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गुजरात के सोमनाथ में नॉन-वेज पर बैन: दुकानदारों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, क्या है पूरा मामला?

Fri, 16 Oct 2026 10:38 PM IST
राकेश कुमार पीटीआई, अहमदाबाद।
पीटीआई, अहमदाबाद। Published by: राकेश कुमार Updated Fri, 16 Oct 2026 10:38 PM IST
सार

सोमनाथ मंदिर के 500 मीटर के दायरे और धार्मिक स्थलों के पास राज्य सरकार ने आस्था का हवाला देकर नॉन-वेज बिक्री पर स्थायी बैन लगाया है। इसके जवाब में छह रेस्टोरेंट मालिकों ने आजीविका के अधिकार की दुहाई देते हुए गुजरात हाईकोर्ट में गुहार लगाई है और पुलिस पर जबरन दबाव बनाने के आरोप लगाए हैं। जस्टिस निशा एम. ठाकोर की पीठ इस मामले पर 19 अक्तूबर को अगली सुनवाई करेगी।

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somnath non veg food ban eatery owners challenge gujarat high court
गुजरात हाईकोर्ट - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

गुजरात के प्रसिद्ध तीर्थस्थल सोमनाथ में मांसाहारी भोजन की बिक्री और उसके भंडारण पर लगे बैन का विवाद अब अदालत पहुंच गया है। राज्य सरकार के इस फैसले के खिलाफ स्थानीय रेस्टोरेंट मालिकों ने गुजरात हाईकोर्ट का रुख किया है। उनका कहना है कि इस फैसले से उनकी रोजी-रोटी छिन गई है, जो संविधान में मिले बुनियादी अधिकारों का सीधा उल्लंघन है।
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गुजरात सरकार का फरमान और प्रतिबंध की वजह
गुजरात सरकार ने इस साल अगस्त में एक अधिसूचना जारी कर सोमनाथ के प्रमुख क्षेत्रों में नॉन-वेज खाने की बिक्री और भंडारण पर स्थायी रूप से रोक लगा दी है। सरकार ने इसके लिए कुल छह क्षेत्रों को प्रतिबंधित ज़ोन घोषित किया है, जिससे वहां आने वाले श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत न हों। इस पाबंदी के दायरे में खासतौर पर प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर का 500 मीटर का दायरा और अन्य धार्मिक महत्व वाले आसपास के क्षेत्र शामिल किए गए हैं।
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दुकानदारों की याचिका और हाईकोर्ट में चुनौतियां
छह रेस्टोरेंट मालिकों ने गुजरात हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि प्रशासन ने बिना किसी ठोस वजह के उन्हें अपनी दुकानें बंद करने पर मजबूर किया है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि सरकार का यह कदम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) के तहत मिले व्यापार और आजीविका चलाने के मौलिक अधिकार का हनन करता है। रेस्टोरेंट मालिकों के एडवोकेट असरार मंसूरी ने कोर्ट में यह आरोप भी लगाया कि पुलिस चौकी में मामलतदार द्वारा एक याचिकाकर्ता से जबरन कबूलनामा लिखवाया गया कि वह भविष्य में केवल शाकाहारी खाना ही बेचेगा।
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अदालत की कार्यवाही और अगली सुनवाई
इस याचिका को गुजरात हाईकोर्ट की जस्टिस निशा एम. ठाकोर की अदालत में पेश किया गया है, जहां मामले की शुरुआती सुनवाई हो चुकी है। याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि अधिकारी उन्हें बिना किसी वैध कारण के अपना कारोबार करने से रोक रहे हैं और उन्हें दुकानें बंद करने के लिए विवश किया जा रहा है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस याचिका पर अगली सुनवाई के लिए 19 अक्टूबर की तारीख तय की है।
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