फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Some doctors messing with the lives of patients, truth in National Human Rights Commission figures

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के आंकड़े दे रहे गवाही, लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे कुछ डॉक्टर

Tue, 30 Jul 2019 02:43 PM IST
आसिम खान अमित शर्मा, नई दिल्ली
अमित शर्मा, नई दिल्ली Published by: आसिम खान Updated Tue, 30 Jul 2019 02:43 PM IST
विज्ञापन
Some doctors messing with the lives of patients, truth in National Human Rights Commission figures
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

सोमवार को लोकसभा में पास हुए नेशनल मेडिकल कमीशन बिल के कई प्रावधानों पर डॉक्टर कड़ा विरोध जता रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि स्वास्थ्य क्षेत्र में भारी गड़बड़ी है जिसे तुरंत ठीक किए जाने की जरूरत है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के सामने स्वास्थ्य क्षेत्र से आये मामलों को देखें तो यह बात प्रमाणित भी होती है कि लोगों के स्वास्थ्य अधिकारों का इस क्षेत्र में काम कर रहे अधिकारियों के द्वारा बड़े पैमाने पर हनन किया जा रहा है। 

विज्ञापन


एनएचआरसी ने अपनी जांच के दौरान वर्ष 2019 में अब तक 46 से ज्यादा केसों में स्वास्थ्य अधिकारियों के द्वारा भारी लापरवाही बरतने की बात पाई है। आयोग ने ऐसे अधिकारियों के द्वारा पीड़ित परिवारों को करोड़ों रुपये की क्षतिपूर्ति भी दिलवाई है। ऐसे कुल मामलों में जहां आयोग ने भ्रष्टाचार होना पाया है और क्षतिपूर्ति दिलवाई है, उसमें स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मामलों की संख्या 18.11 फीसदी है। 
विज्ञापन


स्वास्थ्य सेवाओं में मरीजों की जान की गंभीरता को देखते हुए यह आंकड़ा गंभीर माना जा सकता है। जानकारी के अनुसार इसी वर्ष जनवरी में एनएचआरसी ने नौ केसों में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की भारी लापरवाही पाई थी और उसने पीड़ितों को लगभग 21 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति दिलवाई थी। आयोग ने फरवरी में दो केसों में आठ लाख रुपये, मार्च में छह केसों में 10.50 लाख रुपये, अप्रैल में सात केसों में 27.10 लाख रुपये, मई में सात केसों में 22 लाख रुपये और जून माह में 15 केसों में 52.95 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति दिलाने का आदेश दिया है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


ये आंकड़े केवल राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सामने पेश किए गए मामलों के हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य मानवाधिकार आयोगों और विभिन्न अदालतों के मामलों को भी जोड़ दिया जाए तो यह बहुत गंभीर समस्या का रूप धारण कर लेगी। स्वास्थ्य विभाग से जिस प्रकार की लापरवाहियां सामने आई हैं, उनमें डॉक्टरों की भूमिका के साथ-साथ अन्य सहयोगी स्वास्थ्य अधिकारियों के द्वारा की जा रही गड़बड़ी भी शामिल है। 

आयोग ने ऐसे मामलों में भी अधिकारियों को दोषी पाया है जिनमें मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं देने से बिना किसी उचित वजह के इनकार कर दिया गया था। टेस्ट करने से इनकार करना, सरकारी अस्पतालों के अधिकारियों के द्वारा प्राइवेट संस्थानों से टेस्ट कराने की अनुचित मांग और अधिकारियों का अपनी ड्यूटी पर उपलब्ध न होने जैसी अनेक गंभीर गड़बड़ी सामने आई है। 

क्या कहते हैं डॉक्टर

स्वास्थ्य अधिकारियों के द्वारा बरती जा रही लापरवाही, और मरीजों और डॉक्टरों के बीच बढ़ती मुकदमेबाजी पर वरिष्ठ हार्ट एंड लंग्स स्पेशलिस्ट डॉ. संदीप अटावर का कहना है कि सभी मेडिकल प्रोफेशनल्स के द्वारा अपनी भूमिका को उचित ढंग से निर्वाह किया जाना चाहिए क्योंकि यह ऐसा पेशा है जिससे सीधे तौर पर लोगों की जिंदगी जुड़ी होती है। 

डॉ. संदीप अटावर के मुताबिक़, कई बार मरीजों के रिश्तेदार इलाज के दौरान की भारी तकनीकी परेशानी को नहीं समझते हैं जो बाद में उनके और डॉक्टरों के बीच विवाद की वजह बनती है। इससे बचने के लिए डॉक्टर समुदाय को ज्यादा से ज्यादा पारदर्शिता बरतनी चाहिए। 


कठिन मामलों में मरीजों के रिश्तेदारों को इलाज की दूसरी या तीसरी डॉक्टर ओपिनियन लेने की सलाह दी जानी चाहिए जिससे मरीजों को यह लगे कि उनका वही इलाज उचित है जो किया जा रहा है। इससे दोनों के बीच रिश्ते सुधरेंगे। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed