कार्बन उत्सर्जन तुरंत रुके : वरना नहीं रोक पाएंगे बढ़ता तापमान, चेतावनियों से भरी आईपीसीसी रिपोर्ट में कहा- तीन साल में व्यापक सुधार हों
आज भी हमारे पास औसत ताप वृद्धि को सीमित रखने का अवसर है। बिजली उत्पादन, उद्योगों, परिवहन से लेकर हमारे द्वारा चीजों का उपभोग, खाना-पीना, खरीदारी के पैटर्न में बदलाव लाने होंगे। ऐसा कर पाए तो बदलावों की वजह से कार्बन उत्सर्जन 2025 तक चरम पर पहुंचेगा, लेकिन फिर तेज गिरावट आएगी।
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पृथ्वी को बचाने का युद्ध अहम मोड़ पर पहुंच चुका है। कोयले से बिजली उत्पादन रोकने से लेकर खाने-पीने, चीजें खरीदने और उपयोग करने की मौजूदा आदतों तक में व्यापक बदलाव करने होंगे। 2025 तक कार्बन उत्सर्जन चरम पर पहुंचने के बाद अगले ही साल से इसमें गिरावट शुरू कर देनी होगी। ऐसा न किया गया, तो बढ़ता तापमान शायद कभी नहीं रुक पाएगा। इसके लिए हमें जीवन व भोजन की आदतों में बदलाव करना होगा।
संयुक्त राष्ट्र के इंटर-गवर्नमेंट पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) के वैज्ञानिकों ने 2030 तक पृथ्वी को बचाने के लिए चेतावनियों से भरी कार्ययोजना सोमवार को जारी की। उन्होंने साफ कहा कि हमें अभी यह सुधार करने होंगे। 2030 तक अगर हम कार्बन के स्तर में कमी नहीं ला सके, तो इस सदी के अंत तक पृथ्वी को बेहद गर्म होने से नहीं रोक सकेंगे।
2025 से उत्सर्जन घटाना शुरू करने के बाद भी हमें ऐसी तकनीकों की जरूरत होगी, जो 2050 के बाद आकाश और वातावरण में बढ़ चुकी कार्बन सोखने में मदद करें। रिपोर्ट के अनुसार, हमें सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा को बढ़ावा देना होगा। इसके साथ ही जीवाश्म ईंधन का उपयोग बंद करना होगा। इतना ही नहीं, रिपोर्ट में खासतौर पर कहा गया है, जीवाश्म ईंधन आधारित नए बिजली संयंत्र हरगिज नहीं लगाने हैं।
हमें क्या करना होगा?
- 2050 से ऐसी तकनीकें लानी होंगी जो वातावरण से कार्बन सोख सकें
- बिजली उत्पादन से लेकर खानपान सुधारें; तभी 2030 तक जीतेंगे पृथ्वी को बचाने का युद्ध
बुरी खबर : सभी नीतियां लागू करें तो भी 3.2 डिग्री बढ़ेगा तापमान
रिपोर्ट के अनुसार, 2020 तक कार्बन उत्सर्जन रोकने के लिए जो नीतियां सामने रखी गईं, अगर वे सब लागू हों, तब भी इस सदी के आखिरी तक पृथ्वी का औसत तापमान 3.2 डिग्री सेल्सियस अधिक हो जाएगा।
- यूएन के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के अनुसार कई देश व सरकारें जो कह रही हैं, वैसा कर नहीं रहीं। इसके परिणाम विपदाकारी होंगे। भयानक गर्म हवाएं, चक्रवाती तूफान व पानी की कमी से हमें जूझना पड़ेगा। हर ताप वृद्धि 1.5 डिग्री से कम हाल में रखनी होगी।
अच्छी खबर : अब भी है औसत ताप वृद्धि को सीमित रखने का अवसर
आज भी हमारे पास औसत ताप वृद्धि को सीमित रखने का अवसर है। बिजली उत्पादन, उद्योगों, परिवहन से लेकर हमारे द्वारा चीजों का उपभोग, खाना-पीना, खरीदारी के पैटर्न में बदलाव लाने होंगे। ऐसा कर पाए तो बदलावों की वजह से कार्बन उत्सर्जन 2025 तक चरम पर पहुंचेगा, लेकिन फिर तेज गिरावट आएगी।
- 2050 तक उत्सर्जन को शून्य करना ही होगा। जितनी कार्बन विश्व ने पिछले 10 साल में उत्सर्जित की, सदी के अंत तक हम उतना ही और उत्सर्जन सह सकते हैं।