INS Tamal: क्यों चर्चा में स्टील्थ मिसाइल युद्धपोत तमाल, नौसेना में कब किया जाएगा शामिल? इसकी खासियत भी जानिए
पाकिस्तान से जारी तनाव के बीच नौसेना की हिंद महासागर में और ताकत बढ़ने वाली है। नौसेना को रूस निर्मित आधुनिक स्टील्थ मिसाइल युद्धपोत तमाल 1 जुलाई को मिलेगा। रडार की पकड़ में नहीं आने वाला यह युद्धपोत दुश्मन की पनडुब्बियों और स्टील्थ जहाजों को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। आईएनएस तमाल, आईएनएस तुशिल श्रेणी का दूसरा जहाज है।
Please wait...
विस्तार
भारतीय नौसेना के रूस निर्मित निर्देशित मिसाइल फ्रिगेट आईएनएस तमाल को 1 जुलाई को रूस के तटीय शहर कलिनिनग्राद में सेना में शामिल किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि इस जहाज में 26 फीसदी स्वदेशी घटक हैं, जिसमें समुद्र और जमीन दोनों पर निशाना साधने के लिए ब्रह्मोस लंबी दूरी की क्रूज मिसाइल शामिल है। आईएनएस तमाल पिछले दो दशकों में रूस से शामिल होने वाला आठवां क्रिवाक श्रेणी का फ्रिगेट होगा। इस युद्धपोत का निर्माण कलिनिनग्राद के यंतर शिपयार्ड में किया गया है। यह विदेशी स्रोत से शामिल होने वाला अंतिम ऐसा प्लेटफॉर्म है।
कमीशनिंग समारोह की अध्यक्षता पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय जे. सिंह करेंगे। इस कार्यक्रम में कई उच्च पदस्थ भारतीय और रूसी रक्षा अधिकारी शामिल होंगे। आईएनएस तमाल तुशील श्रेणी का दूसरा जहाज है, जो अपने पूर्ववर्ती तलवार और तेग श्रेणी के उन्नत संस्करण हैं।
तमाल रूस संग 21,000 हजार के रक्षा समझौते का हिस्सा
तमाल युद्धपोत 2016 में रूस के साथ 21,339 करोड़ (2.5 बिलियन डॉलर) के रक्षा समझौते का हिस्सा है। इसके तहत चार क्रिवाक/तलवार श्रेणी के स्टील्थ युद्धपोत बनाए जा रहे हैं। इनमें से दो का निर्माण रूस के यांतर शिपयार्ड में और दो अन्य का निर्माण गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएल) में होना है। गोवा में बनने वाले युद्धपोत के लिए रूस अपनी प्रौद्योगिकी देगा।
रूस के साथ समझौते के तहत पहला युद्धपोत आईएनएस तुषिल पिछले साल दिसंबर में यांतर शिपयार्ड में नौसेना में शामिल हुआ था और फरवरी में देश पहुंचा था। तुशिल और तमाल प्रोजेक्ट 1135.6 के उन्नत क्रिवाक-3 श्रेणी के युद्धपोत हैं। ऐसे छह युद्धपोत पहले से ही सेवा में हैं। इनमें से तीन तलवार श्रेणी के हैं। ये रूस के सेंट पीटर्सबर्ग के बाल्टिक शिपयार्ड में बने हैं। अन्य तीन तेग श्रेणी के युद्धपोत हैं और ये यांतर शिपयार्ड पर बने हैं।
नए युद्धपोतों में 26 फीसदी स्वदेशी सामान
नए युद्धपोतों में करीब 26 फीसदी स्वदेशी सामान लगा है। यह पिछले तेग श्रेणी के युद्धपोत से दोगुना है। इनके निर्माण में 33 कंपनियों का योगदान है। इनमें भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, ब्रह्मोस एयरोस्पेस (भारत-रूस का संयुक्त उद्यम) और नोवा इंटीग्रेटेड सिस्टम्स (टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी) भी शामिल हैं।
तमाल की खासियतें
- वजन 3,900 टन
- गति 55 किमी/घंटा
- एक बार में 3000 किमी की दूरी तय करने में सक्षम
- स्टील्थ तकनीक से लैस युद्धपोत दुश्मनों की रडार पर नहीं आएगा
- ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल से लैस
- उन्नत रेंज वाली सतह से हवा में मार करने वाली श्टिल मिसाइल भी लगी होगी
- उन्नत मध्यम दूरी की एंटी-एयर और सरफेस गन
- ऑप्टिकली नियंत्रित निकट दूरी की तीव्र फायर गन प्रणाली, टारपीडो और रॉकेट भी शामिल
- अत्याधुनिक रडार-सेंसर भी लगे हुए हैं