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Hindi News ›   India News ›   CRPF personnel Ranks Proposal Lance Naik and Naik ranks in the suggestions to be submitted within 48 hours

अफसरों के पद: CRPF में 'लांस नायक', 'नायक' रैंक को दोबारा शुरू करने का प्रस्ताव, 48 घंटे में देने होंगे सुझाव

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Sat, 17 Oct 2026 01:42 AM IST
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CRPF personnel Ranks  Proposal Lance Naik and Naik ranks in the  suggestions to be submitted within 48 hours
आर्मी की तर्ज पर रैंकिंग की तैयारी - फोटो : एजेंसी-अमर उजाला ग्राफिक्स

देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' में सिपाही के रैंक में पदोन्नति के अवसर बढ़ें, अनुशासन, जिम्मेदारी, सम्मान और मनोबल में वृद्धि हो, इसके लिए अब दोबारा से 'लांस नायक' और 'नायक' रैंक शुरू करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। सीआरपीएफ महानिदेशालय ने प्रस्ताव तैयार कर उसे बल की सभी यूनिटों में भेजा है। संबंधित रैंक यानी सिपाही और हवलदार, इस बाबत 48 घंटे में अपने सुझाव हेडक्वार्टर को भेजेंगे। शुक्रवार को बल की सभी यूनिटों में भेजे गए प्रस्ताव को सैनिक सम्मेलन, बैठकें और रोल कॉल आदि में जवानों के समक्ष रखा जाएगा।

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बता दें कि 'लांस' नायक और 'नायक' के रैंक का प्रचलन फिलहाल भारतीय सेना में है। करीब तीन दशक पहले सीआरपीएफ में भी ये रैंक होता था, लेकिन केंद्रीय गृह मंत्रालय की मंजूरी से 10 अक्तूबर 1997 को सीआरपीएफ से लांस नायक और नायक के पदों का सिपाही और हवलदार में विलय कर दिया गया था। इसके बाद सिपाही के लिए पदोन्नति का रास्ता लंबा होता चला गया।
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मौजूदा समय में सिपाही को करीब 20 से 22 साल में पहली पदोन्नति यानी हवलदार का पद मिलता है। पदोन्नति में आए ठहराव के चलते सिपाही के पद से वीआरएस लेने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। सिपाही (जीडी) के रैंक में पदोन्नति के अवसर बढ़ाने के लिए अब दोबारा से लांस नायक और नायक के रैंकों को प्रारंभ करने के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए बल की सभी यूनिटों में संबंधित रैंकों से सुझाव मांगे गए हैं। सीआरपीएफ में जनरल ड्यूटी (जीडी) कैडर के लिए व्यावसायिकता, प्रेरणा और अनुशासन को बढ़ाने के लिए 'एड-हॉक' (अस्थायी) आधार पर मध्यवर्ती रैंकों (लांस नायक और नायक) को फिर से शुरू करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
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देश के प्रमुख आंतरिक सुरक्षा संगठन के रूप में, सीआरपीएफ जवान अत्यंत कठिन, उच्च जोखिम वाले और संवेदनशील वातावरण में काम करते हैं। इसमें जम्मू-कश्मीर में उग्रवाद-विरोधी अभियान, दूर-दराज के जंगलों में नक्सल-विरोधी अभियान और पूरे देश में कानून-व्यवस्था बनाए रखने तथा चुनाव के दौरान तैनाती जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं।

लांस नायक और नायक जैसे मध्यवर्ती 'नॉन-कमीशंड ऑफिसर' (एनसीओ) रैंकों को समाप्त किए जाने के कारण, जनरल ड्यूटी (जीडी) कैडर के भीतर संगठनात्मक स्तर पर एक गंभीर गतिरोध पैदा हो गया है। वर्तमान व्यवस्था के तहत, एक कांस्टेबल/जीडी को अपना पहला ऑपरेशनल प्रमोशन (हेड कांस्टेबल/जीडी के पद पर) पाने में लगभग 20 से 22 साल लग जाते हैं। दो दशकों से भी अधिक समय तक शुरुआती रैंक पर ही अटके रहने के कारण, मानव संसाधन से जुड़ी कई गंभीर चुनौतियां सामने आई हैं। 

स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति और बल को छोड़ने की उच्च दर: 

  • करियर में कोई प्रगति न होने से निराशा पैदा होती है, जिसके कारण अनुभवी कर्मी अपने सबसे सक्रिय वर्षों के दौरान ही सेवा छोड़ देते हैं।

मनोबल में कमी और मानसिक थकान: 

  • उचित पहचान या सराहना न मिलने से करियर में 'बर्नआउट' (अत्यधिक थकान और हताशा) की स्थिति बन जाती है, खासकर उन जवानों के बीच जो अग्रिम 'कंपनी ऑपरेटिंग बेस' (सीओबी) पर तैनात हैं। 

सामरिक नेतृत्व की कमी:

  • सेक्शन-स्तर के उप-कमांडरों की अनुपस्थिति के कारण, फील्ड मूवमेंट और युद्ध जैसी स्थितियों में सामरिक नियंत्रण कमजोर पड़ जाता है।

ये है प्रस्तावित समय-बद्ध कैडर संरचना
करियर में उचित प्रगति को बहाल करने और एक प्रभावी सामरिक कमान संरचना स्थापित करने के लिए, विशेष रूप से सीआरपीएफ जीडी कर्मियों के लिए समय-बद्ध 'एड-हॉक' (अस्थायी/विशेष) रैंक प्रगति का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसके तहत सिपाही को पांच साल में पहली पदोन्नति मिलेगी। वह पद लांस नायक का होगा। 

  • दस साल में लांस नायक को नायक की पदोन्नति मिलेगी। इसके बाद 15 साल में हवलदार का पद मिलेगा। 

क्या है उक्त रैंकों का मकसद

सेक्शन-स्तर की कमान को मजबूत करना:

  • जंगल युद्ध, काउंटर-असाल्ट ऑपरेशंस और शहरी क्षेत्रों में क्यूआरटी तैनाती के दौरान, सीआरपीएफ सेक्शन को छोटे स्तर के कमांडरों की आवश्यकता होती है। लांस नायक और नायक रैंक शुरू करने से तुरंत सामरिक स्तर के उप-नेता (जैसे स्काउट लीडर, रियर गार्ड कमांडर, फायर ग्रुप लीडर) मिल जाते हैं।

वरिष्ठता और जवाबदेही का स्पष्ट निर्धारण: 

  • वर्तमान में, एक साल की सेवा वाले कांस्टेबल और 20 साल की सेवा वाले कांस्टेबल एक जैसे ही बैज लगाते हैं। लांस नायक और नायक रैंक देने से कैंप, गार्ड ड्यूटी और कॉम्बैट पेट्रोलिंग (गश्त) के दौरान स्पष्ट परिचालन अधिकार, साथियों का प्रबंधन और ड्यूटी के प्रति जवाबदेही तय होती है।

शुरुआत से ही नेतृत्व क्षमता विकसित करना:

  • 5 और 10 साल की सेवा के बाद जवानों को जूनियर कमान की भूमिकाएं देने से यह सुनिश्चित होता है कि जब वे हेड कांस्टेबल या सब-इंस्पेक्टर के स्तर तक पहुंचें, तब तक वे सैनिकों को संभालने, ड्यूटी रोस्टर बनाने और फील्ड प्रशासन में पूरी तरह कुशल हो चुके हों।

करियर में ठहराव को दूर करना: 
एक ही रैंक (बैज) के लिए दो दशकों से अधिक समय तक इंतजार करना जवानों का मनोबल गिराता है। पांच और 10 साल पर तय किए गए पड़ाव, करियर के स्पष्ट और हासिल किए जा सकने वाले लक्ष्य देते हैं, जिससे जवान अपनी शारीरिक और सामरिक क्षमता के चरम वर्षों के दौरान पूरी तरह सक्रिय और प्रेरित रहते हैं।

सेवा छोड़ने की दर में कमी: 

  • करियर में आगे बढ़ने के स्पष्ट रास्ते होने से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति और इस्तीफे के मूल कारणों का समाधान होता है। इससे बस्तर, कश्मीर घाटी और पूर्वोत्तर जैसे अति-संवेदनशील इलाकों में अनुभवी लड़ाके बल के साथ बने रहते हैं।

वर्दी की गरिमा और सामाजिक प्रतिष्ठा: 

  • सैन्य/अर्धसैनिक बलों में, रैंक के बैज बहुत गर्व का विषय होते हैं। समय पर रैंक मिलने से आत्म-सम्मान बढ़ता है, परिवार की प्रतिष्ठा बढ़ती है और पूरे बल की पहचान मजबूत होती है।

फील्ड अनुशासन को मजबूत करना: 
बीच के स्तर के एनसीओ (नॉन-कमीशंड ऑफिसर) रैंक, कंपनी ऑपरेटिंग बेस (सीओबी) के भीतर कमान की श्रृंखला को मजबूत करते हैं। जूनियर कांस्टेबल स्वाभाविक रूप से अपने वरिष्ठ लांस नायकों और नायकों के निर्देशों का पालन करते हैं, जिससे परिचालन के दौरान बेहतर अनुशासन और आपसी तालमेल बना रहता है।

वित्तीय और प्रशासनिक व्यवहार्यता:

चूंकि ये मध्यवर्ती रैंक तदर्थ / स्थानीय / टाइम स्केल आधार पर दिए जा सकते हैं, (जो मौजूदा एमएसीपी वित्तीय अपग्रेड के अनुरूप हैं), इसलिए इनसे होने वाला अतिरिक्त वित्तीय बोझ, मिलने वाले बड़े परिचालन लाभों की तुलना में नगण्य है। जनरल ड्यूटी कर्मियों के लिए 5 साल बाद 'लांस नायक' और 10 साल बाद 'नायक' के रैंक को तदर्थ एनसीओ रैंक के रूप में फिर से शुरू करना और उसके बाद 15 साल की सेवा पूरी होने पर 'हेड कांस्टेबल' के पद पर स्थायी पदोन्नति देना, सीआरपीएफ के निचले कैडर में आ रही ठहराव की समस्या का एक प्रभावी समाधान है।

यह रणनीतिक कदम, कर्मियों के सेवा छोड़ने की दर को काफी कम करेगा, सेक्शन-स्तर पर कमांड और कंट्रोल को मजबूत करेगा, युद्ध के लिए मनोबल बढ़ाएगा और पूरे बल में अनुशासन के उच्चतम मानकों को बनाए रखेगा। बल के पूर्व कार्मिकों का कहना है कि इस प्रस्ताव में वेतनमान की बढ़ोतरी का जिक्र नहीं है। रैंक के मुताबिक वेतन भी बढ़ना चाहिए। सिपाही के रिक्त पदों को अविलंब भरा जाए। अटैचमेंट को न्यूनतम किया जाए। नई व्यवस्था में एमएसीपी एवं अन्य वित्तीय लाभ प्रभावित नहीं होने चाहिए।

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