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भारतीय गणतंत्र की कुछ खास बातें, क्या इनसे वाकिफ हैं आप
Tue, 22 Jan 2019 04:20 PM IST
आसिम खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आसिम खान
Updated Tue, 22 Jan 2019 04:20 PM IST
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1948 की शुरुआत में डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संविधान का मसौदा तैयार कर उसे संविधान सभा में प्रस्तुत किया। नवंबर 1949 में इस मसौदे में कुछ संशोधन कर इसे अपनाया गया। भारत का संविधान 26 नवंबर 1949 को अपनाया गया था और माननीय सदस्यों ने 24, जनवरी 1950 में इस पर अपने हस्ताक्षर किए। कुल 284 सदस्यों ने संविधान पर अपने हस्ताक्षर किए थे। जिस दिन संविधान पर हस्ताक्षर किये जा रहे थे उस दिन बाहर हल्की-हल्की बारिश हो रही थी जिसे एक अच्छा शगुन माना गया।
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गणतंत्र दिवस पर वीर चक्र, महा वीर चक्र, परम वीर चक्र, कीर्ति चक्र और अशोक चक्र जैसे वीरता पुरस्कारों से लोगों को सम्मानित किया जाता है। राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराते ही उन्हें 21 तोपों की सलामी दी जाती है। यह सलामी नौसेना और सेना के जवानों द्वारा भारत की स्वतंत्रता के लिए लड़ने वाले सैनिकों को सम्मान देने के लिए दी जाती है। एक इसाई स्तुति - 'मेरे साथ रहें' को गणतंत्र दिवस के समारोह में बजाया जाता है। यह कहा जाता है कि यह स्तुति महात्मा गांधी को बेहद पसंद थी।
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26 जनवरी की तारीख गणतंत्र दिवस के रूप में इसलिए चुनी गई थी क्योंकि संयोग से इसी दिन (26 जनवरी 1930) पूर्ण स्वराज दिवस की जयंती भी थी। भारत का राष्ट्रीय ध्वज को स्वतंत्रता से कुछ दिन पहले 22 जुलाई 1947 को इसे राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया गया। भारतीय ध्वज संहिता अब लोगों को अपने परिसर में राष्ट्रीय ध्वज फहराने की अनुमति देता है लेकिन आज़ादी के बाद के कुछ वर्षों तक यह संभव नहीं था।
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गणतंत्र दिवस एक तीन दिवसीय उत्सव है जिसमें ड्रिल और कला-प्रदर्शन होता है। बीटिंग द रिट्रीट का आयोजन गणतंत्र दिवस की समाप्ति के रूप में होता है। इस तीन दिवसीय उत्सव पर महत्वपूर्ण सरकारी इमारतों को लाइटो से सजाया जाता है। गणतंत्र दिवस के तीसरे दिन बीटिंग द रिट्रीट का आयोजन किया जाता है। शाम के 6 बजते ही बगलर्स रिट्रीट की धुन बजाते हैं और राष्ट्रीय ध्वज को उतार लिया जाता है तथा राष्ट्रगान गाया जाता है और इस प्रकार गणतंत्र दिवस का समापन होता है।