दक्षिण कश्मीर के चार जिलों में आतंकियों का दबदबा, इन्हीं इलाकों में हिंसक घटनाएं
सत्ताधारी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के वर्चस्व वाले दक्षिण कश्मीर के दूरदराज इलाकों में लश्कर-ए-ताइबा और हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादी बड़ी संख्या में छुपे बैठे हैं। खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों ने दक्षिण कश्मीर के चार जिलों अनंतनाग, शोपियां, कुलगाम और बडगांव के उन जगहों की मैपिंग की है जहां इन आतंकवादियों ने शरण ले रखी है।
दो दिन पहले इन चार जिलों मेें सेना की तैनाती का मुख्य मकसद इन इलाकों को आतंकवादियों से मुक्त कराना है। गृहमंत्री राजनाथ सिंह और सेना प्रमुख जनरल दलबीर सिंह के बीच हुई बातचीत में इस ऑपरेशन के बाबत अहम फैसले किए गए हैं।
एजेंसियों की खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दो महीने से इन्हीं इलाकों में पत्थरबाजी और हिंसा की सबसे ज्यादा घटनाएं हुई हैं। इन इलाकों में युवक हीं नहीं, बच्चे और महिलाएं भी हिंसक प्रदर्शन का हिस्सा बन रहे हैं।
इन इलाकों में आतंकियों की गहरी पैठ
उच्च पदस्थ सरकारी सूत्रों ने अमर उजाला को बताया कि सेना शुरू में कानून व्यवस्था में हाथ डालने से बच रही थी। लेकिन हालिया रिपोर्ट के बाद इन इलाकों को आतंकवादियों से मुक्त कराने की जिम्मेदारी सेना को दी गई। मामले की संवेदनशीलता और जटिलता के मद्देनजर जनरल दलबीर सिंह ने खुद घाटी जाकर इस ऑपरेशन से जुड़े अधिकारियों को निर्देश दिए।
सूत्रों के मुताबिक एजेंसियों ने गौर किया कि इस बार सिर्फ दक्षिण कश्मीर के गांवों और कस्बों में ज्यादा प्रदर्शन हो रहे हैं। पहले ऐसा प्रदर्शन श्रीनगर जैसे शहरी इलाकों में होता था। इलाके से मिली खुफिया जानकारी से पता चला कि लश्कर और हिजबुल आतंकियों ने इन इलाकों में अपनी गहरी पैठ बना रखी है।
इनमें सबसे गंभीर हालत कुलगाम और शोपियां की है। एजेंसियों को यह भी आशंका है कि आतंकियों के प्रभाव और डर के चलते गांव के लोग सरकार के खिलाफ हो रहे हैं। गौरतलब है कि यह इलाका महबूबा मुफ्ती के पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद के प्रभाव वाला है। इन्हीं जिलों से पीडीपी के विधायक जीत कर गए हैं। अनंतनाग में हुए उप चुनाव में लोगों ने महबूबा को भारी मतों से जिताया था।