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One Nation-One Election: 'कम होगी संसाधनों की बर्बादी....', 'एक देश-एक चुनाव' पर श्री श्री रविशंकर का बयान

Tue, 17 Dec 2024 06:29 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 17 Dec 2024 06:29 PM IST
सार

One Nation-One Election: 'एक देश-एक चुनाव' का मुद्दा एक बार फिर चर्चाओं में है। इस बीच, आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह जवाबदेही तय करके, संसाधनों की बर्बादी को कम कर सकता है और नेतृत्व में भरोसे को बढ़ावा देकर समृद्ध भारत का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। 

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spiritual leader On Sri Sri Ravi Shankar ‘One Nation, One Election’
श्री श्री रविशंकर - फोटो : एएनआई

विस्तार

आध्यात्मिक गुरु और 'आर्ट ऑफ लिविंग' के संस्थापक श्री श्री रविशंकर ने मंगलवार को एक देश-एक चुनाव के मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, चुनाव किसी भी लोकतंत्र की आत्मा होते हैं। आलोचना करने, बयानबाजी करने और यहां तक कि कीचड़ उछालने का अधिकार चुनावी प्रक्रिया का एक स्वाभाविक हिस्सा है। हालांकि, ये प्रथाएं विवादित हो सकती हैं। फिर भी ये एक स्वस्थ और जागरूक लोकतंत्र की दिशा में योगदान कर सकती हैं। हालांकि, यह सुनिश्चित करने के लिए कि शासन सही तरीके से चले, चुनावी अभियान को एक निश्चित समय सीमा के भीतर ही सीमित किया जाना चाहिए। 

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उन्होंने कहा, बार-बार होने वाले चुनाव उम्मीदवारों को लगातार नए और अव्यवहारिक वादे करने, मुफ्त की आर्थिक सुविधाएं देने और केवल वोट हासिल करने के मकसद से लोकलुभावन नीतियां बनाने के लिए मजबूर करते हैं। इससे राजनेताओं में जनता का भरोसा कम हो जाता है, जिससे नेताओं को मिलने वाले सम्मान और प्रतिष्ठा में गिरावट आती है। मतदाता राजनेताओं को केवल चुनाव के दौरान ही दिखाई देने वाला समझने लगते हैं, जिससे भरोसे को और नुकसान पहुंचता है। ऐसे अल्पकालिक उपाय दीर्घकालिक विकास से समझौता करते हैं और राजकोषीय अस्थिरता को जन्म देते हैं। यह प्रवृत्ति किसी भी देश के लिए हानिकारक है। 
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'राजनेताओं को जनादेश को पूरा करने का मिलेगा पर्याप्त समय'
श्री श्री रविशंकर ने आगे कहा, 'एक देश-एक चुनाव' का दृष्टिकोण जवाबदेही तय करके, संसाधनों की बर्बादी को कम करके और नेतृत्व में भरोसे को बढ़ावा देकर अधिक कुशल और समृद्ध भारत का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। एक साथ चुनाव कराने से नेताओं के पास लगातार चुनावी गतिविधियों में लगे रहने के बजाय विकास के मुद्दों पर फोकस करने और अपने जनादेश को पूरा करने के लिए पर्याप्त समय होगा।
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