 1965 तक जम्मू और कश्मीर में राज्यपाल की जगह सदर-ए-रियासत और मुख्यमंत्री की जगह प्रधानमंत्री हुआ करता था।

संविधान के अनुच्छेद 370 के प्रावधानों के अनुसार संसद को जम्मू-कश्मीर के बारे में रक्षा, विदेश मामले और संचार के विषय में कानून बनाने का अधिकार है लेकिन किसी अन्य विषय से संबंधित कानून को लागू कराने के लिए केंद्र को राज्य सरकार का अनुमोदन चाहिए।

जम्मू-कश्मीर के लिए यह प्रबंध शेख अब्दुल्ला ने वर्ष 1947 में किया था। महाराज हरि सिंह और पंडित जवाहर लाल नेहरू ने शेख अब्दुल्ला को राज्य का प्रधानमंत्री नियुक्त किया था। तब शेख अब्दुल्ला ने अनुच्छेद 370 को लेकर यह दलील दी थी कि संविधान में इसका प्रबंध अस्थाई रूप में ना किया जाए, बल्कि इसे स्थाई बनाया जाए।
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