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कोरोना से जंग: वायरस के कई स्वरूप को रोकने वाली दवा का चूहों पर सफल परीक्षण
Tue, 01 Jun 2021 07:54 AM IST
देव कश्यप
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Tue, 01 Jun 2021 07:54 AM IST
सार
कोरोना महामारी से निपटने के लिए एक नई दवा की पहचान की गई है जो कोरोना संक्रमण को रोकने में काफी प्रभावी है।
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कोरोना की दवा (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कोरोना महामारी से निपटने के लिए नए-नए टीकों के साथ ही कई प्रकार की दवाओं की खोज पर काम चल रहा है। ऐसी ही एक दवा की पहचान की गई है जो कोरोना संक्रमण को रोकने में काफी प्रभावी है। चूहों पर इस दवा का परीक्षण सफल रहा। इसके साथ ही इस दवा से श्वसन संबंधी अन्य कोरोना वायरस बीमारी का भी इलाज किया जा सकता है।
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साइंस इम्युनोलॉजी में छपे शोध के मुताबिक, दवा डाईएबीजेडआई (DIABZI) शरीर की प्रतिरक्षा प्रक्रिया को सक्रिय करती है। पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय की प्रोफेसर और अनुसंधान की प्रमुख सारा चेरी ने कहा कि इस दवा की एकल खुराक से कोरोना वायरस के साथ ही वायरस के दक्षिणी अफ्रीकी स्वरूप बी.1.351 को रोका जा सकता है।
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कोविड-19 के लिए नया डीएनए टीका चूहों पर प्रभावी पाया गया
ताइवान में वैज्ञानिकों ने डीएनए पर आधारित कोविड-19 रोधी टीका बनाया है जो चूहे तथा हैम्स्टर में कोरोना वायरस के खिलाफ लंबे समय तक रहने वाली एंटीबॉडी बनाने में सफल पाया गया है।
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अभी उपलब्ध कुछ कोविड-19 टीके सार्स-सीओवी-2 विषाणु का पता लगाने के लिए मानव प्रतिरक्षा प्रणाली में राइबोज न्यूक्लिक एसिड (आरएनए) या एमआरएनए पर निर्भर रहता है। हैमस्टर चूहे के जैसा ही जानवर होता है।
ज्यादातर विषाणुओं में आनुवंशिक सामग्री के रूप में आरएनए या डीएनए रहता है। सार्स-सीओवी-2 विषाणु में आनुवंशिक सामग्री के तौर पर आरएनए है।
पत्रिका ‘पीएलओएस नेगलेक्टेड ट्रॉपिकल डिसीज’ में प्रकाशित नया अध्ययन एक ऐसा टीका विकसित होने के बारे में संभावना जताता है कि जिसमें मानव कोशिशकाओं में घुसने और संक्रमित करने के लिए जिम्मेदार वायरस में मौजूद डीएनए का इस्तेमाल किया गया है।
अनुसंधानकर्ताओं ने बताया कि हाल के क्लिनिकल ट्रायल से पता चला कि डीएनए टीके एचआईवी-1, जीका वायरस, इबोला वायरस और इंफ्लुएंजा जैसे वायरसों समेत अन्य संक्रमणों के इलाज में सुरक्षित और प्रभावी हैं।
अनुसंधानकर्ताओं ने दिखाया कि जिन चूहे और हैमस्टर को नया डीएनए टीका लगाया गया उनमें सार्स सीओवी-2 के खिलाफ लंबे समय तक एंटीबॉडी रही। उन्होंने बताया कि ये एंटीबॉडी टीका लगने के आठ हफ्तों बाद सबसे अधिक बनती हैं।