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अध्ययन: अल नीनो जून तक बढ़ाएगा रिकॉर्ड गर्मी, जंगलों में बढ़ेगी आग की घटनाएं, आएंगे चक्रवात

Wed, 06 Mar 2024 05:49 AM IST
यशोधन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क नई दिल्ली Published by: यशोधन शर्मा Updated Wed, 06 Mar 2024 05:49 AM IST
सार

सामान्यतः व्यापारिक हवाएं समुद्र के गर्म सतही जल को दक्षिण अमेरिकी तट से दूर ऑस्ट्रेलिया व फिलीपीन की ओर धकेलते हुए प्रशांत महासागर के किनारे-किनारे पश्चिम की ओर बहती हैं।

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Study El Nino increase record heat till June fire forests increase cyclones come
सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

दुनियाभर में जून 2024 तक अल नीनो के कारण औसत तापमान में भारी वृद्धि होने के आसार हैं। इसका असर जुलाई और अगस्त में भी बने रहने की संभावना है। सतही हवा का तापमान बहुत अधिक होने से चरम मौसम की घटनाओं में भारी वृद्धि होगी और उष्णकटिबंधीय चक्रवात, जंगल की आग, लू की घटनाओं में तेजी दिखेगी। 
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अध्ययनकर्ताओं के अनुसार, मध्यम या शक्तिशाली अल नीनो के कारण समान अवधि के दौरान वैश्विक औसत सतही तापमान के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के 90% आसार हैं। सामान्यतः व्यापारिक हवाएं समुद्र के गर्म सतही जल को दक्षिण अमेरिकी तट से दूर ऑस्ट्रेलिया व फिलीपीन की ओर धकेलते हुए प्रशांत महासागर के किनारे-किनारे पश्चिम की ओर बहती हैं। अल नीनो गर्म जलधारा है, जिसके कारण सागरीय जल का तापमान सामान्य से 3-4 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाता है। इसी कारण सतही हवा का तापमान भी बढ़ता है। दुनियाभर के कई हिस्सों जिनमें बंगाल की खाड़ी, फिलीपींस और कैरेबियन सागर भी शामिल हैं, अल नीनो की घटना जारी है।
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भारत पर असर
अल नीनो के कारण पूर्व से पश्चिम की ओर बहने वाली हवाएं कमजोर पड़ गईं हैं। पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में रहने वाली गर्म सतह वाला पानी भूमध्य रेखा के साथ पूर्व की ओर बढ़ रहा है। इससे भारत में भयंकर गर्मी पड़ती है। साथ ही भारी बारिश और सूखे के हालात बनते हैं।
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नासा ने कहा-समुद्र गर्म होने से होगी भारी गर्मी और बारिश
नासा ने अल नीनो की गर्म लहर को अंतरिक्ष से ही कैप्चर कर लिया। प्रशांत महासागर में गर्म पानी की एक लहर दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट से पूर्व की ओर निकली थी। सैटेलाइट से मिली तस्वीरों के मुताबिक इन्हें केल्विन लहरें कहा जाता है। ये प्रशांत महासागर में सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरे एशिया की तरफ बढ़ रही हैं।


यूं तैयार किया मॉडल
साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार प्रमुख शोधकर्ता कांगवेन झू और उनके सहयोगियों ने 1951 से 1980 के औसत सतही हवा के तापमान में क्षेत्रीय भिन्नता पर 2023-24 में अल नीनो के प्रभावों का मॉडल तैयार किया। ऐसा करने पर अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि मध्यम अल नीनो की स्थिति होने पर भी बंगाल की खाड़ी और फिलीपींस में इस अवधि के दौरान औसत सतही हवा का तापमान रिकॉर्ड तोड़ था।
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