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अध्ययन: एकजुटता मानसिक संबल प्रदान करने से जीवन चेतना में मजबूती, ऑक्सफोर्ड के शोधकर्ताओं ने किया ये खुलासा
Fri, 08 Nov 2024 06:00 AM IST
शुभम कुमार
अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क
Published by: शुभम कुमार
Updated Fri, 08 Nov 2024 06:00 AM IST
सार
इंसान, बंदर, हाथी, जंगली भैंसे, बिल्डर बीस्ट, जीब्रा, राजहंस और तोते जैसी सामजिक प्रजातियां, सरीसृप, कीड़ों और मछलियों जैसी एकांतप्रिय प्रजातियों की तुलना में ज्यादा समय तक जीवित रहती हैं। साथ ही इनकी प्रजनन अवधि भी लम्बी होती है।
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मादा जेब्रा ऐश्वर्या
- फोटो : amar ujala
विस्तार
ऑक्सफोर्ड विवि के शोधकर्ताओं के ताजा अध्ययन में इसका खुलासा हुआ है। शोधकर्ताओं ने माना, सामाजिक व्यवहार कई जीवों के लिए एक बुनियादी पहलू है। एक-दूसरे का साथ न सिर्फ उन्हें मानसिक संबल प्रदान करता है बल्कि जीवन चेतना के प्रति भी ज्यादा मजबूत बनाता है। जो प्रजातियां अधिक सामजिक होती हैं वे ज्यादा समय तक सुरक्षित रहती हैं। ये लम्बे समय तक संतान पैदा कर सकती हैं। अध्ययन के नतीजे जर्नल फिलॉसॉफिकल ट्रांजेक्शंस ऑफ द रॉयल सोसाइटी बी में प्रकाशित हुए हैं।
सामाजिक व्यवहार निभाता है अहम भूमिका
शोधकर्ताओं का कहना है कि सामाजिक व्यवहार, उम्र बढ़ने के साथ जीवों की प्रजनन और जीवित रहने की क्षमता में आने वाली कमी को प्रभावित करता है। इस कारण भी समाजिक प्रजातियां लम्बे समय तक जीवित रहती हैं। इसका जीवों के बुढ़ापे पर भी असर पड़ता है। जैसे सामाजिक समूह, जीवों को शिकारियों से बचाते हैं और उन्हें लंबे समय तक जीने में मदद करते हैं, लेकिन समूहों में अपने पद और अन्य वजहों से होने वाले संघर्षों से विपरीत प्रभाव भी पड़ता है।
जैविक एकजुटता सामाजिक संपर्क का एक रूप
अध्ययन के अनुसार, जैविक एकजुटता सामाजिक संपर्क का एक रूप है जो किसी भी वजह से जीवों की एक-दूसरे पर परस्पर निर्भरता के कारण विकसित होता है। जैविक एकजुटता द्वारा परिभाषित सामाजिक प्रजातियों में श्रम विभाजन अत्यधिक महत्वपूर्ण है, जिसमें सभी एक साथ काम करते हैं, लेकिन एक-दूसरे से अलग होते हैं।
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वहीं जैविक एकजुटता जीवों की परस्पर निर्भरता पर निर्मित सामाजिक सामंजस्य का एक रूप है। इस तरह के ताने-बाने में जीवों के अंतर्संबंधों में एक-दूसरे के प्रति निर्भरता उत्पन्न होती है। इस प्रकार सामाजिक एकजुटता विभिन्न जीवन समूहों की परस्पर निर्भरता के कारण बनी रहती है, जो समग्रता का निर्माण करते हैं। यह स्थिति उन्हें लंबे समय तक अस्तित्व में बनाए रखती है।
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सामाजिक व्यवहार निभाता है अहम भूमिका
शोधकर्ताओं का कहना है कि सामाजिक व्यवहार, उम्र बढ़ने के साथ जीवों की प्रजनन और जीवित रहने की क्षमता में आने वाली कमी को प्रभावित करता है। इस कारण भी समाजिक प्रजातियां लम्बे समय तक जीवित रहती हैं। इसका जीवों के बुढ़ापे पर भी असर पड़ता है। जैसे सामाजिक समूह, जीवों को शिकारियों से बचाते हैं और उन्हें लंबे समय तक जीने में मदद करते हैं, लेकिन समूहों में अपने पद और अन्य वजहों से होने वाले संघर्षों से विपरीत प्रभाव भी पड़ता है।
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जैविक एकजुटता सामाजिक संपर्क का एक रूप
अध्ययन के अनुसार, जैविक एकजुटता सामाजिक संपर्क का एक रूप है जो किसी भी वजह से जीवों की एक-दूसरे पर परस्पर निर्भरता के कारण विकसित होता है। जैविक एकजुटता द्वारा परिभाषित सामाजिक प्रजातियों में श्रम विभाजन अत्यधिक महत्वपूर्ण है, जिसमें सभी एक साथ काम करते हैं, लेकिन एक-दूसरे से अलग होते हैं।
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वहीं जैविक एकजुटता जीवों की परस्पर निर्भरता पर निर्मित सामाजिक सामंजस्य का एक रूप है। इस तरह के ताने-बाने में जीवों के अंतर्संबंधों में एक-दूसरे के प्रति निर्भरता उत्पन्न होती है। इस प्रकार सामाजिक एकजुटता विभिन्न जीवन समूहों की परस्पर निर्भरता के कारण बनी रहती है, जो समग्रता का निर्माण करते हैं। यह स्थिति उन्हें लंबे समय तक अस्तित्व में बनाए रखती है।