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हीरानंदानी अस्पताल के किडनी रैकेट का भंडाफोड़ करने वाले बेघर मजदूर की कहानी

Sat, 13 Aug 2016 12:55 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 13 Aug 2016 12:55 PM IST
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story of a homeless labourer who exposed hiranandani kidney racket
- फोटो : Indian Express
मुंबई के पवई में एलएच हीरानंदानी अस्पताल के किडनी रैकेट का भंडाफोड़ करने वाले डोनर और मुंबई पुलिस के बीच अहम कड़ी ने 2007 में भी इसी तरह के एक और रैकेट का पर्दाफाश करने में अहम भूमिका निभाई थी। इस रैकेट में दो प्राइवेट अस्पताल और चेन्नई के डॉक्टर शामिल थे। 
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हालांकि मुंबई पुलिस और डोनर सुंदर सिंह को पुलिस से मिलवाने वाले आबिद शेख बेघर मजदूर की जिंदगी जी रहे हैं। 30 वर्ष के शेख टेम्पो में सोते हैं और फूड स्टॉल पर काम करके 50 रुपये रोजाना कमाते हैं। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक शेख साल 2000 में मुंबई आए और दिहाड़ी मजदूर के तौर पर जिंदगी शुरु की। शेख बताते हैं कि 'मुंबई आने के सात साल बाद उनके दोस्त दीपक जायसवाल ने बताया कि उसने लाखों रुपये के लिए अपनी किडनी दान कर दी है। हालांकि उसने साथ धोखा हुआ था सुंदर की तरह। मैंने उसे पुलिस के पास जाने और रैकेट का भंडाफोड़ करने की बात कही।' कुछ साल पहले जायसवाल की मौत हो गई।
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शेख का दावा है कि हीरानंदानी रैकेट केस में पकड़ा गया इकबाल खान 2007 से ही यह रैकेट चला रहा है। खान डोनरों के लिए कथित तौर पर जाली दस्तावेज तैयार करता था। इसके साथ ही रैकेट का मास्टर माइंड बृजेंद्र बिसेन भी 2007 से इस रैकेट का हिस्सा है। बिसेन को मुंबई पुलिस ने पहले गिरफ्तार किया था, हालांकि उसे बेल मिल गई।
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'दस्तावेज जुटाने में लगा एक साल'

story of a homeless labourer who exposed hiranandani kidney racket
Hiranandani Hospital Kidney Racket - फोटो : demo pic
शेख ने कहा कि उस समय हमारे पास कोई दस्तावेज नहीं थे और तब भी पुलिस मामले की जांच को तैयार हो गई थी, लेकिन इस बार मुझे दस्तावेज जुटाने में एक साल से ज्यादा समय लग गया। 

उनका कहना है कि एक साल पहले उन्हें जानकारी मिली थी कि बिसेन और खान हीरानंदानी अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट का गोरखधंधा चला रहे हैं। शेख उस समय सुंदर सिंह के साथ मुंबई सेंट्रल के झुनका भाकर केंद्र में काम करते थे। हालांकि किडनी डोनेशन के लिए जाते समय इसी साल 17 मार्च को सुंदर सिंह ने शेख से अपने सारे कनेक्शन खत्म कर डाले। 

इसके बाद शेख की सुंदर से तीन महीने बाद मुलाकात हुई और उन्हें कथित किडनी डोनेशन का पता चला। शेख कहते हैं, 'अगर मुझे पहले पता चल गया होता, तो मैंने सुंदर को किडनी देने से रोक लिया होता। सुंदर ने शेख और पुलिस को बताया था कि उन्हें किडनी डोनेशन के लिए एक भी पैसा नहीं मिला और उनसे बिसेन के साथ 500 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी पर काम करने को कहा गया।'

इनाम का इंतजार

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पुलिस के मुताबिक सुंदर सिंह का काम हीरानंदानी अस्पताल और मरीजों के बीच संपर्क सूत्र का था। साथ ही उसे खान, बिसेन और अस्पताल स्टॉफ के बीच दस्तावेजों का आदान प्रदान करने का जिम्मा सौंपा गया था। शेख ने सुंदर से ट्रांसप्लांट से जुड़े सभी दस्तावेज मुहैया कराने को कहा। समझाने के बाद सुंदर इसके लिए तैयार हो गया। 

13 जुलाई को बृजकिशोर जायसवाल को शोभा ठाकुर की किडनी मिलने वाली थी, इससे ठीक एक दिन पहले सुंदर सिंह ने पिछले चार किडनी ट्रांसप्लांट के दस्तावेज शेख को सौंपे। शेख ने इसके बाद इंडियन ट्रेड यूनियन कांग्रेस की मदद से पुलिस से संपर्क किया और रैकेट का भंडाफोड़ कर दिया। शेख अब अपनी जिंदगी को लेकर चिंतित हैं और मोबाइल फोन रखना बंद कर दिया है। यहां तक कि वह अपना स्थायी पता भी किसी को नहीं बताते। उन्हें डर है कि उनके परिवार को खतरा हो सकता है। शेख दावा करते हैं कि 2007 में किडनी रैकेट का भंडाफोड़ करने पर उन्हें सात लाख रुपये मिले थे। इस बार भी उन्हें इनाम का इंतजार है। 

मंगलवार को मुंबई पुलिस ने किडनी रैकेट केस में हीरानंदानी अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर, सीईओ और पांच मेडिकल प्रोफेशनल्स को गिरफ्तार किया। इन सब पर मानव अंगों के अवैध व्यापार में शामिल होने का आरोप है। 
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