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अब भोजपुरी, मगही, मैथिली में भी होगा ऑनलाइन अनुवाद
अमर उजाला ब्यूरो/ वाराणसी
Updated Wed, 19 Oct 2016 02:17 AM IST
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हिंदी से भोजपुरी, मगही और मैथिली का ऑनलाइन अनुवाद जल्द संभव होगा। ट्रांसलेटर तैयार करने के प्रोजेक्ट पर आईआईटी बीएचयू और काशी हिंदू विश्वविद्यालय मिलकर काम कर रहे हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक क्षेत्रीय भाषाओं के अनुवाद के लिए यह अपनी तरह का पहला मशीनी ट्रांसलेटर होगा। एक साल में इस कार्य को पूरा किए जाने का लक्ष्य है।
आईआईटी के डॉ. अनिल कुमार सिंह के निर्देशन में ‘प्रोजेक्ट वाराणसी’ के तहत ट्रांसलेटर विकसित करने का काम हो रहा है। बीएचयू के भाषा विज्ञान विभाग ने इसके लिए लैंग्वेज रिसोर्स तैयार किया है, जबकि आईआईटी बीएचयू के कंप्यूटर विज्ञान व इंजीनियरिंग विभाग ने टूल्स व सॉफ्टवेयर तैयार किया है। प्रोजेक्ट का पहला चरण पूरा हो चुका है। परीक्षण में कुछ कमियां पाई गई हैं जिनको दूर करने का काम चल रहा है।
आईआईटी बीएचयू के निदेशक प्रो. राजीव संगल ने क्षेत्रीय भाषाओं के संवर्धन के लिए इस प्रोजेक्ट को शुरू किया है। इससे भोजपुरी, मगही और मैथिली में उपलब्ध साहित्य को ऑनलाइन किया जा सकेगा और इन्हें डिजिटल रूप में सहेजा जा सकेगा। भोजपुरी चूंकि पूर्वांचल की प्रमुख भाषा है, इसलिए प्रो. संगल ने इस पर काम करने का मन बनाया। प्रो. संगल के मुताबिक, ‘‘अब तक मगही और मैथिली पर कोई काम नहीं हुआ है, ये हमारी क्षेत्रीय भाषाएं भी हैं, इसलिए इनके साहित्य को सहेजने की जरूरत है।’’ प्रोजेक्ट में कंप्यूटर साइंस व इंजीनियरिंग विभाग की डॉ. स्वस्ति मिश्रा और भाषा विज्ञान विभाग की डॉ. संजुक्ता घोष सहयोग दे रही हैं।
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आईआईटी बीएचयू के कंप्यूटर साइंस व इंजीनियरिंग विभाग के असि. प्रो., डॉ. अनिल कुमार सिंह ने बताया, 'हमारा सॉफ्टवेयर गूगल ट्रांसलेटर की तरह ही काम करेगा। भोजपुरी, मगही और मैथिली भाषा के रिसोर्स तैयार हैं। भोजपुरी का सिस्टम तैयार किया जा चुका है। मगही व मैथिली का सिस्टम विकसित करने पर काम बाद में शुरू किया जाएगा। प्रोजेक्ट में आईआईआईटी हैदराबाद भी सहयोग कर रहा है।’
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आईआईटी के डॉ. अनिल कुमार सिंह के निर्देशन में ‘प्रोजेक्ट वाराणसी’ के तहत ट्रांसलेटर विकसित करने का काम हो रहा है। बीएचयू के भाषा विज्ञान विभाग ने इसके लिए लैंग्वेज रिसोर्स तैयार किया है, जबकि आईआईटी बीएचयू के कंप्यूटर विज्ञान व इंजीनियरिंग विभाग ने टूल्स व सॉफ्टवेयर तैयार किया है। प्रोजेक्ट का पहला चरण पूरा हो चुका है। परीक्षण में कुछ कमियां पाई गई हैं जिनको दूर करने का काम चल रहा है।
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आईआईटी बीएचयू के निदेशक प्रो. राजीव संगल ने क्षेत्रीय भाषाओं के संवर्धन के लिए इस प्रोजेक्ट को शुरू किया है। इससे भोजपुरी, मगही और मैथिली में उपलब्ध साहित्य को ऑनलाइन किया जा सकेगा और इन्हें डिजिटल रूप में सहेजा जा सकेगा। भोजपुरी चूंकि पूर्वांचल की प्रमुख भाषा है, इसलिए प्रो. संगल ने इस पर काम करने का मन बनाया। प्रो. संगल के मुताबिक, ‘‘अब तक मगही और मैथिली पर कोई काम नहीं हुआ है, ये हमारी क्षेत्रीय भाषाएं भी हैं, इसलिए इनके साहित्य को सहेजने की जरूरत है।’’ प्रोजेक्ट में कंप्यूटर साइंस व इंजीनियरिंग विभाग की डॉ. स्वस्ति मिश्रा और भाषा विज्ञान विभाग की डॉ. संजुक्ता घोष सहयोग दे रही हैं।
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आईआईटी बीएचयू के कंप्यूटर साइंस व इंजीनियरिंग विभाग के असि. प्रो., डॉ. अनिल कुमार सिंह ने बताया, 'हमारा सॉफ्टवेयर गूगल ट्रांसलेटर की तरह ही काम करेगा। भोजपुरी, मगही और मैथिली भाषा के रिसोर्स तैयार हैं। भोजपुरी का सिस्टम तैयार किया जा चुका है। मगही व मैथिली का सिस्टम विकसित करने पर काम बाद में शुरू किया जाएगा। प्रोजेक्ट में आईआईआईटी हैदराबाद भी सहयोग कर रहा है।’