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SC: निगरानी में होने वाले हर अपराध के लिए एसपी-कमांडेंट जिम्मेदार नहीं, 82 वर्ष की उम्र में मिला न्याय
Fri, 14 Apr 2023 05:20 AM IST
गुलाम अहमद
राजीव सिन्हा
राजीव सिन्हा
Published by: गुलाम अहमद
Updated Fri, 14 Apr 2023 05:20 AM IST
सार
जस्टिस कृष्णा मुरारी की पीठ ने राष्ट्रपति पदक से सम्मानित बीएसएफ कमांडेंट बीएस हरि (82) को दी गई 10 साल की सजा को रद्द कर दिया। उन्हें यह सजा फिरोजपुर सीमा पर एसिटिक एनहाइड्राइड (प्रतिबंधित सामग्री) की बरामदगी के मामले में हुई थी।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी पुलिस अधीक्षक (एसपी) या सुरक्षा बल के कमांडेंट को ठोस आधार के बगैर उसकी निगरानी और नियंत्रण वाले क्षेत्र के हर अपराध या भूल के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। यह कर्तव्य के निर्वहन के सिद्धांत का चरम व बेतुका विस्तार होगा। जस्टिस कृष्णा मुरारी की पीठ ने राष्ट्रपति पदक से सम्मानित बीएसएफ कमांडेंट बीएस हरि (82) को दी गई 10 साल की सजा को रद्द कर दिया। उन्हें यह सजा फिरोजपुर सीमा पर एसिटिक एनहाइड्राइड (प्रतिबंधित सामग्री) की बरामदगी के मामले में हुई थी।
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पीठ ने 12 सप्ताह के भीतर उन्हें सेवानिवृत्ति से अब तक के पूर्ण लाभों का भुगतान करने का भी निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि यह नहीं समझा जाना चाहिए कि अपीलकर्ता, कमांडेंट होने के नाते, इस तरह की घटना को रोकने के लिए कोई जिम्मेदारी या कर्तव्य नहीं रखता, लेकिन उसे एक सक्रिय भागीदार या ऐसे अपराध के सूत्रधार के रूप में लेबल करने की हद तक फैलाना पूरी तरह से अनुचित है।
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आनुपातिकता का सिद्धांत अहम
पीठ की ओर से फैसला लिखने वाले जस्टिस अमानुल्लाह ने कहा, हम इस बात से सचेत हैं कि भारत के सशस्त्र बलों (अर्धसैनिक बलों समेत) में अत्यधिक अनुशासन, कमांड की एकता अनिवार्य हैं। आनुपातिकता का सिद्धांत अब भी मायने रखता है।
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एक व्यक्ति के बयान पर दोषसिद्धि नहीं
पीठ ने कहा, 1995 में हुई घटना में एक सूबेदार के बयान को छोड़कर अपीलकर्ता के खिलाफ कोई सामग्री नहीं थी। अकेले एक व्यक्ति के बयान से, इस मामले में उसकी दोषसिद्धि नहीं होनी चाहिए।