एसएससी जीडी: 55000 उम्मीदवार केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की वर्दी पहनने से चूक गए, केंद्र पूरा कर सकता है उनका ये सपना!
कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह बताते हैं कि पिछले चार सालों से युवाओं के भविष्य के साथ 50-50 का खेल खेला गया। कुछ युवाओं ने गरीबी के चलते आत्महत्याएं की और कुछ उम्मीदवार कोरोना काल का ग्रास बन गए। तीन चौथाई अभ्यर्थी ओवरएज हो गए हैं...
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एसएससी जीडी 2018 की भर्ती के तहत लाखों आवेदकों ने केंद्रीय अर्धसैनिक बलों का हिस्सा बनने के लिए खूब मेहनत की। अमूमन किसी परीक्षा का रिजल्ट एक साल में आ जाता है। यहां पर रिजल्ट चौथे साल में आया है। नतीजा, दो तिहाई उम्मीदवार तय आयु सीमा से बाहर हो गए। ये सभी वे उम्मीदवार थे, जिन्हें खुद पर पूर्ण भरोसा था। इन्होंने साबित कर दिखाया और सभी उम्मीदवार भर्ती के तमाम मापदंड पूरे करते हुए मेडिकल जांच तक पहुंच गए। वह भी पास कर ली, लेकिन जब फाइनल सूची आई तो 55000 उम्मीदवारों का सपना टूट गया। इनका कहीं नाम नहीं था, जबकि इन्होंने सभी चरण पार कर लिए थे।
केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में 1.11 लाख रिक्तियां थीं। साठ हजार पदों के लिए भर्ती हुई, लेकिन 54 हजार पद ही भरे गए। इन 55 हजार आवेदकों का कहना है कि उन्हें भी वर्दी पहनने का मौका दिया जाए। अब वे ओवरएज हो गए हैं। दूसरा चांस भी नहीं ले सकते। मंगलवार को कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन और युवा हल्लाबोल ने इन आवेदकों के समर्थन में ट्विटर पर आवाज बुलंद की है।
कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह बताते हैं कि चार साल से दर दर भटक रहे 55 हजार मेडिकल फिट एसएससी जीडी युवाओं ने अपनी नियुक्ति को लेकर ट्विटर पर अभियान शुरू किया है। दोपहर तक डेढ़ लाख से अधिक उम्मीदवारों, उनके रिश्तेदारों और शुभचिंतकों ने इस अभियान में हिस्सा लिया। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में 1 लाख 11 हजार सिपाहियों के पदों पर सीटें खाली पड़ी हैं, ऐसे में सरकार को अतिशीघ्र मेडिकल फिट युवाओं को नियुक्ति पत्र जारी करना चाहिए। पिछले चार सालों से युवाओं के भविष्य के साथ 50-50 का खेल खेला गया। यानी 55 हजार की नियुक्ति और 55 हजार को मेडिकल फिट होते हुए भी बीच मझदार में छोड़ दिया गया। कुछ युवाओं ने गरीबी के चलते आत्महत्याएं की और कुछ उम्मीदवार कोरोना काल का ग्रास बन गए। तीन चौथाई अभ्यर्थी ओवरएज हो गए हैं।
रणबीर सिंह के मुताबिक, सरकार इन उम्मीदवारों को समय रहते नियुक्ति पत्र जारी करे। हम भूल रहे हैं इन युवा परिवारों की शक्ति को, जिहोंने बंगाल, केरल व तमिलनाडु के चुनावों में एक निर्णायक भूमिका निभाई है। कहीं फिर से ऐसा न हो कि आने वाले उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब व गुजरात सहित अन्य राज्यों के विधानसभा चुनावों में सरकार को मुंह की खानी पड़े। प्रधानमंत्री मोदी व गृह मंत्री अमित शाह से मांग की गई है कि इन सभी उम्मीदवारों को अतिशीघ्र नियुक्ति पत्र जारी किया जाए। इन युवाओं की नियुक्ति से सरकार के बजट में कोई खास घाटा आने वाला नहीं है। ये युवा पैरामिलिट्री चौकीदार देश की कानून व्यवस्था, असामायिक प्राकृतिक विपदाओं, आने वाले चुनावों, पाक दहशतगर्दों, नक्सलियों, दंगाइयों व असामाजिक तत्वों जैसी राष्ट्र विरोधी ताकतों से निपटने में एक महत्वपूर्ण रोल अदा करेंगे।
युवा हल्लाबोल के राष्ट्रीय संयोजक अनुपम कहते हैं कि सरकार ने जानबूझकर इन उम्मीदवारों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है। सरकार के पास पर्याप्त पद हैं, बजट है और योग्य उम्मीदवार हैं। ऐसे में सरकार को इन उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र देने में देरी नहीं करनी चाहिए। युवा हल्लाबोल ने कई साल पहले केंद्र सरकार को एसएससी की भर्ती तय समय पर पूरी करने के लिए एक फार्मूला दिया था। उसके तहत नौ माह में भर्ती प्रक्रिया पूरी हो जाती है। केंद्र सरकार ने इसकी तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। नतीजा, परीक्षा आयोजन, परिणाम और ज्वाइनिंग प्रक्रिया में देरी होती चली गई। अब कोई उम्मीदवार कितना इंतजार करेगा। चार साल तक एक परीक्षा के परिणाम का इंतजार, ये तो सरासर नाइंसाफी है। ऐसे में बहुत से आवेदकों की दूसरे चांस के लिए आयु तो निकल ही जाएगी। केंद्र सरकार को बिना कोई देरी किए इन उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र दे देना चाहिए। वजह, ये केवल 55000 नहीं हैं, बल्कि इनके साथ लाखों परिजनों, रिश्तेदारों और परिचितों के सपने जुड़े हैं।