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जोखिम: संक्रमित किशोरों में बुखार व सीआरपी का बढ़ना खतरनाक, पहली बार भारत में किया गया अध्ययन
Mon, 17 Jan 2022 08:13 AM IST
देव कश्यप
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली।
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली।
Published by: देव कश्यप
Updated Mon, 17 Jan 2022 08:13 AM IST
सार
नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के तीन अलग-अलग विभागों ने मिलकर कोरोना की पहली और दूसरी लहर के दौरान भर्ती हुए संक्रमित किशोरों पर अध्ययन किया है। जिसमें पता चला है कि कोरोना संक्रमित किशोरों में बुखार और सीआरपी (सी रिएक्टिव प्रोटिन) का बढ़ना खतरनाक हो सकता है।
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संक्रमित किशोरों में बुखार व सीआरपी का बढ़ना खतरनाक। (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : PTI
विस्तार
कोरोना का सबसे अधिक जोखिम पहले से बीमार या फिर 60 वर्ष से अधिक आयु वालों में सबसे अधिक है, लेकिन किशोरों में इसका क्या असर है? इसके बारे में अब तक चिकित्सीय तौर पर कोई अध्ययन नहीं हुआ था। अमेरिका, चीन और ब्रिटेन के बाद पहली बार भारत में किशोर रोगियों पर चिकित्सीय अध्ययन हुआ है, जिसमें पता चला है कि कोरोना संक्रमित किशोरों में बुखार और सीआरपी (सी रिएक्टिव प्रोटिन) का बढ़ना खतरनाक हो सकता है।
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नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के तीन अलग-अलग विभागों ने मिलकर कोरोना की पहली और दूसरी लहर के दौरान भर्ती हुए संक्रमित किशोरों पर यह अध्ययन किया है। इसके अनुसार ज्यादातर किशोरों में कोरोना संक्रमण का हल्का असर देखने को मिला या फिर एक भी लक्षण नहीं था, लेकिन डेल्टा वैरिएंट की वजह से किशोरों में लंबे समय तक बुखार व सीआरपी फैक्टर का बढ़ना रोगी की स्थिति गंभीर श्रेणी की ओर जाने का इशारा करती है।
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मेडिकल जर्नल मेडरेक्सिव में प्रकाशित इस अध्ययन में 13 से 17 साल के 196 किशोरों को शामिल किया गया, जिन्हें साल 2020 और 2021 में दिल्ली एम्स और झज्जर स्थित राष्ट्रीय कैंसर संस्थान (एनआईसी) में भर्ती किया गया था। भर्ती होने के बाद 30.9 फीसदी किशोरों में लक्षण नहीं थे। जबकि 84.6 फीसदी में हल्के, 9.1 फीसदी में मोडरेट और 6.3 फीसदी में कोरोना के गंभीर लक्षण पाए गए।
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सीआरपी बढ़ना मतलब जोखिम
एम्स के पल्मोनरी विभागाध्यक्ष डॉ. अनंत मोहन ने बताया कि संक्रमित होने के साथ ही वायरस उक्त व्यक्ति के शरीर में कई रासायनिक प्रक्रियाएं शुरू कर देता है। इन्हीं में से एक इनफ्लेमेशन है, जिसे सूजन भी कहते हैं। लिवर में सी रिएक्टिव प्रोटिन यानी सीआरपी प्रोड्यूस होता है। यह एक ब्लड मार्कर है जो शरीर में इन्फेक्शन का लेवल बताता है। इसका लेवल जितना बढ़ा हुआ होगा, उतना ही इंफेक्शन भी बढ़ा हुआ होगा।
दावा... एक साथ चल रहीं दो महामारी
ओमिक्रॉन कोविड-19 महामारी के फैलने के निर्धारित मार्ग को छोड़कर अलग से विकसित हुआ वैरिएंट है। इसी वजह से हमें यह मानना चाहिए कि इस समय डेल्टा व ओमिक्रॉन की दो अलग-अलग महामारी विश्व में एक साथ चल रही हैं। यह दावे प्रख्यात विषाणु विज्ञानी डॉ. जैकब जॉन ने रविवार को किए हैं।
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के विषाणु विज्ञान के एडवांस सेंटर (सीएआरवी) के पूर्व डायरेक्टर डॉ. जॉन ने कहा, 'यह पक्की बात है कि ओमिक्रॉन का विकास वुहान-डी614जी, अल्फा, बीटा, गामा, डेल्टा, काप्पा या म्यू जैसे वैरिएंट्स से नहीं हुआ।' इस वैरिएंट का बहुत पुराना पूर्वज वुहान-डी 614जी हो सकता है, लेकिन इसका बहुत सा हिस्सा अज्ञात है। इसलिए हमें महामारी की भावी प्रगति पर नजर रखनी चाहिए।
दोनों से बीमारी भी हो रही अलग
डॉ. जॉन ने बताया कि दोनों वैरिएंट से बीमारियां भी अलग हैं। डेल्टा संक्रमितों को निमोनिया-हाइपोक्सिया-मल्टी ऑर्गन डैमेज हो रहे हैं। ओमिक्रॉन में मरीजों के श्वसन तंत्र के ऊपरी या मध्य हिस्से में रोग हो रहे हैं। यह बुजुर्गों को नुकसान पहुंचा रहा है।