जब गुलजार को अपनी निजी डायरियां सौंप दुनिया से विदा हुईं मीना कुमारी
कोई चाहत है न जरूरत है, मौत क्या इतनी खूबसूरत है, मौत की गोद मिल रही हो अगर, जागे रहने की क्या जरूरत है.... ये नज्म बॉलीवुड की ट्रैजडी क्वीन के नाम से जानी जाने वाली मीना कुमारी की लिखी है। आज उनका 85वां जन्मदिन है। वह न केवल लोगों के दिलों पर राज करने वाली अदाकारा थीं बल्कि एक बेहतरीन शायर और गायिका भी थीं। उनकी जिंदगी के तमाम ब्लैक एंड वाइट किस्से हैं। आज हम उन्हीं में से एक किस्से के बारे में आपको बताने जा रहे हैं। वो किस्सा, जो जुड़ा है मशहूर गीतकार और कवि गुलजार से।
मीना कुमारी को शायरी लिखना बहुत पसंद था। उनका झुकाव उर्दू शायरी की तरफ कुछ ऐसा था कि वह फुरसत के वक्त घंटों मीर से लेकर फैज तक की शायरी पढ़ा करती थीं। वह खुद भी शायरी लिखा करती थीं। उनकी शायरी की तरफ बढ़ता झुकाव उन्हें युवा गुलजार के करीब ले गया। उनका शायराना अंदाज और अदाकारी पर गुलजार भी फिदा थे। दोनों फुरसत के लमहों में शेर-ओ-शायरी पर बातें करते और दुनिया इसे मोहब्बत मान बैठी थी।
उनकी लिखी शायरी को उनके पति कमाल अमरोही बिल्कुल तवज्जो नहीं देते थे। उनका मानना था कि मीना को कविताओं की कोई समझ नहीं है। वह ऐसा कहने वाले अकेले नहीं थे बल्कि उनके अभिनय की तारीफ करने वाले निर्देशक ख्वाजा अहमद अब्बास भी थे। वह कहते थे कि मीना की कविताओं में कोई गहराई नहीं है।
अपनी तमाम निजी डायरियां गुलजार को सौंपी
गुलजार ने उनकी लिखी हर कविता को तवज्जो दी। गुलजार मानते थे कि मीना को इमेजरी की काफी समझ है। जो कि उनके लिखे में जीवंत हो उठती है। यही वजह थी कि मीना कुमारी अपनी तमाम निजी डायरियां गुलजार को सौंपकर दुनिया से विदा हो गईं। उनकी लिखी नज्मों और गजलों को गुलजार ने एक नई शक्ल दी। उन्होंने 'मीना कुमारी की शायरी' नामक किताब प्रकाशित करवाई। लेकिन डायरियों के उस जखीरे में से लिखा बहुत कुछ कहीं बंद करके रख दिया।
'मीना कुमारी: द क्लासिकल बायोग्राफी' किताब के लेखक दिवंगत पत्रकार विनोद मेहता बताते हैं कि गुलजार और मीना की मुलाकात बिमल रॉय की फिल्म बेनजीर (1964) के सेट पर हुई थी। गुलजार इस फिल्म में असिस्टेंट डायरेक्टर थे। मीना को उनका साथ बहुत पसंद था। दोनों साथ बैठकर किताबों पर बातें करते। जब साथ न होते तो फोन पर गुफ्तगू होती। लेकिन इसी फिल्म की शूटिंग के दौरान मीना और उनके पति का रिश्ता टूट गया। उनकी मौत 31 मार्च 1972 को मुंबई में हुई।