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शराब के नशे में होने वाले अपराध के लिए राज्य सरकार जिम्मेदार नहीं: सुप्रीम कोर्ट

Sun, 07 Jul 2019 06:29 AM IST
आसिम खान राजीव सिन्हा, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा, नई दिल्ली Published by: आसिम खान Updated Sun, 07 Jul 2019 06:29 AM IST
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State government is not responsible for crime done in intoxication says Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि शराब के नशे में होने वाले अपराध के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। शीर्ष अदालत ने मद्रास हाईकोर्ट के एक आदेश के उस हिस्से को रिकॉर्ड से हटाने का निर्देश दिया है जिसमें कहा गया था कि चूंकि राज्य सरकार अपनी कंपनी के द्वारा शराब की बिक्री करती है लिहाजा शराब के नशे में होने वाले अपराधों के लिए राज्य सरकार को प्रवर्तक (उकसाने वाला) माना जाना चाहिए।

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न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति दिनेश महेश्वरी की पीठ के समक्ष तमिलनाडु के एडिशनल एडवोकेट जनरल (एएजी) बालाजी श्रीनिवासन ने कहा कि खुदकुशी के एक मामले में अग्रिम जमानत की याचिका को हाईकोर्ट की एकलपीठ ने मनमाने तरीके से जनहित याचिका के तौर पर विचार किया। वास्तव में गत 26 मार्च को हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि शराब के नशे में होने वाले अपराधों के लिए सरकार को भारतीय दंड संहिता की धार-107(अपराध के लिए उकसाना) का जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। 
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हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि सरकार अपने लोगों को शराब बेचती है, ऐसे में शराब के कारण प्रतिकूल प्रभाव पड़ने पर वह पल्ला नहीं झाड़ सकती। कभी न कभी तो सरकार को ऐसे अपराधों में बढ़ोतरी के लिए जिम्मेदार माना जाना चाहिए। सरकार ने हाईकोर्ट की उस टिप्पणी का विरोध करते हुए कहा कि क्या सड़क दुर्घटना के लिए वाहन निर्माता या कैंसर के लिए सिगरेट बनाने वाली कंपनियों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है? 
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एएजी ने कहा कि नशे की हालत में होने वाले अपराधों के लिए महज सरकार को इसलिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता कि वह शराब की बिक्री करती है। एएजी की दलीलों को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमें इस बात पर कोई संदेह नहीं को एकलपीठ ने अग्रिम जमानत की याचिका पर सुनवाई करते हुए अपने क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर काम किया है। यह कहते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की इस टिप्पणी को रिकॉर्ड से हटाने का निर्देश दिया है।

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