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महाराष्ट्र: स्पेशल 26 की तर्ज पर मुंबई में फर्जी इनकम टैक्स की छापेमारी; एक करोड़ की उगाही मांगी, छह गिरफ्तार
सार
मुंबई के अंधेरी में नौ आरोपियों ने इनकम टैक्स और क्राइम ब्रांच अधिकारी बनकर एक दफ्तर में फर्जी छापा मारा। लोगों के मोबाइल जब्त कर उन्हें बंधक बनाया और झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर एक करोड़ रुपये मांगे। अंधेरी पुलिस ने तकनीकी जांच के आधार पर तीन महिलाओं समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
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मुंबई में फर्जी इनकम टैक्स की छापेमारी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
मुंबई में बॉलीवुड की चर्चित फिल्म ‘स्पेशल 26’ की तर्ज पर फर्जी सरकारी अधिकारी बनकर एक दफ्तर में छापा मारने और वहां मौजूद लोगों को डराकर एक करोड़ रुपये मांगने का मामला सामने आया है। आरोपियों ने खुद को इनकम टैक्स विभाग और क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया और फर्जी पहचान पत्र दिखाकर दफ्तर में दाखिल हुए। इसके बाद उन्होंने दफ्तर में मौजूद लोगों के मोबाइल फोन छीन लिए और सभी को बंधक बनाकर झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी। मामला यहीं नहीं रुका। आरोपियों ने इस छापे की कार्रवाई से बचाने के नाम पर एक करोड़ रुपये की उगाही मांग डाली। अंधेरी पुलिस ने टेक्निकल इन्वेस्टीगेशन के आधार पर तीन महिलाओं समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अब गिरोह के बाकी फरार सदस्यों की तलाश कर रही है।
डीसीपी दत्ता नलावड़े ने बताया कि अंधेरी पुलिस स्टेशन में 49 वर्षीय राजकुमार कंडासामी ने इस मामले की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के मुताबिक, उनके दफ्तर में अचानक छह पुरुष और तीन महिलाएं जबरन दाखिल हो गए। इन लोगों ने खुद को इनकम टैक्स विभाग और क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताते हुए फर्जी सरकारी पहचान पत्र भी दिखाए। उनके हावभाव और बातचीत का तरीका ऐसा था कि वहां मौजूद लोगों को शुरुआत में उनके असली होने का भरोसा हो गया।
दफ्तर में घुसते ही आरोपियों ने वहां मौजूद लोगों पर अपना रुतबा दिखाना शुरू कर दिया। उन्होंने शिकायतकर्ता राजकुमार कंडासामी, उनकी पत्नी और दफ्तर में काम करने वाले करीब 10 कर्मचारियों के मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिए। आरोपियों का मकसद साफ था कि वहां मौजूद कोई भी व्यक्ति बाहर किसी से संपर्क न कर सके और पुलिस को सूचना न दी जा सके। इसके बाद उन्होंने सभी लोगों को दफ्तर के अंदर ही रोक दिया और किसी को बाहर जाने की अनुमति नहीं दी।
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फर्जी अधिकारियों ने इसके बाद लोगों को डराना-धमकाना शुरू किया। उन्होंने दावा किया कि दफ्तर में गैरकानूनी गतिविधियां चल रही हैं और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आरोपियों ने झूठे मामलों में फंसाने का डर दिखाया और गाली-गलौज भी की। कुछ देर तक इसी तरह दहशत का माहौल बनाने के बाद आरोपियों ने अपने फर्जी छापे का असली मकसद सामने रखा। उन्होंने कहा कि अगर इस कानूनी कार्रवाई से बचना है तो उन्हें एक करोड़ रुपये देने होंगे।
अचानक दफ्तर में घुसकर इस तरह धमकाए जाने से शिकायतकर्ता और वहां मौजूद कर्मचारी बुरी तरह घबरा गए। हालांकि, राजकुमार कंडासामी ने हिम्मत दिखाई और पुलिस को फोन कर दिया। आरोपी तब भाग गए। बाद में उन्होंने पुलिस को विस्तार से जानकारी दी। उनकी शिकायत के आधार पर अंधेरी पुलिस ने नौ अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने सबसे पहले घटनास्थल और उसके आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। इसके साथ ही आरोपियों के आने-जाने के रास्ते और उनकी गतिविधियों से जुड़े दूसरे तकनीकी सुराग भी जुटाए गए।
पुलिस ने इन सुरागों के आधार पर कार्रवाई करते हुए गिरोह के छह सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 37 वर्षीय संतोष उदय खोपटकर, 37 वर्षीय विनय रमेश मोरे, 50 वर्षीय प्रेम किसन सबनानी, 27 वर्षीय प्रज्ञा हरीश माईन, 41 वर्षीय रेश्मा शामराव वारंग और 48 वर्षीय सबीना हाफिज शेख के रूप में हुई है। गिरफ्तार आरोपियों में तीन महिलाएं भी शामिल हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह ने इससे पहले भी इसी तरह किसी अन्य व्यक्ति या कारोबारी को निशाना बनाया था या नहीं। साथ ही पुलिस यह भी पता कर रही है कि आरोपियों ने फर्जी पहचान पत्र और सरकारी अधिकारियों की तरह दिखने वाले दूसरे दस्तावेज कहां से तैयार कराए थे। मामले में शामिल तीन अन्य आरोपियों की तलाश भी जारी है।
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डीसीपी दत्ता नलावड़े ने बताया कि अंधेरी पुलिस स्टेशन में 49 वर्षीय राजकुमार कंडासामी ने इस मामले की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के मुताबिक, उनके दफ्तर में अचानक छह पुरुष और तीन महिलाएं जबरन दाखिल हो गए। इन लोगों ने खुद को इनकम टैक्स विभाग और क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताते हुए फर्जी सरकारी पहचान पत्र भी दिखाए। उनके हावभाव और बातचीत का तरीका ऐसा था कि वहां मौजूद लोगों को शुरुआत में उनके असली होने का भरोसा हो गया।
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दफ्तर में घुसते ही आरोपियों ने वहां मौजूद लोगों पर अपना रुतबा दिखाना शुरू कर दिया। उन्होंने शिकायतकर्ता राजकुमार कंडासामी, उनकी पत्नी और दफ्तर में काम करने वाले करीब 10 कर्मचारियों के मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिए। आरोपियों का मकसद साफ था कि वहां मौजूद कोई भी व्यक्ति बाहर किसी से संपर्क न कर सके और पुलिस को सूचना न दी जा सके। इसके बाद उन्होंने सभी लोगों को दफ्तर के अंदर ही रोक दिया और किसी को बाहर जाने की अनुमति नहीं दी।
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फर्जी अधिकारियों ने इसके बाद लोगों को डराना-धमकाना शुरू किया। उन्होंने दावा किया कि दफ्तर में गैरकानूनी गतिविधियां चल रही हैं और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आरोपियों ने झूठे मामलों में फंसाने का डर दिखाया और गाली-गलौज भी की। कुछ देर तक इसी तरह दहशत का माहौल बनाने के बाद आरोपियों ने अपने फर्जी छापे का असली मकसद सामने रखा। उन्होंने कहा कि अगर इस कानूनी कार्रवाई से बचना है तो उन्हें एक करोड़ रुपये देने होंगे।
अचानक दफ्तर में घुसकर इस तरह धमकाए जाने से शिकायतकर्ता और वहां मौजूद कर्मचारी बुरी तरह घबरा गए। हालांकि, राजकुमार कंडासामी ने हिम्मत दिखाई और पुलिस को फोन कर दिया। आरोपी तब भाग गए। बाद में उन्होंने पुलिस को विस्तार से जानकारी दी। उनकी शिकायत के आधार पर अंधेरी पुलिस ने नौ अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने सबसे पहले घटनास्थल और उसके आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। इसके साथ ही आरोपियों के आने-जाने के रास्ते और उनकी गतिविधियों से जुड़े दूसरे तकनीकी सुराग भी जुटाए गए।
पुलिस ने इन सुरागों के आधार पर कार्रवाई करते हुए गिरोह के छह सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 37 वर्षीय संतोष उदय खोपटकर, 37 वर्षीय विनय रमेश मोरे, 50 वर्षीय प्रेम किसन सबनानी, 27 वर्षीय प्रज्ञा हरीश माईन, 41 वर्षीय रेश्मा शामराव वारंग और 48 वर्षीय सबीना हाफिज शेख के रूप में हुई है। गिरफ्तार आरोपियों में तीन महिलाएं भी शामिल हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह ने इससे पहले भी इसी तरह किसी अन्य व्यक्ति या कारोबारी को निशाना बनाया था या नहीं। साथ ही पुलिस यह भी पता कर रही है कि आरोपियों ने फर्जी पहचान पत्र और सरकारी अधिकारियों की तरह दिखने वाले दूसरे दस्तावेज कहां से तैयार कराए थे। मामले में शामिल तीन अन्य आरोपियों की तलाश भी जारी है।