महाराष्ट्र: शाह बोले- कुछ राज्य विपक्षी दलों से जुड़े चीनी मिलों को नहीं दे रहे बैंक गारंटी, जानिए और क्या कहां
अमित शाह ने सवाल उठाया कि चीनी मिल से संबंधित मुद्दों के हल के लिए दिल्ली की ओर देखने के बजाय राज्य सरकारें अपने यहां ही इसे क्यों नहीं सुलझा सकती हैं।
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केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शनिवार को महाराष्ट्र में एमवीए सरकार को निशाने पर लेते हुए दावा किया कि ऐसे कुछ चीनी मिलों को बैंक गारंटी जारी नहीं की जा रही है, जिनके विपक्षी दलों के नेताओं से संबंध हैं। शाह अहमदनगर जिले में सहकारिता क्षेत्र से जुड़े एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। शाह ने शिरडी के साई बाबा मंदिर के दर्शन भी किए।
शाह बोले, तोड़ने नहीं कड़ियां जोड़ने आया हूं
शाह ने कहा, मैं यहां कुछ तोड़ने के लिए नहीं बल्कि लापता कड़ियों को जोड़ने आया हूं। हालांकि, मैंने देखा है कि कुछ राज्य सरकारें उन चीनी मिलों को बैंक गारंटी नहीं दे रही हैं जिनका प्रबंधन राजनीतिक रूप से विपक्षी दलों से जुड़ा हुआ है। चीनी मिल से संबंधित मुद्दों के हल के लिए दिल्ली की ओर देखने के बजाय राज्य सरकारें अपने यहां ही इसे क्यों नहीं सुलझा सकती हैं।
उन्होंने कहा कि यह प्रथा सही नहीं है। राज्य सरकार को राजनीति से ऊपर उठने की जरूरत है। मैं इस क्षेत्र में मूक दर्शक नहीं बनने जा रहा हूं। महाराष्ट्र का सहकारी आंदोलन कई लोगों के लिए काशी जितना ही पवित्र है। कोऑपरेटिव सोसायटी का प्रबंधन कौन करता है और इनका राजनीतिक झुकाव किस तरफ है, इसे देखने के बजाय यह महत्वपूर्ण है कि सहकारी समितियां क्या कर रही हैं।
We need to free the cooperative movement of shortcomings. There was a time when district cooperative banks of Maharashtra were looked up to, but today there are only three left. How did scams involving crores of money happen? Did RBI do it? No RBI didn't do it...: Amit Shah pic.twitter.com/0KS2Rpa9dJ
— ANI (@ANI) December 18, 2021
सहकारी आंदोलन को कमियों से मुक्त करने की जरूरत
वहीं, अहमदनगर में शाह ने कहा, हमें सहकारी आंदोलन को कमियों से मुक्त करने की जरूरत है। एक समय था जब महाराष्ट्र के जिला सहकारी बैंकों की ओर देखा जाता था, लेकिन आज केवल तीन ही बचे हैं। करोड़ों रुपये के घोटाले कैसे हुए? क्या आरबीआई ने ऐसा किया? नहीं आरबीआई ने ऐसा नहीं किया। मैं राजनीतिक टिप्पणी करने नहीं आया हूं। सहकारिता आंदोलन के कार्यकर्ताओं को बताना चाहता हूं कि केंद्र उनके साथ है। लेकिन साथ ही हमें दक्षता बढ़ाने, पेशेवर छात्रों को लाने और उन्हें कमान देने की जरूरत है।