फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Standing Committee on Defence short allocation of budget affect weaponry, aircraft, ships, tanks etc

रक्षा बजट में कटौती का सैन्य क्षमता पर असर, रक्षा संबंधी स्थायी समिति बोली- पूरा बजट जरूरी

Fri, 13 Mar 2020 07:36 PM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: योगेश साहू Updated Fri, 13 Mar 2020 07:36 PM IST
विज्ञापन
Standing Committee on Defence short allocation of budget affect weaponry, aircraft, ships, tanks etc
जनरल बिपिन रावत (फाइल फोटो) - फोटो : एएनआई

रक्षा संबंधी स्थायी समिति का मानना है कि रक्षा बजट में की गई कटौती का देश की सैन्य क्षमताओं को और बेहतर बनाने के प्रयासों पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। इससे आधुनिक हथियार, विमान, जहाज और टैंक आदि के साथ-साथ बुनियादी ढांचा और अन्य परियोजनाएं प्रभावित होंगी।

विज्ञापन


समिति ने शुक्रवार को जानकारी दी कि वर्ष 2020-21 के लिए रक्षा मंत्रालय को बजट में 1.13 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जबकि मंत्रालय को जरूरत 1.75 लाख करोड़ रुपये की है, ऐसे में 61,968.06 करोड़ रुपये कम आवंटित किए गए हैं।
विज्ञापन


समिति ने यह भी कहा कि इसके अलावा सेवाओं के लिए 1,02,432 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जबकि जरूरत 1,61,849.20 करोड़ रुपये की थी। ऐसे में इस मद में 59,416.63 करोड़ रुपये कम आवंटित हुए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


समिति ने कहा कि मंत्रालय के बजट के आवंटन में कमी की वजह से बुनियादी ढांचे सहित आधुनिक हथियार, विमान, जहाज, टैंकों की खरीद, भूमि, भवन और अन्य जरूरी परियोजनाएं प्रभावित होंगी।

समिति का मानना है कि सबसे आधुनिक सैन्य हथियार और अन्य साजो-सामान विकसित कर या खरीदकर हम अपने उत्तरी और पश्चिमी पड़ोसियों से बराबरी कर सकते हैं। ऐसे में पूरे बजट का आवंटन जरूरी है।

रक्षा मंत्रालय के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत ने इस बात करते हुए कहा कि रक्षा मंत्रालय सशस्त्र बलों में कर्मियों की संख्या को तर्कसंगत बनाना चाहता था। उन्होंने कहा कि हम देख रहे हैं कि कैसे हम प्रौद्योगिकी को शामिल कर सकते हैं, क्या यह जवानों की पूरक हो सकती है।

जबकि हम समझते हैं कि हमने पश्चिम और उत्तर की सीमाओं को सक्रिय कर दिया है, इसलिए हम अपने रक्षा बलों और जनशक्ति संख्याओं की आवश्यकता को पूरी तरह से दूर नहीं कर सकते। लेकिन हम देख रहे हैं कि हम इसे कैसे प्रौद्योगिकी के माध्यम से अनुकूलित कर सकते हैं।


सेना के वाइस चीफ लेफ्टिनेंट जनरल एसके सैनी ने रक्षा संबंधी स्थायी समिति को लेकर कहा कि हमने जम्मू-कश्मीर और भारत के पूर्वोत्तर हिस्सों में लंबी सीमाओं की सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से जमीनी स्तर पर जवानों की जरूर होती है। ऐसे में बड़ी और स्थायी की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि यह एक कारण है जिस वजह से आवंटित बजट और राजस्व व्यय के अनुपात में एकरूपता नहीं आ पाती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed