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अध्ययन: इलाज से कतराने पर पुरुषों को हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और HIV से ज्यादा मौत का खतरा
Mon, 05 May 2025 06:50 AM IST
शुभम कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शुभम कुमार
Updated Mon, 05 May 2025 06:50 AM IST
सार
प्लॉस मेडिसिन जर्नल के अध्ययन में पाया गया कि पुरुषों में हाई BP, डायबिटीज और HIV का खतरा ज्यादा है, लेकिन मर्दानगी की सोच और इलाज से कतराने की आदत उन्हें ज्यादा नुकसान पहुंचा रही है। महिलाओं की तुलना में 131 देशों में पुरुषों की मृत्यु दर अधिक पाई गई।
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ब्लड प्रेशर
- फोटो : Freepik.com
विस्तार
दुनिया भर में पुरुषों को महिलाओं की तुलना में हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन), डायबिटीज और एचआईवी/एड्स होने और उससे मरने का खतरा ज्यादा है। यह खुलासा प्लॉस मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित एक नए अध्ययन में हुआ है। इस अध्ययन में ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (जीबीडी) डाटा का इस्तेमाल किया गया और पाया गया कि पुरुषों में इन बीमारियों की दर ज्यादा है, लेकिन वे इलाज के लिए कम आगे आते हैं। मर्दानगी से जुड़े सामाजिक मानदंड और हेल्थकेयर की लागत इसकी बड़ी वजहें हैं।
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अध्ययन में ये बातें आई सामने
अध्ययन में यह भी देखा गया कि पुरुषों में धूम्रपान ज्यादा आम है। वहीं, महिलाएं अधिक मोटापे और असुरक्षित यौन व्यवहार का शिकार हैं। बावजूद इसके महिलाएं डॉक्टर के पास अधिक जाती हैं। इससे उन्हें बीमारियों का जल्द पता चलता है और उनका इलाज बेहतर होता है। मृत्यु दर के मामले में पुरुषों की एचआईवी/एड्स से मौत 131 देशों (64 फीसदी) में महिलाओं से ज्यादा थी। हाइपरटेंशन में 107 देशों (53 फीसदी) और डायबिटीज में 100 देशों (49 फीसदी) में पुरुषों की मृत्यु दर अधिक रही।
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स्वास्थ्य सेवाओं में भेदभाव भी
दुनिया के 200 देशों में हाइपरटेंशन, 39 देशों (जैसे अफगानिस्तान, बांग्लादेश, इथियोपिया) में डायबिटीज और 76 देशों (ऑस्ट्रेलिया, इटली, चिली आदि) में एचआईवी के इलाज में पुरुषों और महिलाओं को अलग तरह की देखभाल मिली। ग्लोबल 50/50 संस्था के सह-संस्थापक केंट ब्यूज ने कहा, ये अंतर केवल जैविक नहीं, बल्कि सामाजिक हैं। हमें स्वास्थ्य नीतियों में लैंगिक विश्लेषण जोड़कर सभी के लिए न्यायपूर्ण स्वास्थ्य व्यवस्था बनानी चाहिए। विशेषज्ञों ने पुरुषों को समय पर जांच,इलाज और रोकथाम में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने की रणनीतियां बनाने की जरूरत पर जोर दिया ताकि लैंगिक असमानता को खत्म किया जा सके।
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अध्ययन में ये बातें आई सामने
अध्ययन में यह भी देखा गया कि पुरुषों में धूम्रपान ज्यादा आम है। वहीं, महिलाएं अधिक मोटापे और असुरक्षित यौन व्यवहार का शिकार हैं। बावजूद इसके महिलाएं डॉक्टर के पास अधिक जाती हैं। इससे उन्हें बीमारियों का जल्द पता चलता है और उनका इलाज बेहतर होता है। मृत्यु दर के मामले में पुरुषों की एचआईवी/एड्स से मौत 131 देशों (64 फीसदी) में महिलाओं से ज्यादा थी। हाइपरटेंशन में 107 देशों (53 फीसदी) और डायबिटीज में 100 देशों (49 फीसदी) में पुरुषों की मृत्यु दर अधिक रही।
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दुनिया के 200 देशों में हाइपरटेंशन, 39 देशों (जैसे अफगानिस्तान, बांग्लादेश, इथियोपिया) में डायबिटीज और 76 देशों (ऑस्ट्रेलिया, इटली, चिली आदि) में एचआईवी के इलाज में पुरुषों और महिलाओं को अलग तरह की देखभाल मिली। ग्लोबल 50/50 संस्था के सह-संस्थापक केंट ब्यूज ने कहा, ये अंतर केवल जैविक नहीं, बल्कि सामाजिक हैं। हमें स्वास्थ्य नीतियों में लैंगिक विश्लेषण जोड़कर सभी के लिए न्यायपूर्ण स्वास्थ्य व्यवस्था बनानी चाहिए। विशेषज्ञों ने पुरुषों को समय पर जांच,इलाज और रोकथाम में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने की रणनीतियां बनाने की जरूरत पर जोर दिया ताकि लैंगिक असमानता को खत्म किया जा सके।