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सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: जब तक चार्जशीट न दाखिल हो, दुष्कर्म पीड़िता के बयान का नहीं होना चाहिए खुलासा
Sat, 05 Nov 2022 03:06 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sat, 05 Nov 2022 03:06 PM IST
सार
सर्वोच्च न्यायालय ने देशभर के हाईकोर्ट्स को यह निर्देश दिया कि वह ऐसे मामलों से जुड़े सुनवाई के नियमों में बदलाव या संशोधन करें।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्म पीड़िताओं की पहचान और बयान गोपनीय रखने को लेकर अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि जब तक दुष्कर्म के मामले में चार्जशीट या अंतिम रिपोर्ट दाखिल न हो, तब तक सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दुष्कर्म पीड़िता के बयान का खुलासा किसी के सामने नहीं होना चाहिए।
चीफ जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस बेला त्रिवेदी की बेंच ने अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। सर्वोच्च न्यायालय ने देशभर के हाईकोर्ट्स को यह निर्देश दिया कि वह ऐसे मामलों से जुड़े सुनवाई के नियमों में बदलाव या संशोधन करें।
अवमानना याचिका दायर करने वाले याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि सीआरपीसी की धारा 164 के तहत लिया गया उसकी बेटी का बयान दुष्कर्म मामले के आरोपी को ही दे दिया गया। इस मामले में कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मामले में अवमानना की कार्यवाही शुरू नहीं की।
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चीफ जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस बेला त्रिवेदी की बेंच ने अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। सर्वोच्च न्यायालय ने देशभर के हाईकोर्ट्स को यह निर्देश दिया कि वह ऐसे मामलों से जुड़े सुनवाई के नियमों में बदलाव या संशोधन करें।
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अवमानना याचिका दायर करने वाले याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि सीआरपीसी की धारा 164 के तहत लिया गया उसकी बेटी का बयान दुष्कर्म मामले के आरोपी को ही दे दिया गया। इस मामले में कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मामले में अवमानना की कार्यवाही शुरू नहीं की।
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