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राहत: कारोबारी समीर मोदी के खिलाफ कथित कर चोरी मामले में जारी लुक आउट सर्कुलर को विशेष आयकर कोर्ट ने किया निलंबित
Thu, 23 Dec 2021 03:23 AM IST
देव कश्यप
एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Thu, 23 Dec 2021 03:23 AM IST
सार
विशेष आयकर अदालत ने समीर मोदी से देश छोड़ने से पहले अदालत की अनुमति लेने और अंतरराष्ट्रीय पते और मोबाइल नंबर सहित सभी पते साझा करने को कहा है।
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व्यवसायी समीर मोदी
- फोटो : Twitter@samirmodi
विस्तार
केके मोदी ग्रुप के कार्यकारी निदेशक व्यवसायी समीर मोदी को विशेष आयकर न्यायालय से बुधवार को बड़ी राहत मिली। विशेष आयकर न्यायालय ने 1.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 90.5 अरब रुपये) के मोदी समूह के संरक्षक व्यवसायी समीर मोदी के खिलाफ कथित कर चोरी और अघोषित विदेशी संपत्ति रखने के लिए आयकर विभाग द्वारा जारी लुक आउट सर्कुलर (एलओसी) को निलंबित कर दिया।
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हालांकि अदालत ने मोदी से देश छोड़ने से पहले अदालत की अनुमति लेने और अंतरराष्ट्रीय पते और मोबाइल नंबर सहित सभी पते साझा करने को कहा है। विशेष न्यायाधीश ने इन तथ्यों पर विचार किया कि समीर मोदी के खिलाफ कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं है, इसलिए समीर मोदी के न्याय से भागने की कोई संभावना नहीं है और वह बार-बार जांच में शामिल हुए हैं। इसके बाद जारी किए गए लुकआउट सर्कुलर को रद्द कर दिया।
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22 नवंबर को, मोदी एक आधिकारिक सीएसीसीआई (एशिया-पैसिफिक चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री) की बैठक के लिए दुबई की यात्रा के दौरान दिल्ली हवाई अड्डे पर आयकर विभाग द्वारा जारी एलओसी के आधार पर पकड़े गए थे। इसके बाद मोदी ने अपने अधिवक्ता विजय अग्रवाल, रिदम अग्रवाल और हार्दिक शर्मा के माध्यम से उक्त लुकआउट सर्कुलर को विशेष आयकर न्यायालय में चुनौती दी थी।
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मोदी की ओर से पेश हुए वकील विजय अग्रवाल ने विशेष अदालत के समक्ष तर्क दिया कि उनके मुवक्किल के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी करना मनमाने तरीके से की गई कार्रवाई है और यह ऑडी अल्टरम पार्टेम (निष्पक्ष सुनवाई के लिए पार्टी का अधिकार) के सिद्धांत का पूर्ण उल्लंघन है। उन्होंने आगे तर्क दिया कि उनका मुवक्किल इस देश का एक सम्मानित नागरिक हैं और साथ ही सीएसीसीआई के वर्तमान अध्यक्ष और फिक्की के कार्यकारी सदस्य हैं। इस प्रकार वर्तमान एलओसी जारी करने से, एजेंसी के अन्यायपूर्ण और मनमाने कार्य से उनकी प्रतिष्ठा धूमिल हुई है।
उन्होंने आगे कहा कि एलओसी जारी करना गैर-जमानती वारंट की तरह है जो भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत निहित स्वतंत्र रूप से स्थानांतरित करने और विदेश यात्रा करने के संवैधानिक अधिकारों को सीधे प्रभावित करता है। आयकर विभाग की ओर से पेश हुए विशेष लोक अभियोजक ने तर्क दिया कि मोदी के खिलाफ एक बड़ी कर देनदारी लंबित है और उन्होंने विभाग की ओर से जारी समन से परहेज किया है।
एजेंसी की ओर से पेश होने वाले अभियोजक ने आगे तर्क दिया कि मोदी और उनके परिवार के पास विदेशी कंपनियों में शेयर हैं और आगे माल्टा में नागरिकता के लिए आवेदन कर रहे हैं और इस तरह इस बात की गंभीर आशंका है कि मोदी न्याय प्रक्रिया से भाग सकते हैं। इसके अलावा, एजेंसी द्वारा यह तर्क दिया गया कि मोदी पर भी काला धन अधिनियम के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है क्योंकि उन्होंने अपनी विदेशी संपत्ति का खुलासा नहीं किया है।