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Water Crisis: पानी की सुरक्षा-गुणवत्ता पर गंभीर संकट, सदी के अंत तक 3.5 डिग्री सेल्सियस तक गर्म हो जाएगा भूजल

Thu, 06 Jun 2024 06:02 AM IST
दीपक कुमार शर्मा एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Thu, 06 Jun 2024 06:02 AM IST
सार

शोधकर्ताओं ने पानी में गर्मी फैलने के आधार पर दुनिया के पहले वैश्विक भूजल तापमान का मॉडल तैयार किया और इसके जरिए दुनिया भर में 2000-2100 के बीच होने वाले परिवर्तनों का भी अनुमान लगाया। यह बताता है कि बड़े पैमाने पर उत्सर्जन या जीवाश्म ईंधन से होने वाले विकास के चलते भूजल का तापमान 3.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है।

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Study Alarming Increase Ground Water temperature will warm end of century
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : एएनआई/अमर उजाला

विस्तार

सदी के अंत तक भूजल 2 से 3.5 डिग्री सेल्सियस तक गर्म हो सकता है। इससे जल की गुणवत्ता और सुरक्षा को खतरा हो सकता है। जल संसाधन पर निर्भर पारिस्थितिकी तंत्र भी संकट में पड़ सकता है। जर्मनी के कार्लसुरहे इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं ने अध्ययन के बाद यह खुलासा किया है। 

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दरअसल, शोधकर्ताओं ने पानी में गर्मी फैलने के आधार पर दुनिया के पहले वैश्विक भूजल तापमान का मॉडल तैयार किया और इसके जरिए दुनिया भर में 2000-2100 के बीच होने वाले परिवर्तनों का भी अनुमान लगाया। यह बताता है कि बड़े पैमाने पर उत्सर्जन या जीवाश्म ईंधन से होने वाले विकास के चलते भूजल का तापमान 3.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। इस मॉडल ने मध्य रूस, उत्तरी चीन, उत्तरी अमेरिका के कुछ हिस्सों और दक्षिण अमेरिका में अमेजन वर्षावन में भूजल के तापमान में सबसे अधिक बढ़ोतरी होने की भविष्यवाणी की है।
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60 करोड़ लोग होंगे प्रभावित
शोधकर्ताओं ने दावा किया कि गर्म भूजल की वजह से वैश्विक स्तर पर करीब 60 करोड़ लोग प्रभावित होंगे। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, वर्तमान में 125 देशों में से केवल 18 देशों में ही पेयजल के लिए तापमान दिशा-निर्देश हैं।
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गर्म भूजल से सूक्ष्मजीवों के पनपने का खतरा
अध्ययन के सह-लेखक यूके के न्यूकैसल विश्वविद्यालय के गेब्रियल राउ के मुताबिक, गर्म भूजल बीमारी पैदा करने वाले सूक्ष्मजीवों के पनपने के जोखिम को बढ़ाता है। इससे पेयजल की गुणवत्ता और संभावित तौर से लोगों के जीवन पर असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि खासतौर पर यह उन क्षेत्रों के लिए फिक्र की बात है जहां पीने के साफ पानी की पहुंच पहले से ही सीमित है। उन क्षेत्रों के लिए भी यह चिंता का विषय है, जहां भूजल बगैर ट्रीटमेंट यानी साफ किए इस्तेमाल में लाया जाता है।


पृथ्वी गर्म, जलवायु परिवर्तन में तेजी के सबूत नहीं
वहीं, दुनियाभर के 57 वैज्ञानिकों ने अधिक गर्मी का कारण जानने की जांच की। इस अध्य्यन के मुताबिक पृथ्वी के गर्म होने की दर 2023 में सर्वकालिक उच्च स्तर पर है, लेकिन जलवायु परिवर्तन में तेजी के सबूत नहीं हैं। इसमें रिकॉर्ड-तोड़ने वाली गर्मी का 92% हिस्सा मनुष्यों के कारण रहा। यह गणना शीर्ष वैज्ञानिकों ने की है। दुनियाभर के 57 वैज्ञानिकों के समूह ने पिछले साल की बहुत अधिक गर्मी के पीछे के कारण जानने और इसकी जांच करने के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा अनुमोदित विधियों का उपयोग किया। वैज्ञानिकों ने कहा, तापमान तेजी से बढ़ने के बावजूद उन्हें जीवाश्म ईंधन के जलने की तुलना में मनुष्यों के कारण जलवायु परिवर्तन में अधिक तेजी के सबूत नहीं दिखते। गत वर्ष के रिकॉर्ड तापमान इतने असामान्य रहे कि वैज्ञानिकों ने इसके इतना अधिक बढ़ने पर बहस कर इसके कारणों की व्याख्या की। 

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