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सुभाष चंद्र बोस: नेताजी का वादा भूली सरकार, आजाद हिंद फौज को शरण देने वाले इस गांव में नहीं बजेगा मोबाइल

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Tue, 26 Sep 2023 06:25 PM IST
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सार
बनारस की सुभाष संस्था के पदाधिकारी तमाल सान्याल ने कहा, केंद्र सरकार ने नेताजी के वादे को भुला दिया है। आजादी मिलने के दशकों बाद भी 900 घरों वाला 'रुजाजो' गांव न तो हैरिटेज स्थलों की सूची में जगह पा सका और न ही 'नेताजी' के भरोसे की किसी ने सुध लेने की कोशिश की...
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Subhash Chandra Bose: Government will not install mobile tower in Ruzazho village nagaland
Ruzazho village, Nagaland - फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar

विस्तार

नागालैंड स्थित 'रुजाजो' गांव के लोगों ने ब्रिटिश शासनकाल में नेताजी सुभाष चंद्र बोस और उनकी आजाद हिंद फौज को शरण दी थी। लोगों ने नेताजी की पूरी मदद की। भले ही उनके पास खाने को पर्याप्त राशन नहीं था, लेकिन उन्होंने 'आजाद हिंद फौज' को भरपेट खाना खिलाया। जब नेताजी यहां से जाने लगे तो उन्होंने इस गांव को गोद लेने की बात कही थी। लोगों को यह विश्वास हुआ था कि नेताजी उनके गांव की तकदीर बदलने की बात कह कर गए हैं, तो वह जरूर बदलेगी। देश को आजादी मिली, विकास के नए आयाम हासिल हुए, मगर नागालैंड के 'रुजाजो' गांव में कुछ नहीं बदला। गांव में मोबाइल फोन सेवा के लिए एक टावर तक नहीं लग सका।

टावर लगाने का कोई प्रपोजल ही नहीं

बनारस की सुभाष संस्था के पदाधिकारी तमाल सान्याल ने कहा, केंद्र सरकार ने नेताजी के वादे को भुला दिया है। आजादी मिलने के दशकों बाद भी 900 घरों वाला 'रुजाजो' गांव न तो हैरिटेज स्थलों की सूची में जगह पा सका और न ही 'नेताजी' के भरोसे की किसी ने सुध लेने की कोशिश की। अब बीएसएनएल ने आरटीआई के जवाब में साफ कर दिया है कि 'रुजाजो' गांव में मोबाइल टावर लगाने का कोई प्रपोजल ही नहीं है।

सर्वे, जमीन मिलना और टेंडर, ये सब क्या था

तमाल सान्याल के मुताबिक, 'रुजाजो' गांव के लोगों ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के आश्वासन के बाद कई तरह के सपने देखे थे। उन्हें यकीन था कि आजादी के बाद यहां की तस्वीर बदल जाएगी। बच्चों के लिए अच्छा स्कूल होगा। लोगों को स्वच्छ पेयजल मिलेगा। चावल निकालने के लिए मिल या कारखाना लग जाएगा। नेताजी ने जाते वक्त कहा था कि आप चिंता न करें, मुझे यह गांव सदैव याद रहेगा। अब हालात ऐसे हैं कि लोगों को मोबाइल फोन पर बातचीत करने के लिए दूसरे गांव में जाना पड़ता है। मोबाइल टावर लगाने के लिए नागालैंड प्रशासन से बात की गई। बीएसएनएल को मांग पत्र सौंपा गया। करीब तीन वर्ष पहले दीमापुर में बीएसएनएल अधिकारियों ने बताया था कि यहां टावर लगाने के लिए सर्वे हुआ है। जमीन मिल गई है और टेंडर भी जारी हो गया। दो टावर लगाने की बात हुई थी, मगर अभी तक एक भी नहीं लग सका है। अब तो बीएसएनएल ने यहां पर टावर लगाने का कोई प्रपोजल होने से ही इनकार कर दिया है।

1.64 लाख करोड़ रुपये के पैकेज से थी उम्मीद

तमाल सान्याल कहते हैं, बीएसएनएल ने पहले फंड न होने की बात कही थी। 4जी नेटवर्क का हवाला दिया था। पिछले साल मोदी सरकार ने बीएसएनएल की रिस्ट्रक्चरिंग के लिए 1.64 लाख करोड़ रुपये का पैकेज दिया था। तब यहां के लोगों को उम्मीद बंधी थी कि अब उनके गांव में भी एक मोबाइल टावर लग जाएगा। जहां देश के दूसरे हिस्सों में 5जी तकनीक आ गई है, तो कम से कम इस गांव में 4जी की क्षमता वाला मोबाइल टावर ही लग जाए। सान्याल ने मोबाइल टावर लगाने का मुद्दा, प्रधानमंत्री कार्यालय के समक्ष भी मुद्दा उठाया था। तब बीएसएनएल ने टावर लगाने के लिए फंड नहीं होने की बात कही। हालांकि उन्होंने यह भी लिखा था कि जब नागालैंड में 4जी तकनीक के उपकरण लगेंगे, तो इस गांव पर विचार किया जाएगा। इसके बाद बीएसएनएल में नई जान फूंकने के लिए सरकार ने 1.64 लाख करोड़ रुपये मंजूर किए थे, मगर 'रुजाजो' के हिस्से एक टावर नहीं आ सका।   

पत्थरों के बीच ऊंचाई वाली जगह पर बैठते थे नेताजी

नेताजी अपनी फौज के साथ रुजाजो के निकटवर्ती गांव जेसामी में पहुंचे थे। बाद में वे रुजाजो आ गए। उस वक्त लड़ाई चल रही थी। ब्रिटिश आर्मी के सैनिक लगातार बमबारी कर रहे थे। तमाल सान्याल, जिन्होंने इस गांव में मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने के लिए नागालैंड प्रशासन के साथ कई बार पत्राचार किया है, साथ ही उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री कार्यालय तक को चिट्ठी लिखी। वे बताते हैं कि 1944 में सुभाष चंद्र बोस और उनकी सेना नौ दिन तक इस गांव में रही थी। सौ वर्ष से ज्यादा आयु के बपोसूयुवी स्वोरो ने सान्याल के साथ 'नेताजी' से जुड़ी कुछ यादें साझा की थीं। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सुभाष चंद्र बोस ने अस्थायी तौर पर इस गांव को अपना मुख्यालय बना लिया था। वे गांव में पत्थरों के बीच ऊंचाई वाली जगह पर आजाद हिंद फौज के अफसरों के साथ बैठक करते थे।

पेट भरने के लिए केवल चावल ही था

ब्रिटिश आर्मी लगातार नेताजी पर नजर रख रही थी। दुश्मन का विमान उनकी टोह लेने के लिए गांव के ऊपर मंडराता रहता था। आसपास के इलाके में बमबारी होती रहती थी। नेताजी के साथ हजारों सैनिक भी इसी गांव में रह रहे थे। गांव के लोगों के पास पेट भरने के लिए केवल चावल था। लोगों ने अपने हिस्से का चावल नेताजी को दे दिया। आजाद हिंद फौज के जवानों की संख्या ज्यादा थी तो लोगों ने दिन-रात काम करके चावल निकाला। जब नेताजी यहां से जाने लगे, तो उन्होंने इस गांव को गोद लेने की बात कही थी। 'रुजाजो' गांव आज भी उनका इंतजार कर रहा है। मोबाइल टावर के लिए फर्स्ट अपील अंडर आरटीआई एक्ट-2005 के तहत जो सूचना मिली है, उसमें नागालैंड बीएसएनएल सर्कल के जीएम ने लिखा, ऐसा कोई प्रपोजल ही नहीं है। आरटीआई में कई सवाल पूछे गए थे, जिनमें मोबाइल टावर लगाने की मौजूदा स्थिति की जानकारी देना भी शामिल है। इस संबंध में बीएसएनएल की तरफ से कहा गया कि रुजाजो गांव में मोबाइल टावर लगाने का कोई प्रपोजल नहीं है। आरटीआई में यह भी पूछा गया था कि वहां के लिए 4जी उपकरण लिया गया है तो इसका कोई जवाब नहीं मिला। 

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