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श्रीलंका: विदेश मंत्री हेराथ बोले- पयर्टन को पुनर्जीवित करने में भारत निभा सकता है अहम रोल
Tue, 17 Dec 2024 10:05 PM IST
राहुल कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Tue, 17 Dec 2024 10:05 PM IST
सार
Sri Lanka: इंडिया फाउंडेशन प्रोग्राम में हेराथ ने कहा, 2018 से पहले हमारा पर्यटन क्षेत्र बहुत बड़ा था। मुझे याद है कि हमने चार अरब डॉलर (करीब 34 हजार करोड़ रुपये) सिर्फ पयर्टन से कमाए थे, लेकिन आतंकवाद ने बड़ी चोट पहुंचाई है।
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श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिता हेराथ
- फोटो : ANI
विस्तार
श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिता हेराथ ने कहा कि भारत उनके देश में पर्यटन को पुनर्जीवित करने में अहम भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत बड़ा देश है, यहां के लोग घूमना-फिरना पसंद करते हैं। हम भारत समेत 39 देशों को जनवरी से निःशुल्क वीजा देने की तैयारी कर रहे हैं। जल्द ही इस पर अंतिम फैसला ले लिया जाएगा।
इंडिया फाउंडेशन प्रोग्राम में हेराथ ने कहा, 2018 से पहले हमारा पर्यटन क्षेत्र बहुत बड़ा था। मुझे याद है कि हमने चार अरब डॉलर (करीब 34 हजार करोड़ रुपये) सिर्फ पयर्टन से कमाए थे, लेकिन 2019 में ईस्टर संडे को, आईएस ने ग्रेटर कोलंबो क्षेत्र और बट्टिकलोआ में चार होटलों और तीन चर्चों में आत्मघाती बम विस्फोट किए। इस हमले में पांच अमेरिकियों सहित 260 से अधिक लोग मारे गए थे। इससे श्रीलंका का पयर्टन क्षेत्र चरमरा गया।
हेराथ ने कहा कि अभी देश इससे उबर ही रहा था कि कोविड-19 बीमारी आ गई। इसके बाद, देश पर आर्थिक संकट गहरा गया। इन तीन कारकों के कारण, हमें बहुत सारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा, भविष्य को देखते हुए अब समय आ गया है कि हम अपने पयर्टन क्षेत्र में कुछ बेहतर करें। इस क्षेत्र में हमें भारत से बहुत उम्मीद है।
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हेराथ ने खुलासा किया, अगली जनवरी की शुरुआत में हम संसद में एक अधिसूचना पारित करेंगे। इसमें भारत समेत 39 देशों को मुफ्त वीजा दिया जाएगा। इस कदम से भारत सहित अन्य देशों के पर्यटकों के लिए श्रीलंका की यात्रा करना आसान हो जाएगी।
'श्रीलंका में अतिरिक्त ऊर्जा उत्पादन की क्षमता, भारत को निर्यात कर सकता है'
श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिता हेराथ ने कहा कि उनका देश सरप्लस ऊर्जा उत्पादन की क्षमता रखता है। यदि नई ऊर्जा परियोजनाएं शुरू की जाती हैं, तो वह इसे भारत और अन्य पड़ोसी देशों को निर्यात कर सकता है। इससे सभी को लाभ मिलेगा। हेराथ ने कहा कि उन्होंने भारतीय कंपनियों से श्रीलंका के ऊर्जा क्षेत्र के विकास में भाग लेने का आग्रह किया है। कुछ ऊर्जा परियोजनाएं पहले से ही चल रही हैं, जबकि अन्य के लिए चर्चा चल रही है। श्रीलंका की ऊर्जा सुरक्षा में भारत की भूमिका पर सवाल पूछे जाने पर हेराथ ने कहा, हमारे पास पवन ऊर्जा और सौर ऊर्जा है। यदि हम नई ऊर्जा परियोजनाएं शुरू कर सकते हैं, तो हम भारत और अन्य सभी पड़ोसी देशों को निर्यात कर सकते हैं क्योंकि हमारे पास सरप्लस ऊर्जा उत्पादन करने की क्षमता है। इसलिए हम अपने ऊर्जा क्षेत्र को विकसित करने के लिए आपकी कंपनियों (भारतीय कंपनियों) के समर्थन के साथ खड़े हैं।
भारत और श्रीलंका के बीच संबंधों 2500 साल पुराना
द्विपक्षीय मोर्चे पर, हेराथ ने भारत और श्रीलंका के बीच मजबूत संबंधों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके की वर्तमान भारत यात्रा दोनों देशों के बीच घनिष्ठ संबंधों का प्रतीक है। उन्होंने कहा, भारत-श्रीलंका संबंध ऐतिहासिक, सभ्यतागत, धार्मिक और सांस्कृतिक संबंधों पर आधारित हैं। यह संबंध 2500 साल से भी अधिक पुराना है। उन्होंने कहा, भारत ने हमें बौद्ध धर्म का उपहार दिया है, जिसने दो सहस्राब्दी से भी अधिक समय पहले द्वीप में एक समृद्ध बौद्ध सभ्यता को जन्म दिया और लोगों के आवागमन और आपसी संबंधों के कारण हिंदू धर्म का प्रभाव हमारे सामाजिक-सांस्कृतिक ताने-बाने में समाहित हो गया। इन धर्मों के साथ-साथ श्रीलंका में साहित्य, भाषाएं, वास्तुकला, मूर्तिकला और कृषि अर्थव्यवस्था आदि का विकास हुआ।
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इंडिया फाउंडेशन प्रोग्राम में हेराथ ने कहा, 2018 से पहले हमारा पर्यटन क्षेत्र बहुत बड़ा था। मुझे याद है कि हमने चार अरब डॉलर (करीब 34 हजार करोड़ रुपये) सिर्फ पयर्टन से कमाए थे, लेकिन 2019 में ईस्टर संडे को, आईएस ने ग्रेटर कोलंबो क्षेत्र और बट्टिकलोआ में चार होटलों और तीन चर्चों में आत्मघाती बम विस्फोट किए। इस हमले में पांच अमेरिकियों सहित 260 से अधिक लोग मारे गए थे। इससे श्रीलंका का पयर्टन क्षेत्र चरमरा गया।
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हेराथ ने कहा कि अभी देश इससे उबर ही रहा था कि कोविड-19 बीमारी आ गई। इसके बाद, देश पर आर्थिक संकट गहरा गया। इन तीन कारकों के कारण, हमें बहुत सारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा, भविष्य को देखते हुए अब समय आ गया है कि हम अपने पयर्टन क्षेत्र में कुछ बेहतर करें। इस क्षेत्र में हमें भारत से बहुत उम्मीद है।
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हेराथ ने खुलासा किया, अगली जनवरी की शुरुआत में हम संसद में एक अधिसूचना पारित करेंगे। इसमें भारत समेत 39 देशों को मुफ्त वीजा दिया जाएगा। इस कदम से भारत सहित अन्य देशों के पर्यटकों के लिए श्रीलंका की यात्रा करना आसान हो जाएगी।
'श्रीलंका में अतिरिक्त ऊर्जा उत्पादन की क्षमता, भारत को निर्यात कर सकता है'
श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिता हेराथ ने कहा कि उनका देश सरप्लस ऊर्जा उत्पादन की क्षमता रखता है। यदि नई ऊर्जा परियोजनाएं शुरू की जाती हैं, तो वह इसे भारत और अन्य पड़ोसी देशों को निर्यात कर सकता है। इससे सभी को लाभ मिलेगा। हेराथ ने कहा कि उन्होंने भारतीय कंपनियों से श्रीलंका के ऊर्जा क्षेत्र के विकास में भाग लेने का आग्रह किया है। कुछ ऊर्जा परियोजनाएं पहले से ही चल रही हैं, जबकि अन्य के लिए चर्चा चल रही है। श्रीलंका की ऊर्जा सुरक्षा में भारत की भूमिका पर सवाल पूछे जाने पर हेराथ ने कहा, हमारे पास पवन ऊर्जा और सौर ऊर्जा है। यदि हम नई ऊर्जा परियोजनाएं शुरू कर सकते हैं, तो हम भारत और अन्य सभी पड़ोसी देशों को निर्यात कर सकते हैं क्योंकि हमारे पास सरप्लस ऊर्जा उत्पादन करने की क्षमता है। इसलिए हम अपने ऊर्जा क्षेत्र को विकसित करने के लिए आपकी कंपनियों (भारतीय कंपनियों) के समर्थन के साथ खड़े हैं।
भारत और श्रीलंका के बीच संबंधों 2500 साल पुराना
द्विपक्षीय मोर्चे पर, हेराथ ने भारत और श्रीलंका के बीच मजबूत संबंधों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके की वर्तमान भारत यात्रा दोनों देशों के बीच घनिष्ठ संबंधों का प्रतीक है। उन्होंने कहा, भारत-श्रीलंका संबंध ऐतिहासिक, सभ्यतागत, धार्मिक और सांस्कृतिक संबंधों पर आधारित हैं। यह संबंध 2500 साल से भी अधिक पुराना है। उन्होंने कहा, भारत ने हमें बौद्ध धर्म का उपहार दिया है, जिसने दो सहस्राब्दी से भी अधिक समय पहले द्वीप में एक समृद्ध बौद्ध सभ्यता को जन्म दिया और लोगों के आवागमन और आपसी संबंधों के कारण हिंदू धर्म का प्रभाव हमारे सामाजिक-सांस्कृतिक ताने-बाने में समाहित हो गया। इन धर्मों के साथ-साथ श्रीलंका में साहित्य, भाषाएं, वास्तुकला, मूर्तिकला और कृषि अर्थव्यवस्था आदि का विकास हुआ।