फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Sugar mills subsidy fail to export

निर्यात करने में असफल रही चीनी मिलों की सब्सिडी बंद, 9,471 करोड़ रुपये है गन्ना किसानों का बकाया

Fri, 04 Jan 2019 03:29 AM IST
Avdhesh Kumar पीयूष पांडेय, नई दिल्ली
पीयूष पांडेय, नई दिल्ली Published by: Avdhesh Kumar Updated Fri, 04 Jan 2019 03:29 AM IST
विज्ञापन
Sugar mills subsidy fail to export
चीनी मिल
अनिवार्य निर्यात के जरिए गन्ना किसानों को राहत देने की कोशिश को नाकाम करने वाली चीनी मिलों को सबक सिखाने के लिए केंद्र सरकार ने तय किया है कि वह निर्यात नहीं करने वाली चीनी मिलों को अब बफर स्टॉक बनाने के लिए सब्सिडी नहीं मुहैया कराएगी। मौजूदा चीनी (अक्तूबर 2018-सितंबर 2019) सत्र में चीनी मिलों के लिए सालाना 50 लाख टन निर्यात का लक्ष्य तय किया गया है।
विज्ञापन


उपभोक्ता एवं खाद्य मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आदेश के मुताबिक अनिवार्य निर्यात में असफल रही चीनी मिलों को सरकार द्वारा बफर स्टॉक पर सब्सिडी नहीं मुहैया कराई जाएगी। गत वर्ष चीनी की गिरती कीमतों को थामने के लिए सरकार ने 30 लाख टन बफर स्टॉक बनाने का फैसला लिया था। मंत्रिमंडल ने एक वर्ष के लिए 30 लाख टन बफर स्टॉक पर 11.75 अरब रुपये के प्रावधान को मंजूरी दी थी। लेकिन अब सरकार ने चीनी भंडारण पर सब्सिडी देने के लिए अनिवार्य निर्यात की शर्त रख दी है।
विज्ञापन


ट्रांसपोर्टेशन सब्सिडी के बावजूद यूपी की मिलें पीछे

निर्यात के लिए प्रोत्साहन दिए जाने के बावजूद चीनी मिलों ने अक्तूबर-दिसंबर, 2018 की तिमाही में महज छह लाख टन चीनी निर्यात का अनुबंध किया है और करीब 1.79 लाख टन चीनी निर्यात किया है। इसके अलावा दिसंबर 2018 को समाप्त होने वाली तिमाही में लदाई के लिए विभिन्न बंदरगाहों पर लगभग 80,000 टन चीनी जमा है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


इस प्रकार अक्तूबर-दिसंबर, 2018 तिमाही का कुल निर्यात मात्र 2.6 लाख टन बैठता है, जबकि तिमाही रूप से औसत लक्ष्य 12.5 लाख टन का है। हाल ही में सरकार ने इस मामले में मिलो को चेतावनी भी दी थी। निर्यात में सबसे कमजोर यूपी की चीनी मिलें रही हैं जिन्हें सरकार निर्यात पर ट्रांसपोर्टेशन सब्सिडी दे रही थी। इसके बावजूद सूबे की मिलें दूसरे देश चीनी भेजने का लक्ष्य नहीं पूरा कर सकीं।
 

275 रुपये दिया गया था एफआरपी

किसानों को राहत देने की तमाम कोशिशों के बावजूद बकाया भुगतान चुकता नहीं होने के कारण केंद्र द्वारा यह कदम उठाया गया है। नया पिराई सीजन शुरू हो चुका है, लेकिन गन्ना किसानों का पिछले सीजनों का 9,471 करोड़ रुपये बकाया है। उल्लेखनीय है कि सरकार ने गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) 20 रुपये से बढ़ाकर 275 रुपये दिया था। साथ ही चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 29 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित किया गया था। इसके अलावा चीनी निर्यात में भी मिलों को छूट मुहैया कराई गई थी। 

सरकार चीन, बांग्लादेश, मलयेशिया, दक्षिण कोरिया जैसे देशों में निर्यात की संभावनाएं भी तलाश रही हैं। गन्ना सीजन 2017-18 के एफआरपी पर गन्ने का बकाया 1,924 करोड़ रुपये है। वहीं, समान अवधि का राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) 5,465 करोड़ रुपये बकाया है। इसके अलावा 2,082 करोड़ रुपये भी बकाया है। इन तीनों को जोड़कर कुल बकाया 9,471 करोड़ रुपये गन्ना किसानों का होता है।

37,700 करोड़ था मई में बकाया

मई में गन्ना किसानों का बकाया 37,700 करोड़ रुपये था। ऐसे में एक चौथाई बकाया अभी शेष है जो सरकार की तमाम कोशिशों और उपायों के बावजूद चुकाया नहीं जा सका। उल्लेखनीय है कि बकाए के मद्देनजर ही केंद्रीय कैबिनेट ने चीनी मिलों पर किसानों के भारी बकाया की राशि के मद्देनजर प्रति टन 55 रूपये की आर्थिक सहायता मुहैया कराने को अनुमति दी थी। गौरतलब है कि पिछले सीजन में सर्वाधिक बकाया उत्तर प्रदेश के किसानों का था। इसके बाद कर्नाटक एवं महाराष्ट्र के किसानों का बकाया सर्वाधिक था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed