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MSCB Case: अदालत ने एमएससीबी धनशोधन मामले में दायर आरोप पत्र पर लिया संज्ञान, अजित पवार को लेकर कही बड़ी बात

Thu, 06 Jul 2023 01:07 PM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: Jeet Kumar Updated Thu, 06 Jul 2023 01:07 PM IST
सार

एक विशेष अदालत ने महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी द्वारा दायर आरोप पत्र पर संज्ञान लिया।

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special court took cognizance of the charge sheet filed in the MSCB money laundering case
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भले ही महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) नेता और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की चर्चा हों लेकिन एक विशेष अदालत ने अजित पवार से जुड़े महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी द्वारा दायर आरोप पत्र पर संज्ञान लिया। इसको लेकर अदालत ने कहा कि एक चीनी सहकारी समिति की संपत्ति को अजित पवार के करीबी सहयोगियों ने औने-पौने दामों पर हासिल कर लिया था। ईडी ने पांच अप्रैल को महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक (MSCB) मामले में आरोप पत्र दायर किया था।

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विशेष न्यायाधीश एम जी देशपांडे ने बुधवार को आरोप पत्र और उसके साथ प्रस्तुत दस्तावेजों के साथ गवाहों के बयानों को देखने के बाद टिप्पणी की। जज ने कहा कि यह आपराधिक गतिविधि से अपराध की आय उत्पन्न करने का एक अच्छा उदाहरण है। यह धन शोधन निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत एक अपराध है। 
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अदालत ने सभी आरोपियों को 19 जुलाई को स्वयं या अपने वकील के माध्यम से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया है। साथ ही अदालत ने कहा कि सभी आरोपियों के खिलाफ समन जारी करने का निर्देश देने के लिए हमारे पास ठोस आधार हैं। 
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस साल अप्रैल में तीन आरोपियों गुरु कमोडिटी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, जरांदेश्वर शुगर मिल्स प्राइवेट लिमिटेड और चार्टर्ड अकाउंटेंट योगेश बागरेचा के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था। इस मामले में अजित पवार को आरोपी नहीं बनाया गया है। विशेष अदालत ने बागरेचा सहित दोनों कंपनियों को उनके तत्कालीन और वर्तमान निदेशकों के माध्यम से समन जारी किया।

अदालत ने कहा कि अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार 2004-2008 तक आरोपी कंपनी के निदेशकों में से एक थीं। इसमें कहा गया है कि सुनेत्रा पवार एमएससीबी के निदेशक मंडल की पूर्व सदस्य थीं। अदालत ने कहा, सभी आरोपी कंपनियां एक ही समूह से हैं और उनके निदेशक समान हैं। 

यह मामला सहकारी साखर खरखाना (सहकारी चीनी मिलें) और सहकारी सूत गिरनिस में कथित घोटाले से संबंधित है। आरोप यह है कि आरोपी व्यक्तियों ने एमएससीबी और जिला केंद्रीय सहकारी बैंक को सौंपी गई संपत्तियों की अवैध मंजूरी और वितरण, अवैध बिक्री के लिए आपराधिक साजिश रची। उस समय अजित पवार महाराष्ट्र के वित्त मंत्री थे। 


बैंक में कथित अनियमितताओं को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर होने के बाद मामले की जांच शुरू की गई थी। मामला आर्थिक अपराध शाखा द्वारा दर्ज किया गया था जिसके बाद ईडी ने भी 2019 में कथित मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था।

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