रेलवे की जमीन पर राज्य सरकार बना सकेगी हाउसिंग कॉलोनी, इन शहरों के बीच है जमीन
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शहर का विकास अब पुराने रेलवे ट्रैक पर भी संभव हो सकेगा। रेलवे की खाली जमीन पर राज्य सरकार वहां हाउसिंग कॉलोनी व व्यवसायिक केंद्र का विकास कर सकेगी। रेल मंत्रालय ने राज्य सरकारों के मुख्य सचिव को इस बाबत एक पत्र भी लिखा है, जिसमें कहा गया है कि रेलवे ट्रैक को नैरो गेज व मीटर गेज को ब्राड गेज में बदलने के कारण कुल 4883.01 एकड़ जमीन खाली पड़ी है। राज्य सरकार इस खाली पड़े रेलवे ट्रैक का इस्तेमाल कर सकती है। शाहजहांपुर से लखनऊ, अंबाला से कालका, सहारनपुर से मनानी, भटिंडा से श्रीगंगानगर के बीच खाली जमीन का विकास अब संभव होगा।
रेलवे ने अपनी लैंड पॉलिसी के तहत अपनी जमीन राज्य सरकार को देने की योजना तैयार की है। इस बाबत रेल मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, असम, कर्नाटक, गुजरात, तमिलनाडू, उड़िसा, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों के मुख्य सचिव को पत्र लिखा है। पत्र में कहा गया है कि रेलवे ट्रैक मीटर गेज से ब्राड गेज में बदलने के कारण मीटर गेज वाला पूरा ट्रैक खाली हो गया है। इसका इस्तेमाल राज्य सरकार हाई-वे, सड़क निर्माण व अन्य विकास के लिए कर सकती है। हालांकि इसके लिए राज्य सरकार को बाजार के दर पर रेलवे को पैसा चुकाना होगा। बता दें कि रेलवे ट्रैक के दोनों तरफ का भू-भाग रेलवे के अधीन ही होता है।
रेलवे की तरफ से खाली भूमि का ब्यौरा भी राज्य सरकार को दिया गया है। इनमें मुख्य रूप से शाहजहांपुर से लखनऊ रेल ट्रैक पर 21.92 एकड़ जमीन को खाली बताया गया है। इसी तरह अंबाला से कालका के बीच 9.20 एकड़ जमीन, सहारनपुर से मनानी के बीच 36 एकड़ जमीन, भटिंडा से श्रीगंगानगर के बीच 15.83 जमीन को खाली बताया गया है। रेलवे के खाली पड़े भू-भाग का राज्य सरकार बाजार दर पर खरीद कर विकास कर सकती है। इसी तरह महाराष्ट्र के सतारा रेलवे ट्रैक पर 24 एकड़, कोरेगांव में 1.35 एकड़ भूमि समेत पूरे भारत में कुल 4883.01 एकड़ जमीन पर राज्य सरकार विकास कर सकेगी।