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मानसून सत्र: लोकसभा में बिना मास्क हंगामा कर रहे सांसदों को स्पीकर की फटकार
Sat, 24 Jul 2021 02:53 AM IST
Jeet Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Sat, 24 Jul 2021 02:53 AM IST
सार
प्रश्नकाल के दौरान स्पीकर ने कहा कि हंगामे के दौरान सांसद न तो सामाजिक दूरी की परवाह कर रहे हैं और कई ने तो मास्क भी नहीं लगा रखे हैं। यह अस्वीकार्य व्यवहार है। उन्होंने कहा कि पूरा देश हमें देख रहा है। इससे संसद की छवि खराब हो रही है।
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लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
लोकसभा में शुक्रवार को हंगामे के दौरान मास्क का प्रयोग न करने पर स्पीकर ओम बिरला ने विपक्षी सांसदों को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने हंगामा कर रहे सांसदों से पूछा कि कोरोना प्रोटोकॉल का देश की सबसे बड़ी पंचायत में उल्लंघन कर वह किस तरह का संदेश देना चाह रहे हैं।
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दरअसल, सुबह 11 बजे जैसे ही सत्र शुरू हुआ, कुछ विपक्षी दल कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल के नेता वेल के पास जमा हो गए, मगर उन्हें ऐसा करने से रोक दिया गया। उस वक्त स्पीकर ओम बिरला टोक्यो ओलंपिक में हिस्सा लेने वाले भारतीय खिलाड़ियों को सदन की ओर से शुभकामनाएं देने जा रहे थे।
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स्पीकर ने टीकाकरण के जुड़े सवाल पर हंगामा जारी रहने पर निराशा और नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, पूरा देश जानना चाह रहा है कि कोरोना के खिलाफ टीकाकरण अभियान के बारे में सरकार क्या करने जा रही है।
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विपक्ष ने भी टीकाकरण पर कई सवाल उठाए हैं। उनके सामने सरकार के पास अपने सवाल रखने का अवसर है। विपक्ष के सदस्य सरकार से सवाल कर सकते हैं। स्पीकर ने यह भी कहा कि मैं पहले दिन से ही कह रहा हूं कि सदन में सभी विषयों पर चर्चा होगी। संसद हंगामा करने की नहीं, बल्कि चर्चा करने की जगह है।
टीकाकरण पर सहयोग करें राजनीति नहीं: मंडाविया
लोकसभा में स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने कोरोना के खिलाफ जारी टीकाकरण अभियान मामले में विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, कोरोना वैश्विक महामारी और चुनौती है। इसका एकमात्र समाधान टीकाकरण ही है। ऐसे में विपक्ष इस मामले में राजनीति करने के बदले सरकार को सहयोग दे।
एक सवाल के जवाब में मंडाविया ने कहा, सरकार की योजना इस साल तक शत-प्रतिशत टीकाकरण को अंजाम देने की है। इसके लिए सरकार को सभी पक्षों से सहयोग की जरूरत है। मुश्किल यह है विपक्ष टीकाकरण अभियान में सहयोग करने के बदले इसके बारे में भ्रम फैलाने में अधिक दिलचस्पी ले रहा है।
मंडाविया ने कहा, कोरोना के मोर्चे पर विपक्ष ने कई बार राज्यों के अधिकारों का हनन करने का आरोप लगाया। विदेशों से खुद टीका खरीदने की अनुमति देने की मांग की। केंद्र सरकार ने राज्यों को इस आशय का अधिकार दिया।
इसी प्रकार कोरोना से निपटने के लिए भी विपक्षों के आरोपों के बाद राज्यों को अधिक अधिकार दिए गए। टीकाकरण अभियान में भी ऐसा ही हुआ। मगर, दूसरी लहर और उसके बाद दिखा कि कई राज्यों में स्थिति बदतर हो गई।
डाटा संरक्षण बिल पर अब शीतकालीन सत्र में रिपोर्ट देगी समिति
डाटा संरक्षण के मामले में कानून के लिए अभी और इंतजार करना होगा। शुक्रवार को वैयक्तिक डाटा संरक्षण बिल पर बनी संसद की संयुक्त समिति (जेपीसी) को रिपोर्ट सौंपने के लिए अब शीतकालीन सत्र तक का समय मिल गया है।
शुक्रवार को लोकसभा में भाजपा सांसद पीपी चौधरी ने जेपीसी को रिपोर्ट सौंपने के लिए शीतकालीन सत्र तक के लिए विस्तार देने संबंधी प्रस्ताव रखा। विपक्ष के भारी हंगामे के बीच इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया गया। 2019 में लोगों से जुड़े डाटा के संरक्षण के कानूनी उपाय संबंधी सुझाव देने के लिए जेपीसी का गठन किया गया था।
थरूर बोले जांच की घोषणा करे सरकार
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि जासूसी मामले से साफ हो गया है कि देश का लोकतंत्र खतरे में है। सच्चाई सामने लाने के लिए निष्पक्ष जांच जरूरी है। सरकार को चाहिए कि वह सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान जज से जासूसी कांड की जांच की घोषणा करे। थरूर ने गृहमंत्री अमित शाह के इस्तीफे की भी मांग की।