संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में खुलासा, दक्षिण सूडान में 'वेतन के बदले रेप की इजाजत'
- सेना को खुली छूट
- संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में खुलासा
- 5 साल पहले ही आजाद हुआ देश
- उठा ले जाते हैं जनता की संपत्ति
विस्तार
संयुक्त राष्ट्र ने बताया कि सेना आम लोगों की हत्याएं और बलात्कार करती है जो युद्ध अपराध के बराबर है। वहीं दक्षिणी सूडान की सरकार ने इन आरोपों से इनकार किया है कि उसकी सेना आम लोगों को निशाना बनाती है, लेकिन उसका कहना है कि इस मामले में जांच हो रही है।
राष्ट्रपति सल्वा कीर के एक प्रवक्ता एटेनी वे एटेनी ने बीबीसी को बताया, "हम नियमों के अनुसार काम करते हैं।" संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया है कि लड़ाके 'जो कर सकते हो करो, जो ले जा सकते हो ले जाओ' समझौते के तहत काम करते हैं और यही समझौता उन्हें वेतन के बदले महिलाओं और लड़कियों को साथ ले जाने और उनका बलात्कार करने की इजाजत देता है।
कंटेनर में दमघोंट दिया गया
रिपोर्ट के मुताबिक लड़ाके आम लोगों के मवेशी और निजी संपत्ति भी ले जाते हैं। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार आयुक्त जैद राद अल हुसैन का कहना है कि दक्षिणी सूडान में जितने बड़े पैमाने पर यौन हिंसा होती है वो दुनिया में सबसे जघन्य मानवाधिकारों के हनन में शामिल है। एक महिला ने बताया कि उसकी आंखों से सामने उनके पति को मौत के घाट उतार दिया गया और फिर उनकी 15 साल की बेटी के साथ 10 सैनिकों ने बलात्कार किया।
वहीं एमनेस्टी की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 60 से ज्यादा लड़कों और पुरुषों का सरकारी बलों के एक कंटेनर में दमघोंट दिया गया। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि सरकारी बल और उनसे जुड़े लड़ाके लड़कियों का सामूहिक बलात्कार करते हैं और आम लोगों को टुकड़ों में काट देते हैं। रिपोर्ट में विरोधी लड़ाकों पर भी मानवाधिकार के हनन के आरोप लगाए गए हैं।
दक्षिणी सूडान में दिसंबर 2013 में गृह युद्ध शुरू हुआ जब राष्ट्रपति कीर ने अपने उपराष्ट्रपति रीक माशर को पद से हटा दिया था और उन पर तख्तापलट की कोशिशों करने का आरोप लगाया। माशर ने इन आरोपों से इनकार किया लेकिन तभी से उन्होंने सरकार से लड़ने के लिए एक विद्रोही सेना बना ली। तब से दोनों गुटों के संघर्ष में दसियों हजार लोग मारे गए हैं और बीस लाख से ज्यादा लोग बेघर हो गए हैं।